कांड 29/26 की जांच पर डीआईजी की सीधी नजर, 9 को होगी पड़तालआईओ-थानाध्यक्ष और शिकायतकर्ता को किया गया तलब, केस डायरी से लेकर सीसीटीवी फुटेज तक खंगालेंगे डीआईजी

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

मोरो थाना क्षेत्र के कांड संख्या 29/26 की जांच अब सीधे पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के रडार पर आ गई है। अनुसंधान की निष्पक्षता को लेकर शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद डीआईजी मनोज कुमार तिवारी ने मामले की स्वयं समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 9 अक्टूबर को दिन के 11 बजे डीआईजी कार्यालय में कांड के अनुसंधानकर्ता (आईओ), थानाध्यक्ष और शिकायतकर्ता निशांत अंजुम को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

रतनपुरा निवासी शिकायतकर्ता निशांत अंजुम ने डीआईजी को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कांड के अनुसंधान में आरोपितों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने जांच को कमजोर करने, एक आरोपित का नाम केस से हटाने के प्रयास और गिरफ्तारी के निर्देश के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मारपीट में सिर में फ्रैक्चर, कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता के मुताबिक 25 फरवरी 2026 को हुई मारपीट की घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और सिर के दोनों तरफ की हड्डियों में फ्रैक्चर हुआ। उनका आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज करने में थाना स्तर पर विलंब हुआ। बाद में सुपरविजन के बावजूद आरोपितों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि वरीय अधिकारियों की ओर से आरोपितों की गिरफ्तारी का निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं रही। इसी को आधार बनाकर उन्होंने अनुसंधान की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज पर भी सवाल

शिकायत में केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयानों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखने से इनकार किया है। इसके विपरीत, उनका दावा है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।

मामले में सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है। आवेदन के अनुसार फुटेज में प्राथमिकी अभियुक्त दानिश इमाम घटना के दिन शाम करीब 7:45 बजे हाटगाछी मस्जिद की ओर से आते दिखाई देता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि केस डायरी में फुटेज के इस पहलू को स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने इसे अनुसंधान की निष्पक्षता से जोड़ते हुए जांच अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब केस डायरी की होगी पड़ताल

डीआईजी की निर्धारित समीक्षा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें केवल शिकायत के आरोपों पर ही नहीं, बल्कि केस डायरी, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और आरोपितों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर भी गौर किया जा सकता है। गिरफ्तारी को लेकर दिए गए निर्देशों का अनुपालन हुआ या नहीं, इसकी भी समीक्षा होने की संभावना है।

शिकायतकर्ता ने डीआईजी से वर्तमान आईओ को बदलकर निष्पक्ष अधिकारी से अनुसंधान कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। अब 9 अक्टूबर की समीक्षा में पुलिस जांच की खामियों को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति कितनी सामने आती है, इस पर सबकी नजर है।