मोरो थाना क्षेत्र में शराब तस्करी का नेटवर्क सक्रिय, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल,

45 लीटर शराब के साथ एक गिरफ्तार, विधि-विरुद्ध बालक निरुद्ध; मद्य निषेध टीम ने अलग से 75 लीटर शराब पकड़ी, फिर स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर सवाल ?

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

मोरो थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के पुलिस के दावों के बीच दो अलग-अलग कार्रवाइयों ने स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोरो थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर वाहन जांच के दौरान 45 लीटर विदेशी शराब और दो मोटरसाइकिल जब्त की हैं। इस मामले में प्राथमिकी अभियुक्त मुन्ना कुमार, पिता उमेश राय, निवासी पंडौल, थाना मोरो, जिला दरभंगा को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, एक विधि-विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया गया है। दूसरी ओर, मद्य निषेध विभाग की टीम ने अरेला चौर के पास से अलग कार्रवाई में 75 लीटर शराब बरामद की। इन दोनों बरामदगियों के बाद सवाल उठ रहा है कि शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ स्थानीय पुलिस की नियमित निगरानी और रात्रि गश्ती कितनी प्रभावी है?

कई महीनों बाद शराब बरामदगी, दूसरी टीम ने भी पकड़ी खेप

सूत्रों  के अनुसार, मोरो थाना पुलिस की हालिया कार्रवाई से पहले शराब बरामदगी को लेकर उनकी  सक्रियता चर्चा में नहीं रही , हालांकि थानाध्यक्ष के  योगदान के बाद अब तक की कुल बरामदगी का क्या  आधिकारिक आंकड़ा  है यह शायद उनको भी पता नहीं हें ? इस संबंध में थानाध्यक्ष से उनके कार्यकाल में हुई शराब बरामदगी की जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनके व्हाट्स एप के जरिये मेसेज से अब तक जवाब नहीं मिला।

 मद्य निषेध विभाग की टीम द्वारा अरेला चौर से 75 लीटर शराब की बरामदगी ने थाना पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यदि अलग-अलग टीमें शराब की खेप पकड़ रही हैं, तो नियमित गश्ती और खुफिया सूचना तंत्र के जरिए स्थानीय पुलिस कितनी कार्रवाई कर रही है,यह सोचने मात्र से पता चल जाता हें कि आखिर खेल क्या हो रहा हें ?

बेनीबाद से बिशनपुर के रास्ते  शराब ढुलाई की चर्चा 

मोरो थाना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसका संपर्क समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जिले की ओर जाने वाले मार्गों से है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मुजफ्फरपुर के बेनीबाद की ओर से मोरो होते हुए बिशनपुर की तरफ शराब की खेप ले जाने का रास्ता इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, देर रात ट्रक और पिकअप वाहनों के जरिए शराब की ढुलाई होने तथा कुछ स्थानों पर खेप उतारे जाने की चर्चा वर्षों से अबतक है।सूत्र बताते हें कि  इस मार्ग से नियमित रूप से शराब की खेप गुजर रही है जो काफी चिंताजनक हें।सूत्र बताते हें कि बिशनपुर ,कल्याणपुर , बहादुरपुर ,पतोर ,बहेड़ी आदि इलाकों में इसी रास्ते से प्रत्येक दिन या एक दिन बीच कर शराब की खेप पहुंचाई जाती हें।

कुख्यात तस्कर की हत्या के बाद भी नेटवर्क पर सवाल

इलाके में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े रहे कुख्यात तस्कर प्रभात चौधरी की हत्या के बाद भी कथित तस्करी नेटवर्क को लेकर चर्चाएं जारी हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि उसके कुछ सहयोगी अब भी इस धंधे में सक्रिय हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि शराब की खेप कहां से आती है, किन वाहनों से पहुंचती है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।इस मामले में सूत्र बताते हें कि तात्कालीन थानाध्यक्ष से लेकर अब तक के थानाध्यक्ष की भूमिका काफी संदेहास्पद हें।इस बात का खुलासा डेढ़ बजे रात्रि से चार बजे सुबह की गश्ती से हो सकता हें ,सूत्र बताते हें स्थानीय पुलिस की जानकारी में सारा कारोबार फल फूल रहा हें ?सूत्र यह भी बताते हें कि दो वर्षों से अधिक का समय तकरीबन बीत रहा हें ,इनकी उपलब्धि क्या रही ?सूत्र यह भी बताते हें कि इससे पहले समस्तीपुर जिला के चकमेह्सि थाना में पदस्थापित थीं तो जगजाहिर था कि इनके रिश्ते किन किन से से था ?

गश्ती की जिम्मेदारी किसकी, जवाबदेही तय हो

थानाध्यक्ष की रात्रि और दिवा गश्ती को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि नियमित गश्ती में थानाध्यक्ष की प्रत्यक्ष मौजूदगी कम रहती है और सीमित पुलिसकर्मियों के सहारे औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।

बालू खनन से लेकर शराब कारोबार तक, निगरानी पर उठते सवाल

मोरो थाना क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व में नदी से बालू खनन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। स्थानीय स्तर पर यह आरोप रहा है कि लंबे समय तक दिनदहाड़े खनन होता रहा और प्रभावी रोकथाम नहीं दिखी। अभी नदी में पानी आ गया हें।सवाल यही कि सरकार शराब तस्करी और बालू खनन के मामले में गंभीर हें फिर ऐसी कार्यशैली अगर हें तो आप समझ सकते हें ,बताने की जरूरत नहीं हें।

इलाके में गुड़ को लेकर भी स्थानीय चर्चाएं हैं, लेकिन रोकथाम नदारत ?भारी मात्रा में गुरकी बन रही हें।दरभंगा जिला के गुदड़ी बाजार से भारी मात्रा में इन इलाकों में गुड़ की खरीददारी हो रही हें ?

अब इन सवालों का जवाब जरूरी

मोरो में 45 लीटर शराब की बरामदगी और मद्य निषेध विभाग की ओर से 75 लीटर शराब पकड़े जाने के बाद पुलिस प्रशासन को कुछ बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये ,थानाध्यक्ष के योगदान के बाद कुल कितनी शराब जब्त हुई? कितने तस्करों की गिरफ्तारी हुई? शराब ढुलाई के संदिग्ध मार्गों पर कितनी वाहन जांच हुई? रात्रि गश्ती की निगरानी कौन करता है? क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना क्षेत्र की गतिविधियों की समीक्षा की है?

अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल छिटपुट बरामदगी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। असली चुनौती उस नेटवर्क तक पहुंचने की है, जो शराब की आपूर्ति, ढुलाई और वितरण करता है। अब देखना है कि मोरो थाना पुलिस इन सवालों का जवाब आंकड़ों और कार्रवाई से देती है या शराब तस्करी पर अंकुश लगाने का दावा केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहता है।