सिंहवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य पर लगातार हो रहैं हैं फर्जीवाड़े का खेल ,नगर निगम के फर्जी मुहर और साइन से बन रहें थे जन्म प्रमाणपत्र।
सिंहवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य पर लगातार हो रहैं हैं फर्जीवाड़े का खेल ,नगर निगम के फर्जी मुहर और साइन से बन रहें थे जन्म प्रमाणपत्र।
दरभंगा /संजय कुमार राय
आखिरकार यह साबित हो गया कि सिंहवाड़ा स्वास्थ्य केन्द्र मे नाजायज पैसे की वसूली कर फर्जीवाड़ा चल रहा था ,फर्जी जन्म पत्र बनाए जा रहें थे,नगर निगम के मुहर लग रहें थे और फर्जी हस्ताक्षर भी हो रहा था।
अब ऐसा लग रहा हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के आरोप मे डाटा ऑपरेटर राजीव कुमार पर प्राथमिकी तय हैं।
नगर आयुक्त कुमार गौरव को इस बात की जानकारी मिली थी तो उन्होंने भी स्वीकार किया था कि यह जन्म प्रमाण पत्र नगर निगम से निर्गत नहीं हैं। नगर आयुक्त के पहल पर ही जांच टीम सिंहवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंची और कई बिंदुओं पर जांच की।
टीम मे जिला सांख्यिकी पदाधिकारी कार्यालय के अवर सांख्यिकी पदाधिकारी वीरेंद्र प्रसाद देब ,सदर प्रखंड के सांख्यिकी पदाधिकारी पवन कुमार सिंह ,लिपिक सूर्य नारायण सहनी ,डेटा इंट्री ऑपरेटर गणेश कुमार के अलावे सिंहवाड़ा प्रखंड के सांख्यिकी पदाधिकारी विनोद कुमार शामिल थे।
इस मामले की शिकायत अनवर आलम ने की थी। अनवर का आरोप था कि 500से 5000/रुपये तक रुपये की उगाही कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र डेटा ऑपरेटर द्वारा बनाए जाते थे इसे लेकर उन्होंने जिला के कई पदाधिकारियों से शिकायत भी की थी। यही नहीं कई अन्य लोंगों ने भी इसकी शिकायत की थी।
सूत्रों का यह भी कहना हैं कि सिविल सर्जन को इस बात की जानकारी रहते हुये भी उनके द्वारा कारवाई नहीं की गई थी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंची टीम ने डेटा ऑपरेटर पर लगे आरोपों की जांच करीब दो घंटे तक की। टीम के सदस्यों ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ॰ हिना खुर्शीद के चेंबर मे आरोपी डेटा ऑपरेटर और शिकायतकर्ता को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की । वादी एवं प्रतिवादी के मोबाईल पर हुई चैट का भी जांच किया गया जो सही पाया गया। जन्म प्रमाणपत्र पर जाली हस्ताक्षर और मुहर भी पाये गये हैं। वहीं सीएचसी के प्रधान लिपिक राम प्रसाद का कहना हैं कि जांच के दौरान आरोप सही पाया गया हैं। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के तीन कॉपी फर्जी पाये गये हैं जो वास्तव मे सही हैं।
इधर सूत्रों का कहना हैं कि जांच मे गई टीम डेटा ऑपरेटर का लेप टॉप जब्त कर जांच करती तो सेंकड़ों बनाए गये फर्जी प्रमाण पत्र मिलते लेकिन जांच टीम ने लेप टॉप जब्त नहीं किया।सवाल यही हैं कि जांच मे पहुंची टीम ने डेटा ऑपरेटर का आखिर लेप टॉप जब्त क्यू नहीं किया।
देर ही सही लेकिन डेटा ऑपरेटर पर अगर नगर निगम प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी जाती हैं तो प्राथमिकी के बाद भी पुलिस उसका लैंप टॉप जरूर जब्त करेंगी।अगर लेपटॉप जब्त हुये तो कई राज के खुलासे हो सकते हैं। अगर यह डाटा डेटा ऑपरेटर ने डिलीट भी कर दिया होगा तो पुलिस डिलीट डाटे को भी उपलब्ध कर बड़ी खुलासे कर सकती हैं।
दरअसल फर्जी रूप से काम कर रहें लोंगों को भी बचाने मे सिविल सर्जन की भूमिका भी अहम हैं अगर ऐसा नहीं हैं तो
यह वहीं सामुदायिक केन्द्र हैं जहां एक नर्स के पति ने कई बार फर्जी विकलांगिता प्रमाण पत्र बनाया जिसमें एक प्रमाण पत्र सिविल सर्जन के आदेश पर बना था। इस मामले मे भी प्राथमिकी हुई लेकिन पुलिस की कारगुजारियो के कारण इस मामले के दोषी एवं अन्य चिकित्सकों पर कारवाई नहीं हुई और ना ही पर्यवेक्षण मे दोषी चिकित्सकों का नाम आया ,और जो दोषी थे साक्ष्य के अभाव मे न्यायालय ने जमानत दे दिया।
