दरभंगा एसएसपी पर नेताजी ने साधा निशाना ?नेताजी का गरुड़ सातवें आसमान पर ।जरा इधर भी तो देखिये साहब ?
दरभंगा /संजय राय
कथित शराब के पीने से हुई मौत को लेकर दरभंगा जिला के मकसूदपुर गांव मे विपक्ष के नेता स्थानीय एसएसपी पर जमकर बरसे, पर उनका कसूर क्या था ?उस गांव मे पहुंचे विपक्ष के नेता विजय सिन्हा ने दरभंगा एसएसपी अवकाश कुमार को लेकर हाय -तौबा मचा दिया ?उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनकी अकूत सम्पति की जांच सत्ता बदलते ही करवाऊंगा ?
नेता जी की नेतागिरी की भूख दमक रही थी।किस किस पर जांच कराएंगे साहब ,पूरे राज्य का यही हाल हैं।
नेता जी ,इस मामले मे एसएसपी का कसूर बस इतना ही था कि वे जिला के कप्तान हैं।इसी कारण आरोप के छींटे उनपर लगाते हुये आप चलते बने ?
लेकिन जिन पुलिस पदाधिकारियों की शराब और अन्य मामलों मे स्पष्ट संलिप्तता दिखाई पड़ती हैं ,उसे लेकर आप हाय तौबा क्यू नहीं मचाते। आप मधुबनी जिला के जयनगर अनुमंडल जाईये और वहां पता कीजिये फिर आपको पता चलेगा कि पुलिस और शराब माफियाओं का कितना बड़ा गठजोड़ हैं।
दरभंगा जिला तो फिर भी इस मामले मे ठीक ठाक हैं ।
हम आपको बताना चाह रहें हैं जयनगर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी का,जिन्होंने पूरे जयनगर मे शराब माफियाओं के हौसले को बुलंद कर रखा हैं।
आप उनके कार्यशैली से अवगत हो जाईये और उनपर जांच कराने के लिये विधानसभा मे प्रश्न उठाईये।सबूत भी हैं ,और उनके कार्यशैली के घिनौने धब्बे भी ?और यह बात साबित होता हैं उनके द्वारा पकड़े गये मोटरसाइकिल के बाद दर्ज कराए गये प्राथमिकी और उसके बाद उनके पर्यवेक्षण टिप्पणी से ?
उनके द्वारा निकाले गये पर्यवेक्षण टिप्पणी मे कैसे शराब माफियाओं को मदद पहुंचाया गया हैं यह अवलोकन करने से पता चल जाएगा ।आप अगर बिहार मे ऐसे ऐसे पदाधिकारियों के कार्यशैली को लेकर मुद्दा बनाएंगे और प्रश्न उठाएंगे और जांचों प्रांत कारवाई होती हैं तो बिहार मे शराब बंदी का असर दिखाई पड़ने लगेगा।
हम आपको बताना चाह रहें हैं कि जयनगर थाने मे दर्ज एक मामले मे जयनगर के एसडीपीओ ने जिसे बेगुनाह बताया हैं वह शराब का बड़ा तस्कर हैं । यह हम नहीं उस तस्कर का नेपाली लाइसेंस बता रहा हैं।
जयनगर थाने मे दर्ज कांड (482/22)के मामले मे जयनगर एसडीपीओ द्वारा जिन तीन आरोपियो को बेगुनाह बताते हुये अनुसंधान मे रखा गया था उस आरोपी के बारे मे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।वह ऐसा आरोपी हैं जिसे माफ तो कतई नहीं किया जा सकता।
बिहार सरकार ने शराब बंदी की ,और यह आरोपी पूरे बिहार मे शराब को धड़ल्ले से बेचना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं बिहार मे शराब बेचकर इतना पैसा कमाया जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। ऐसे आरोपी को एसडीपीओ द्वारा बेगुनाह बताना अपने आप मे बड़ा प्रश्न हैं।
इस प्राथमिकी मे दर्ज नामजद नन्द कुमार गोइत नेपाल के धनुषा जिला के फलवडीया ,जनकनन्दिनी 1 के स्थायी रहने वाला हैं।
इनके दुकान का नाम भगवती कोस्ट स्टोर्स हैं। इन्हें मदिरा वितरक का लाइसेंस प्राप्त हैं ,इस लाइसेंस के तहत नेपाल मे मदिरा बेच सकते हैं। लेकिन इन्होंने जयनगर अनुमंडल मे एक कपड़े की दुकान खोलकर वहां से पूरे बिहार मे नेपाल निर्मित शराब का बिक्री करने लगा । यह शराब गौरव सोफी नेपाली शराब के नाम से चर्चित हैं।
बिहार की पुलिस जब इस शराब को पकड़ती हैं तो सोफिया नेपाली शराब बरामद होने की बात कहती हैं या फिर इसी नाम से चर्चित हैं।
