डीएमसीएच के ऐतिहासिक एनाटॉमी भवन को बचाने की उठी मांग, एलुमनी एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन,

बीएमआईएससीएल के अधिकारियों के साथ मास्टर प्लान पर चर्चा, भवन को हेरिटेज-सह-स्मारक के रूप में संरक्षित करने का प्रस्ताव

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा मेडिकल कॉलेज के ऐतिहासिक एनाटॉमी, फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री भवन को ध्वस्त होने से बचाने के लिए पूर्ववर्ती छात्रों ने पहल तेज कर दी है। मंगलवार को दरभंगा मेडिकल कॉलेज पूर्ववर्ती छात्र (एलुमनी) एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पुराने परिसर स्थित बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआईएससीएल) के कार्यालय पहुंचकर भवन के संरक्षण की मांग की। इस दौरान अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इसे चिकित्सा शिक्षा की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखने का आग्रह किया गया।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार वर्मा और सचिव डॉ. सुशील कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बीएमआईएससीएल के डिप्टी जनरल मैनेजर योगेंद्र प्रसाद से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. ओमप्रकाश, प्रो. हरि दामोदर सिंह, डॉ. गौरी शंकर झा, डॉ. भरत कुमार समेत अन्य सदस्य शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि एनाटॉमी, फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री का ऐतिहासिक भवन महज एक पुरानी इमारत नहीं है, बल्कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज के गौरवशाली इतिहास और चिकित्सा शिक्षा की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। इस भवन से हजारों चिकित्सकों की शैक्षणिक स्मृतियां जुड़ी हैं। ऐसे में इसे ध्वस्त करने के बजाय ‘हेरिटेज-सह-स्मारक भवन’ के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।

मास्टर प्लान में विकल्प तलाशने का सुझाव

बैठक में बीएमआईएससीएल की टीम ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से दरभंगा मेडिकल कॉलेज के पुनर्विकास की प्रस्तावित मास्टर प्लान की जानकारी दी। इसमें नए भवनों के निर्माण, सड़क संपर्क और अन्य आधारभूत संरचनाओं से संबंधित योजनाओं पर चर्चा हुई।

इस दौरान एलुमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान मास्टर प्लान के तहत नए भवनों के निर्माण के लिए ऐतिहासिक भवन को ध्वस्त करना जरूरी नहीं रह गया है। आवागमन और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए सबवे यानी भूमिगत मार्ग समेत अन्य वैकल्पिक इंजीनियरिंग उपाय अपनाए जा सकते हैं। इससे कॉलेज के आधुनिकीकरण के साथ उसकी ऐतिहासिक विरासत को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव को भी आवेदन भेजने की सलाह

प्रतिनिधिमंडल के प्रस्ताव पर बीएमआईएससीएल के अधिकारियों ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव को भी विस्तृत आवेदन भेजने का सुझाव दिया, ताकि उनके स्तर से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए जा सकें।

बैठक के बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया। एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि अधिकारियों ने भवन के ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व को गंभीरता से सुना है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इसके संरक्षण को लेकर सकारात्मक निर्णय लेंगी और भविष्य में इसे चिकित्सा शिक्षा की विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

एलुमनी एसोसिएशन ने कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज की ऐतिहासिक पहचान और संस्थागत विरासत को सुरक्षित रखना केवल पूर्ववर्ती छात्रों की भावनाओं से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि बिहार में चिकित्सा शिक्षा के इतिहास को संरक्षित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।