जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर से लागू हुआ नया संशोधन अधिनियम, विलंब पंजीयन के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधित) अधिनियम, 2026’ के प्रभावी होने को लेकर राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय (ORGI), नई दिल्ली के निर्देशानुसार यह नया संशोधन देश भर में 01 अक्टूबर 2026 से लागू हो चुका है। यदि जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना एक वर्ष के बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण अब केवल डीएम,एसडीएम या डीए द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश और सत्यापन के बाद ही संभव होगा। यदि जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना दो वर्ष बीत जाने के बाद दी जाती है, तो ऐसे मामलों का पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के औपचारिक आदेश और सत्यता की जांच के बाद ही किया जाएगा। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधित) अधिनियम, 2026’ (2026 का अधिनियम संख्या 12) को भारत के राजपत्र में 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया गया था। इसके बाद गृह मंत्रालय (भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय) द्वारा 16 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अक्टूबर 2026 से इसके प्रावधानों को प्रभावी कर दिया गया। बिहार में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर निदेशक-सह-मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म और मृत्यु) डॉ. नुरुल हक सिवानी ने सभी प्रमंडलीय उप निदेशकों और जिला सांख्यिकी पदाधिकारियों को इस अधिनियम की प्रति भेजते हुए सूचनार्थ एवं सख्त अनुपालन के लिए निर्देशित किया है। प्रशासनिक अधिकारी का मानना है कि इस नए संशोधन से अब जन्म और मृत्यु के बहुत पुराने मामलों के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कानूनी निगरानी के दायरे में आ गई है। अब सवाल उठता है कि नये अधिनियम लागू करने से पहले इसका प्रारूप प्रकाशित होना चाहिए। लेकिन दस दिन बीत जाने के बावजूद संशोधित अधिनियम को लेकर पदाधिकारियों में संषय की स्थिति क्यों बनी हुई है।