विभाग के उच्च्स्थ पद पर काबिज या प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस पदाधिकारियो की कार्यशैली संदेहास्पद रहती हैं। ऐसे मे न्याय संगत बात करना ही बेईमानी हैं। आखिरकार यह साबित हो गया कि सिंहवाड़ा स्वास्थ्य केन्द्र मे नाजायज पैसे की वसूली कर फर्जी जन्म पत्र बनाए जा रहें थे। अब ऐसा लग रहा हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के आरोप मे डाटा ऑपरेटर राजीव कुमार पर प्राथमिकी तय हैं।
नगर आयुक्त कुमार गौरव को इस बात की जानकारी मिली थी तो उन्होंने भी स्वीकार किया था कि यह जन्म प्रमाण पत्र नगर निगम से निर्गत नहीं हैं। नगर आयुक्त के पहल पर ही जांच टीम सिंहवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंची और कई बिंदुओं पर जांच की। टीम मे जिला सांख्यिकी पदाधिकारी कार्यालय के अवर सांख्यिकी पदाधिकारी वीरेंद्र प्रसाद देब ,सदर प्रखंड के सांख्यिकी पदाधिकारी पवन कुमार सिंह ,लिपिक सूर्य नारायण सहनी ,डेटा इंट्री ऑपरेटर गणेश कुमार के अलावे सिंहवाड़ा प्रखंड के सांख्यिकी पदाधिकारी विनोद कुमार शामिल थे।
इस मामले की शिकायत अनवर आलम नै की थी। अनवर का आरोप था कि 500से 5000/रुपये तक रुपये की उगाही कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र डेटा ऑपरेटर द्वारा बनाए जाते थे इसे लेकर उन्होंने जिला के कई पदाधिकारियों से शिकायत भी की थी। यही नहीं कई अन्य लोंगों ने भी इसकी शिकायत की थी। सूत्रों का यह भी कहना हैं कि सिविल सर्जन को इस बात की जानकारी रहते हुये भी उनके द्वारा कारवाई नहीं की गई थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंची टीम ने डेटा ऑपरेटर पर लगे आरोपों की जांच करीब दो घंटे तक की। टीम के सदस्यों ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ॰ हिना खुर्शीद के चेंबर मे आरोपी डेटा ऑपरेटर और शिकायतकर्ता को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की गई। वादी एवं प्रतिवादी के मोबाईल पर हुई चैट का भी जांच किया गया जो सही पाया गया। जन्म प्रमाणपत्र पर जाली हस्ताक्षर और मुहर भी पाये गये हैं। वहीं सीएचसी के प्रधान लिपिक राम प्रसाद का कहना हैं कि जांच के दौरान आरोप सही पाया गया हैं। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के तीन कॉपी फर्जी पाये गये हैं जो वास्तव मे सही हैं। इधर सूत्रों का कहना हैं कि जांच मे गई टीम डेटा ऑपरेटर का लेप टॉप जब्त कर जांच करती तो सेंकड़ों बनाए गये फर्जी प्रमाण पत्र मिलते लेकिन जांच टीम ने लेप टॉप जब्त नहीं किया। खैर देर ही सही लेकिन डेटा ऑपरेटर पर प्राथमिकी दर्ज होती हैं और पुलिस ही उसका लैंप जब्त करती हैं तो कई राजदार खुलासे हो सकते हैं अगर यह डाटा डेटा ऑपरेटर ने डिलीट भी कर दिया होगा तो पुलिस डिलीट डाटे को भी उपलब्ध कर बड़ी खुलासे कर सकती हैं। दरअसल फर्जी रूप से काम कर रहें लोंगों को भी बचाने मे सिविल सर्जन की भूमिका भी अहम हैं अगर ऐसा नहीं हैं तो यह वहीं सामुदायिक केन्द्र हैं जहां एक नर्स के पति ने कई बार फर्जी विकलांगिता प्रमाण पत्र बनाया जिसमें एक प्रमाण पत्र सिविल सर्जन के आदेश पर बना था। इस मामले मे भी प्राथमिकी हुई लेकिन पुलिस की कारगुजारी के कारण इस मामले के दोषी अन्य चिकित्सकों पर कारवाई नहीं हुई और दोषी को न्यायालय ने जमानत दे दिया।
विभाग के उच्च्स्थ पद पर काबिज या प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस पदाधिकारियो की कार्यशैली संदेहास्पद रहती हैं। ऐसे मे न्याय संगत बात करना ही बेईमानी हैं। इस भ्रष्ट सिस्टम मे कुछ भी हो सकता हैं।
दुर्गा पूजा के छुट्टी के दौरान भी न्यायालय मे आपराधिक मुकदमों के जमानत पर होगी सुनवाई ,जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जारी किया आदेश।
मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल मे पदस्थापित बड़े अधिकारियों के कार्यशैली पर उठ रहें हैं सवाल ?सवाल यही हैं कि शराब और बालू माफियाओं से इनका तार कहीं जुड़ा तो नहीं ?सरकार के राजस्व की हो रही क्षति।