एक घटना, तीन  प्राथमिकी और छह-सात माह बाद दूसरे केस में गिरफ्तारी! मोरो पुलिस समेत जिला के तमाम वरीय पदाधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल ???

कांड संख्या 19/26, 29/26 और 27/26 के घटनाक्रम में विरोधाभास का आरोप, परिजनों ने डीएसपी से डीआईजी तक की समीक्षा पर उठाए सवाल

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा जिले की पुलिस इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में है। सवाल थानेदारों की कार्यप्रणाली से लेकर वरीय पुलिस पदाधिकारियों की निगरानी और समीक्षा तक पर उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ थानों में वर्दी के रौब का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय वरीय पदाधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में बेहतर पुलिसिंग की संज्ञा देना क्या उचित होंगा ?

मामला मोरो थाना से जुड़ा है, जहां कांड संख्या 19/26, 29/26 और 27/26 को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं और कई बार एसएसपी और डीआईजी को आवेदन देकर न्याय की मांग भी किये हे।

परिजनों के अनुसार, मारपीट की घटना को लेकर दो प्राथमिकी कांड संख्या 19/26 और 29/26 दर्ज की गईं। वहीं, तीसरा मामला कांड संख्या 27/26 घटना के सात -आठ दिन बाद दर्ज किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन मामलों के घटनाक्रम और प्राथमिकी में दर्ज तारीख एवं समय को लेकर जांच की जरूरत थीं लेकिन जांच कर्ता से लेकर पर्यवेक्षण कर्ता और समीक्षाकर्ता ने मामले में कोई ठोस कारवाई नहीं की।

परिजनों का दावा है कि कांड संख्या 19/26 में जिस घटना की तारीख और समय दर्ज हैं, वही तारीख और समय दूसरे मामले 27/26 से संबंधित आवेदन और प्राथमिकी में भी दर्ज हे ,ऐसे में क्या यह संभव हे कि कोई जख्मी व्यक्ति एक तारीख और एक समय में दो जगहों पर घटना को अंजाम दें रहा हो ?

ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि दोनों मामलों में घटना की तारीख और समय एक ही हैं, तो घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति क्या होगी ?

एक मामले में जमानत, दूसरे में जेल में बंद होने का आरोप

परिजनों का कहना है कि मामले की समीक्षा के दौरान सदर-1 के एसडीपीओ को घटनाक्रम की जानकारी थी,जिसके कारण इतने दिन बीत जाने के बाद उन्होंने अपना पर्यवेक्षण टिप्पणी नहीं निकाला लेकिन उनके प्रशिक्षण में जाते ही सदर डीएसपी 2ने इस मामले को सत्य करार दें दिया और निर्दोष को जेल की हवा खिला दी।

परिजनों का दावा है कि  कांड संख्या 27/26  उनका भाई निर्दोष है और जेल में बंद है। पर्यवेक्षण और समीक्षा पर भी सवाल

परिजनों ने सवाल उठाया है कि यदि घटना की तारीख, समय और संबंधित व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर विरोधाभास था, तो पुलिस के वरीय पदाधिकारियों ने पर्यवेक्षण और समीक्षा के दौरान इन बिंदुओं की जांच क्यों नहीं की? उनका आरोप है कि डीएसपी से लेकर डीआईजी स्तर तक के अधिकारियों ने यदि मामले की समीक्षा की, तो कथित विसंगतियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?और अगर ध्यान दिया गया तो दोषी अनुसंधानक और थानाध्यक्ष पर कारवाई क्यूँ नहीं की गई ?

आक्रोश जताते हुए परिजनों ने कहा कि सरकार पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती लोगों को न्याय दिलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करती है। ऐसे में यदि किसी थाने की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि शिकायतों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

फिलहाल, पूरे मामले में प्राथमिकी की मूल प्रतियों, घटना की तारीख और समय, डीएमसीएच के रिकॉर्ड तथा पुलिस की पर्यवेक्षण रिपोर्ट का मिलान महत्वपूर्ण है,और अगर उनके द्वारा उठाए गये सवालों पर निष्पक्ष समीक्षा नहीं होती हे तो यह दुर्भाग्य पूर्ण हे फिर ऐसे वरीय पदाधिकारियों को जिला में रहने और नहीं रहने से कोई मतलब नहीं हे ,परिजनों ने कहा कि सरकार को चाहिये ऐसे ऐसे पदाधिकारी को किसी जिला में तैनात करने के बजाय मुख्यालय में ही जगह दें तो बेहतर हे क्यूंकि फरियादियों की फरियाद पर इन सभी के द्वारा कोई कारवाई नहीं की जाती हे।

पीड़ित पक्ष का कहना हे 26 अक्टूबर को भी डीआईजी ,एसएसपी ,सीटी एसपी को आवेदन देकर कहा गया हे कि उसका भाई कांड संख्या 27/26में निर्दोष हे और उस केस में बहस था ,न्यायालय ने 13दिनों के भीतर थानाध्यक्ष को केस डायरी जमा करने का निर्देश दिया था ,न्यायालय में बहस हो जाने के बाद मोरो थाना की पुलिस ने केस डायरी समर्पित किया जिसके कारण न्यायालय ने जमानत के लिये अगली तिथि तय की हे अगर समय रहते थाना पुलिस डायरी जमा कर देती तो जमानत मिल जाती।

पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कांड संख्या 19/26में थाना पुलिस ने सारी कारवाई पूरी की लेकिन उनके कांड 29/26में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने की लेकिन कई आरोपी आठ माह गुजरने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की,आरोप हे कि स्थानीय पुलिस की इस दोहरी नीति का क्या होंगा ?हम तो आम व्यक्ति हे कोई खास हे नहीं जिसके कारण न्याय नहीं मिला हे।