जयनगर एसडीपीओ ने चार दिसंबर 22को 11.45बजे गुप्त सूचना के आधार पर जयनगर कमला पुल के निकट से दस -ग्यारह मोटरसाइकिल को शराब के साथ पकड़ी थी और एसडीपीओ के निर्देश पर ही थाना पुलिस ने इस मामले मे (482/22)मामला दर्ज किया था। इस मामले मे पुअनि धीरेन्द्र सिंह के ब्यान पर प्राथमिकी अभियुक्त नन्द कुमार गोइत पेसर ना मालूम ,नवीन गोइत एवं सुनील गोइत पिता नन्द कुमार गोइत ,उपेंद्र यादव पे उतिम यादव ,खन्ना मुखिया ,रोशन मुखिया दोनो पेसर गुदड़ी मुखिया तीनों साकिन कोरहिया ,लाल कुमार यादव पेसर राम चंद्र यादव साकिन डोरवार थाना के अलावे चार पांच अज्ञात के विरुद्ध जब्ती सूची बनाते हुये पुलिस ने सभी को नामजद किया था,इसके अलावे जब्ती सूची मे करीब दस ,ग्यारह मोटरसाइकिल शामिल हैं।
जयनगर एसडीपीओ की कार्यशैली देखिये ,
अब ऐसे माफिया को एसडीपीओ के पर्यवेक्षण मे यह कह दिया गया कि व्यापारिक द्वेष के कारण एवं प्रति स्पर्धा एवं राजनीति के कारण उनके विरोधी द्वारा पिता नन्द किशोर गोइत और उनके दोनों बेटे नवीन गोइत और सुनील गोइत को एक साजिश के तहत कांड मे नाम दे दिया गया हैं ,इन तीनों का खराब चरित्र नहीं हैं और कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हैं इसीलिये सभी बेगुनाह हैं ,यही नहीं इस मामले मे पिता पुत्र सभी को अनुसंधान मे रखकर भरपूर तरीके से बचाने का प्रयास किया गया लेकिन मधुबनी के एसपी को इस बात का पता चल गया कि ये तीनों बाप बेटा शराब माफिया हैं और उन्होंने एसडीपीओ के पर्यवेक्षण टिप्पणी को सीधे पलटते हुये पूरे मामले को सत्य करार देते हुये अनुसंधानकर्ता को गिरफ्तारी का आदेश दे दिया।
अब बाप बेटे अपना कपड़े का दुकान बंद कर फरार हैं।अब ऐसे मे प्रश्न उठना लाजमी हैं कि जयनगर एसडीपीओ को आखिर यह बात क्यों पता नहीं लगी कि नन्द कुमार गोइत एक शराब कारोबारी हैं ?जयनगर का बच्चा बच्चा यह कह रहा हैं कि वह नेपाल का मूल निवासी हैं और जयनगर मे कपड़े का दुकान खोलकर बिहार के कई भागों मे यहां से शराब बेचता हैं। इस कारण बिहार के हजारों बच्चे इस कारोबार मे संलिप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर रहें हैं ?इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद यह भी प्रश्न उठता हैं कि आखिर ऐसा कौन सा कारण हैं कि एसडीपीओ ने बाप बेटे को बेगुनाह बता दिया। इसके आड़ मे कहीं बड़ा खेल बेल तो नहीं। सरकार या पुलिस मुख्यालय को भी इस मामले मे संज्ञान लेकर जांच कराना चाहिये कि ऐसा कौन सा कारण बना कि एसडीपीओ ने शराब माफिया को क्लीन चिट दे दिया।स्थानीय लोंगों का कहना कि इस कारोबार से ये शराब माफिया कम दिनों मे कई करोड़ की सम्पति अर्जित की हैं और पुलिस की मिली भगत से कई वर्षों तक इसका कारोबार फलता फूलता रहा ,इस कारण इसपर पूर्व मे एक भी प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई।और इतना सब कुछ होने के बाद भी शराब की बिक्री जारी हैं।
शराब माफियाओं का जयनगर मे मन इतना बढ़ा हुआ हैं कि पुलिस जब इन्हें पकड़ने जाती हैं तो पुलिस को घेरकर पिट देती हैं।
तीन बार उत्पाद विभाग के अधिकारियों की पिटाई हुई वहीं एक बार थाना के पेंथर् मोबाईल की पिटाई हुई यही नहीं पेंथर मोबाईल का मोटरसाइकिल और पिस्टल भी शराब माफियाओं ने छीन लिया था।
सूत्र बताते हैं कि शराब माफियाओं की मदद से ही पेंथर मोबाईल का मोटरसाइकिल और पिस्टल बरामद किया गया।
अब ऐसे मे सवाल उठता हैं कि ऐसे एसडीपीओ के विरुद्ध जिला के वरीय पुलिस अधिकारियों ने सरकार को क्यू अवगत नहीं कराया।
सर आप ऐसे ऐसे मुद्दे खोजिये जहां पुलिस की स्पष्ट संलिप्ता दिखाई पड़ती हैं वहां गरजिये और कारवाई कराने का भरसक प्रयास कीजिये ,यह व्यवस्था खुद व खुद सुधर जाएगी।
सूत्रों का कहना हैं कि जयनगर अनुमंडल मे जीतने भी कांड शराब से जुड़े मामलों मे दर्ज हुये हैं उसमें अधिकांश मामलों मे शराब से जुड़े माफियाओं को जयनगर के एसडीपीओ ने पर्यवेक्षण टिप्पणी मे राहत पहुंचाया हैं जो जांच का विषय हैं ?
