बिरौल,बंदा -बिजुलिया सड़क निर्माण में भारी अनदेखी, जलनिकासी न होने से हल्की बारिश में ही दो फीट जलजमाव ग्रामीणों और माले का फूटा गुस्सा
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल दरभंगा।
दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत मनोर भोराम पंचायत में बांदा से बिजुलिया गांव तक बन रही सड़क विकास के वादों पर खरी उतरने से पहले ही विवादों में घिर गई है। निर्माण कार्य शुरू होते ही सड़क की गुणवत्ता, अनियमित चौड़ाई और जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था न होने से स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। स्थिति यह है कि मात्र हल्की बारिश में ही बिजुलिया गांव में सड़क पर लगभग दो फीट तक पानी भर गया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह ठप्प होने के कगार पर पहुंच गया है। गांव में हल्की बारिश के बाद सड़क पर जमा जलजमाव ने निर्माण कार्य की पोल खोल कर रख दी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआती बारिश में ही सड़क पर दो फीट पानी जमा हो रहा है, तो मुख्य बरसाती मौसम में गांव की क्या स्थिति होगी? सड़क निर्माण का उद्देश्य ग्रामीणों को राहत देना था, लेकिन ड्रेनेज प्लान के अभाव में यह सड़क अब पूरे गांव के लिए जलजमाव का स्थायी संकट बनती जा रही है। सड़क निर्माण की भौतिक स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्धारित मानकों को दरकिनार कर सड़क की चौड़ाई कहीं 12 फीट, कहीं 10 फीट तो कहीं महज 8 फीट ही दिखाई दे रही है। ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं की एक ही मुख्य मांग है कि सड़क के दोनों किनारों पर पक्के नाले का निर्माण किया जाए और इस जलनिकासी व्यवस्था को सीधे कमला नदी से जोड़ा जाए। जब तक बारिश का पानी गांव से निकलकर कमला नदी तक नहीं पहुंचेगा, तब तक जलजमाव की समस्या से स्थायी मुक्ति असंभव है।भाकपा माले के बिरौल प्रखंड सचिव बैद्यनाथ यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से निर्माण स्थल की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
प्रखंड सचिव बैद्यनाथ यादव, शम्भू यादव,नवल यादव,नरेश यादव,बच्चा बाबू यादव एवं अरुण यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि “सड़क केवल कागजों और औपचारिकता में नहीं बननी चाहिए। अगर सरकार और प्रशासन गांव की तस्वीर बदलना चाहता है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता, ऊंचाई, निर्धारित चौड़ाई और ड्रेनेज प्लान की जांच स्थल पर जाकर करे। विकास का असली मतलब तब है जब उस सड़क पर लोग बिना परेशानी के चल सकें, न कि बारिश का पानी पूरे गांव के लिए अभिशाप बन जाए। यदि अविलंब नाला निर्माण और मानक के अनुरूप कार्य सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे।”ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि विभाग ने मामले पर संज्ञान लेकर जल्द तकनीकी जांच और नाला निर्माण की व्यवस्था नहीं की, तो वे निर्माण कार्य रोककर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
