,सुरक्षित बचपन अभियान: बच्चों को बताए गए पोक्सो कानून और गुड टच-बैड टच के मायने

स्कूलों में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम, दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने का दिया संदेश

दस्तक 7 मीडिया/ दरभंगा

दरभंगा। बच्चों को शोषण, दुर्व्यवहार और बाल अपराधों से बचाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से जिले के विभिन्न विद्यालयों में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों को पोक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल श्रम, बाल विवाह, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों को गुड टच-बैड टच के अंतर को समझाते हुए किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा के निर्देश पर न्यायिक पदाधिकारियों के नेतृत्व में यह अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रमों में बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा के उपायों और जरूरत पड़ने पर मिलने वाली मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में भी बताया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रभारी सचिव सह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जुनैद आलम ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ओर से बच्चों को जागरूक करने के लिए अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत पहले चरण में 26 से 31 अक्टूबर तक न्यायिक पदाधिकारियों के नेतृत्व में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का दूसरा चरण नवंबर 2026 से नवंबर 2027 तक विद्यालय स्तर पर संचालित किया जाएगा।

इन विद्यालयों में आयोजित हुए कार्यक्रम

मारवाड़ी उच्च विद्यालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुधांशु रंजन सिंह, मुकुंदी चौधरी उच्च विद्यालय, कादिराबाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभिषेक पनवार तथा महावीर साहू मध्य विद्यालय, मदारपुर में न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद सौरव के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वहीं, बेनीपुर पब्लिक स्कूल में सिविल जज जूनियर डिवीजन श्रेया कुशवाहा और बिरौल के कोयला जान स्थित उच्च विद्यालय एवं मध्य विद्यालय में सिविल जज जूनियर डिवीजन राकेश कुमार दीपक के नेतृत्व में बच्चों को कानूनी जानकारी दी गई।

अभियान के तहत पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य संबंधित हितधारकों ने भी जिले के सैकड़ों विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना, असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर उचित मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।