दरभंगा /संजय कुमार राय

मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल मे पदस्थापित बड़े अधिकारियों के कार्यशैली पर उठ रहें हैं सवाल ?सवाल यही हैं कि शराब और बालू माफियाओं से इनका तार कहीं जुड़ा तो नहीं ?सरकार के राजस्व की हो रही क्षति।

 

मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल मे पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के  गठजोड़ के सहारे शराब व्यवसायी और बालू माफियाओं की बल्ले बल्ले हैं। इस कारण सरकार के करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि भी हो रही हैं।

चलता रहा हाई वोल्टेज ड्रामा 

कल देर शाम एक ट्रेक्टर के पकड़े जानें के बाद जयनगर अनुमंडल मे घंटों हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। कई स्थानीय पत्रकार इधर से उधर भटकते रहें ?पत्रकारों को पता चला कि बालू का एक बिना नंबर का ट्रेक्टर पुलिस ने पकड़ा हैं ,जिसे थाने से अन्यत्र लगा दिया गया हैं और पुलिस पदाधिकारी उसकी डील कर रहें हैं। कुछ देर बाद पता चला कि एक लाख मे डील हुई हैं। कई पत्रकार स्थानीय एसडीओ से पूछने लगे कि कोई बालू का ट्रेक्टर पकड़ा गया हैं जो थाने केम्पस मे नहीं हैं।एसडीओ ने पत्रकारों से कहा कि यह बात जयनगर के एसडीपीओ से पता कीजिये।एसडीपीओ के मोबाईल पर कई पत्रकारों ने फोन लगाया लेकिन किसी पत्रकार का उन्होंने फोन नहीं उठाया।

पत्रकारों ने मचाया हाय तौबा 

जब पत्रकारों ने हाय तौबा मचाया तो कुछ घंटे बाद यानि रात के अंधेरे मे ट्रेक्टर थाने पहुंच गई। कोई पदाधिकारी कह रहें थे कि मट्टी लदा हुआ हैं जब्कि उस ट्रेक्टर पर बालू लदा हुआ था।
ऐसे मे लाजमी हैं कि पुलिस पदाधिकारियों के कार्यशैली पर सवाल उठेगा ही ?जयनगर मे कई ऐसे माफिया हैं जो दर्जनों ट्रेक्टर रखकर बालू का अवैध कारोबार करते हैं और सूत्र बताते हैं कि ऐसे बालू माफिया की सांठ गांठ अनुमंडल स्तर के सभी पदाधिकारियों से हैं। इस कारण इनके ट्रेक्टर धड़ल्ले से नदियों के बालू को काटकर बेच रहें हैं। वहीं कोई नया व्यक्ति बालू काटकर बेचता हैं या अपने कार्यों के लिये ले जाता हैं तो ये माफिया अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी को फोन कर उनका ट्रेक्टर जब्त करा देते हैं या फिर आर्थिक दोहन कर छोड़ देते हैं।वैसे बता दे कि

कई मामलों मे एसडीपीओ के कार्यशैली पर उठ रहें हैं सवाल 

जयनगर एसडीपीओ की भूमिका कई मामलों मे चर्चित रहा हैं। कई लोंगों ने एसडीपीओ पर पूर्व मे भी शराब कारोबारियो से सांठ गांठ का आरोप लगाते हुये बिहार के डीजीपी से लेकर जिले के एसपी और मिथिला क्षेत्र के आईजी को पत्र दिया था।इस आलोक मे पुलिस मुख्यालय पटना के आदेश पर मधुबनी जिले के मुख्यालय  डीएसपी जांच भी कर रहें हैं लेकिन अब तक इस मामले मे मुख्यालय को जांच प्रतिवेदन नहीं भेजा गया हैं जब्कि जयनगर थाने मे दर्ज एक मामले (482/22)मे एसडीपीओ की पर्यवेक्षण टिप्पणी संदेहास्पद हैं। इस मामले मे एसडीपीओ ने नामजद नन्द कुमार गोइत एवं इनके दोनों पुत्रों को बचाने का भरसक प्रयास किया था लेकिन मधुबनी एसपी ने अपने प्रतिवेदन मे तीनों का नाम जोड़ते हुये मामले को सत्य करार दिया।

एसडीपीओ की पर्यवेक्षण टिप्पणी विवादास्पद 

यही नहीं कई और भी एसडीपीओ की पर्यवेक्षण टिप्पणी हैं जो विवादास्पद हैं । नन्द कुमार गोइत एक ऐसा नाम हैं जो बिहार मे बिक रही नेपाली सोफी शराब का सरगना हैं यह हम नहीं कह रहें हैं नेपाल देश के धनुषा जिला से निर्गत उसका लाइसेंस बता रहा हैं।और …….. नेपाली शराब के लाइसेंस से जग जाहिर हैं।

सूत्र कहते हैं कि हाई तौबा मचने के बाद ट्रेक्टर को थाने पर लगा दिया गया हैं।इस मामले मे प्राथमिकी अबतक नहीं हुई हैं।हालांकि अब जब ट्रेक्टर थाने पहुंच गई हैं तो प्राथमिकी होना तय हैं।