शराबबंदी कानून के पालन पर सवाल: सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित शराब कारोबार पर कोई बड़ी कारवाई नहीं होने से आम लोंगों के बीच गुस्सा ?
शराबबंदी कानून के पालन पर सवाल: सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित शराब कारोबार पर कोई बड़ी कारवाई नहीं होने से आम लोंगों के बीच गुस्सा ?
शराबबंदी कानून के पालन पर सवाल: सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित शराब कारोबार पर कोई बड़ी कारवाई नहीं होने से आम लोंगों के बीच गुस्सा ?
शराब की बिक्री पर रोक लगाने और कारोबारियों की पहचान को लेकर उठे सवाल,थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी चर्चा; उत्पाद विभाग के वरीय अधिकारियों से स्थिति की समीक्षा की अपेक्षा ?
दस्तक 7मीडिया /गुड्डू राज
बिहार में शराबबंदी कानून लागू है। सरकार ने राज्य में शराब की बिक्री,निर्माण, भंडारण और सेवन पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस कानून को लागू कराने की जिम्मेदारी मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की है। इसके बावजूद दरभंगा के मध्य निषेध उत्पाद सदर थाना क्षेत्र में कथित रूप से शराब की बिक्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार करने वाले कुछ लोग सक्रिय हैं और उन पर कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है।इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या क्षेत्र में शराबबंदी कानून का पालन प्रभावी ढंग से कराया जा रहा है? यदि शराब की अवैध बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं,तो उनकी जांच और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? इन सवालों के बीच सदर उत्पाद थाना की कार्यशैली और थाना प्रभारी की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है।
क्षेत्र में कथित शराब कारोबार को लेकर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं शराबबंदी कानून लागू कराने की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था अपने उद्देश्य से पीछे तो नहीं रह रही है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि क्षेत्र में शराब की बिक्री हो रही है, तो उस पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। शराबबंदी कानून लागू होने के बाद भी अगर अवैध कारोबार की शिकायतें सामने आती हैं,तो संबंधित अधिकारियों के लिए यह गंभीरता से जांच करने का विषय है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि क्षेत्र में शराब की कथित बिक्री को लेकर अब तक कितनी शिकायतें मिली हैं और उन पर क्या कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से जानकारी सामने आने पर वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
इस मामले में सदर उत्पाद थाना प्रभारी की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि क्षेत्र में कथित शराब कारोबार को लेकर प्रभावी कार्रवाई की जानकारी सामने आनी चाहिए। सवाल यह भी है कि क्या थाना प्रभारी को क्षेत्र में शराब की बिक्री से जुड़ी शिकायतों की जानकारी है? यदि शिकायतें मिली हैं, तो उनकी जांच के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? क्या संदिग्ध ठिकानों की पहचान कर निगरानी की जा रही है? इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारी के पक्ष से ही स्पष्ट हो सकता है।
क्या शराब कारोबारियों की सूची तैयार है?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों और संदिग्ध ठिकानों की पहचान के लिए कोई सूची तैयार की गई है।
यदि विभाग के पास शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है,तो उसका उपयोग जांच और निगरानी के लिए किया जा सकता है। इससे कार्रवाई को व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
क्या शराब कारोबारियों पर कसेगा शिकंजा?
अब सवाल यह है कि क्या सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित शराब कारोबार के खिलाफ कोई विशेष अभियान चलाया जाएगा? क्या विभाग शिकायतों की जांच कर अवैध शराब की बिक्री करने वालों की पहचान करेगा? यदि जांच में शराबबंदी कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिर थाना की जिम्मेदारी क्या रह जाती है?
क्षेत्र में कथित शराब कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह प्रश्न भी सामने आ रहा है कि यदि शिकायतों की जांच और कार्रवाई प्रभावी नहीं होती है,तो शराबबंदी कानून लागू कराने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? थाना और उत्पाद विभाग की जिम्मेदारी है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में कानून का पालन सुनिश्चित करें। यदि अवैध शराब की बिक्री की शिकायत मिलती है,तो उसकी जांच करना और उचित कदम उठाना जरूरी है।
क्या अधिकारियों को दोबारा प्रशिक्षण की जरूरत है?
इस मामले में उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली और थाना प्रभारी की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है, तो विभाग को अपनी निगरानी और कार्रवाई की रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए। क्या सूचना जुटाने में कोई कमी है? क्या संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने के तरीके में सुधार की जरूरत है? क्या थाना प्रभारी को अतिरिक्त प्रशिक्षण देने से कार्रवाई बेहतर हो सकती है? इन बिंदुओं पर वरिष्ठ अधिकारी विचार कर सकते हैं।
वरीय अधिकारियों को लेना चाहिए संज्ञान
दरभंगा सदर उत्पाद थाना क्षेत्र में कथित शराब कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर उत्पाद विभाग के वरीय अधिकारियों को स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। संबंधित थाना से कार्रवाई का विवरण लेकर यह पता लगाया जा सकता है कि शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है, तो विभागीय नियमों के अनुसार जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
अब कार्रवाई और जवाब का इंतजार
दरभंगा के मध्य निषेध उत्पाद सदर थाना क्षेत्र में शराब की कथित बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सबकी नजर उत्पाद विभाग के अगले कदम पर है। क्या शिकायतों की जांच होगी? क्या संदिग्ध ठिकानों की निगरानी बढ़ाई जाएगी? क्या शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?
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