डीआईजी की समीक्षा के बाद न्याय पर टिकी निगाहें ??आठ महीने बाद अचानक गिरफ्तारी ,प्राथमिकी के अनुसंधान और पर्यवेक्षण पर उठे सवाल ? पीड़ित पक्ष का आरोप-खनन माफिया और पुल के एप्रोच रोड के विवाद में रची गई साजिश; सीसीटीवी फुटेज, केस डायरी और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच
डीआईजी की समीक्षा के बाद न्याय पर टिकी निगाहें ??आठ महीने बाद अचानक गिरफ्तारी ,प्राथमिकी के अनुसंधान और पर्यवेक्षण पर उठे सवाल ? पीड़ित पक्ष का आरोप-खनन माफिया और पुल के एप्रोच रोड के विवाद में रची गई साजिश; सीसीटीवी फुटेज, केस डायरी और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच
डीआईजी की समीक्षा के बाद न्याय पर टिकी निगाहें ??आठ महीने बाद अचानक गिरफ्तारी ,प्राथमिकी के अनुसंधान और पर्यवेक्षण पर उठे सवाल ?
पीड़ित पक्ष का आरोप-खनन माफिया और पुल के एप्रोच रोड के विवाद में रची गई साजिश; सीसीटीवी फुटेज, केस डायरी और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
डीआईजी की समीक्षा के दौरान एक पीड़ित पक्ष ने पुलिस की जांच प्रक्रिया, केस डायरी में दर्ज तथ्यों और आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई में कथित दोहरे रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।पीड़ित का आरोप है कि पुल के एप्रोच रोड को सीधा करने, अतिक्रमण हटाने और कथित अवैध खनन का विरोध करने के कारण उसे और उसके भाई को निशाना बनाया गया।पीड़ित का आरोप हें कि अवैध खनन दिन दहाड़े कई महीनों तक चलता रहा और कई करोड़ की मिट्टी नदी किनारे काटी गई ?आरोप यह भी हें कि थाना अध्यक्ष और मुंशी के मिलीभगत से यह सब हुई और एक मोटी रकम सबने अवैध रूप से कमाया जिसका हम विरोध कर रहें थे।यही नहीं पुल निर्माण कंपनी के मुंशी और थानाध्यक्ष की मिलीभगत से रंगदारी का झूठा मुकदमा दर्ज कराने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने पूरे मामले की जड़ से छानबीन कर दोषी पुलिस पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
पीड़ित के मुताबिक, पुल के रास्ते में पड़ने वाली झोपड़ियों और दुकानों के अतिक्रमण को हटाने के लिए उसने लोक शिकायत निवारण से लेकर जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त और अन्य वरीय पदाधिकारी तक का दरवाजा खटखटाया। उसका दावा है कि लोक शिकायत के आदेश के बाद अतिक्रमण हटाया गया और पुल के एप्रोच रोड को नई दीवार बनाकर सीधा किया गया। इसी विवाद के बाद उसके विरुद्ध रंगदारी का मुकदमा दर्ज करायी गई है। पीड़ित का यह भी दावा है कि संबंधित मामले में एसीजेएम के समक्ष पेशी के दौरान थाना प्रभारी और अनुसंधानकर्ता को फटकार लगी तथा उसे जेल भेजने के बजाय जमानत मिल गई,यह खुद में हास्यास्पद हें ?
तीन कांडों के घटनाक्रम पर सवाल
पीड़ित ने कांड संख्या 19/2026, 29/2026 और 27/2026 के अनुसंधान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि 23 मार्च 2026 को सदर डीएसपी के संयुक्त पर्यवेक्षण में कांड संख्या 19/2026 और 29/2026 का उल्लेख हुआ, जबकि कांड संख्या 27/2026 जैसी घटना नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद केस डायरी के कॉलम में करीब आठ महीने बाद कांड संख्या 27/2026 को सत्य मानकर उसके भाई को हिरासत में लिए जाने पर उसने आपत्ति जताई है।
पीड़ित के अनुसार, कांड संख्या 29/2026 की केस डायरी के कॉलम संख्या 29 में अनुसंधानकर्ता संजीव कुमार ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का उल्लेख किया है। आरोप है कि फुटेज में उसके भाई के शाम 7:39 से 7:44:30 बजे तक घायल अवस्था में लोगों के सहारे दुकान की ओर ले जाए जाने का दृश्य दर्ज है, लेकिन कथित आरोपितों के घटना के बाद घर या अस्पताल जाने के समय से जुड़े फुटेज का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। पीड़ित ने इसकी जांच की मांग की है।
आठ बजे की घटना पर उठाया सवाल
पीड़ित ने दावा किया कि वह और उसका भाई शाम 7:44:30 बजे घायल अवस्था में दुकान की ओर जाते दिखे तथा रात आठ से साढ़े आठ बजे के बीच दोनों थाने में मौजूद थे। ऐसे में कांड संख्या 27/2026 में रात करीब आठ बजे अंधेरी गाछी में उसके भाई द्वारा आशिक के साथ मारपीट किए जाने का आरोप कैसे सही माना गया, यह जांच का प्रमुख सवाल है।क्या एक ही समय में दो घटना हो सकती हें ,अगर नहीं तो वह कांड आठ माह बाद कैसे सत्य करार दिया गया ?
उसने कांड संख्या 29/2026 की केस डायरी का हवाला देते हुए कहा कि अनुसंधानकर्ता के मुताबिक, दानिश इमाम करीब आठ बजे घटनास्थल पर पहुंचे थे, तब तक मारपीट समाप्त हो चुकी थी और दोनों पक्षों के लोग घर या अस्पताल जा चुके थे। पीड़ित का सवाल है कि यदि केस डायरी में घटनास्थल की स्थिति यही दर्ज है, तो कांड संख्या 27/2026 में उसी समय की घटना को सत्य मानने का आधार क्या है?
डीआईजी से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित ने आरोप लगाया कि वह करीब सात महीने तक एसएसपी, डीआईजी और डीजीपी से कथित आरोपितों की गिरफ्तारी एवं कार्रवाई के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन उसे अपेक्षित न्याय नहीं मिला। उसका कहना है कि शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए। उसने सदर डीएसपी 2 की पर्यवेक्षण भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा के बाद कारवाई की मांग की है,इस वक्त सदर डीएसपी 1प्रशिक्षण में बाहर गये थे।
पीड़ित की निगाहें अब डीआईजी की समीक्षा के बाद न्याय पर टिकी हैं। उसका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, केस डायरी के संबंधित कॉलम, थाने में मौजूदगी के प्रमाण और सभी पक्षों के बयान का बारीकी से मिलान किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उसने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच के बाद भी न्याय नहीं मिला, तो वह उच्च न्यायालय की शरण लेगा।पीड़ित का स्पष्ट कहना हें कि एक वक्त में दो अलग अलग जगहों पर एक व्यक्ति का दोनों घटनाओं में रहना क्या संभव हें ?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या डीआईजी की समीक्षा में केस डायरी और सीसीटीवी फुटेज के बीच उठाए गए इन सवालों का जवाब मिलेगा और क्या जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात सामने आने पर जिम्मेदारी तय होगी?डीआईजी ने इन मामलों में शुक्रवार को समीक्षा की हें।
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