चंद रुपयों की हवस में जिंदगी से खिलवाड़, बिरौल में अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान अग्निकांड, कई झुलसे, दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
चंद रुपयों की हवस में जिंदगी से खिलवाड़, बिरौल में अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान अग्निकांड, कई झुलसे, दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
चंद रुपयों की हवस में जिंदगी से खिलवाड़, बिरौल में अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान अग्निकांड, कई झुलसे,
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
दरभंगा जिले के बिरौल में गुरुवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया, जिसने इलाके में अवैध रूप से फल-फूल रहे गैस रिफिलिंग के काले कारोबार ने सिस्टम को चुनौती दे डाली। तभी तो ऐसे अवैध कारोबार करने वाले को प्रशासन का तनीक भी भय नहीं। बिरौल-कुशेश्वरस्थान मुख्य मार्ग पर स्थित एक किराए के मकान में घरेलू गैस सिलेंडर से कॉमर्शियल सिलिंडर में अवैध रूप से गैस भरी जा रही थी। इसी दौरान जलती हुई सिगरेट की चिंगारी से अचानक भीषण आग लग गई और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। ‘दस्तक 7 मीडिया’ की विशेष पड़ताल और विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। जिस किराए के मकान में यह हादसा हुआ, वहाँ वर्षों से ‘इंण्डेन गैस’ के सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी का गोरखधंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा था। चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में सरकारी नियमों और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ तरीके से लोगों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार गैस रिफिलिंग के दौरान हुए इस अग्निकांड में अनिल प्रधान और जितु चौधरी समेत सिगरेट पीने वाला तीसरा व्यक्ति के अलावा उस मकान में रहने वाले एक-दो अन्य किराएदार भी आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए हैं। सूत्रों ने बताया कि घटना में झुलसे हुए लोगों में अनील प्रधान का निजी अस्पताल में जबकि जितु चौधरी को पहले डीएमसीएच में भर्ती कराया गया लेकिन स्थिति गंभीर देख डाक्टरों ने उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया। शेष लोगों का इलाज निजी स्तर पर गुपचुप तरीके से कराए जाने की बात सामने आ रही है।
वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार और इतने बड़े हादसे के संबंध में पूछे जाने पर थानाध्यक्ष चन्द्र मणि ने बताया कि इसकी सूचना नहीं है। मामले को लेकर जब बिरौल के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी राजीव कुमार से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि कानूनन किसी को भी अवैध रूप से गैस रिफिलिंग करने की इजाजत नहीं है। फिलहाल यह पूरा मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि घनी आबादी और मुख्य मार्ग के किनारे इतने सालों से मौत का यह सामान किसके संरक्षण में तैयार हो रहा था ?
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