मिड-डे मील पर ‘धुएं’ का साया, बिरौल,घनश्यामपुर के स्कूल में महीनों से चूल्हे पर पक रहा बच्चों का निवाला,बेपरवाह तंत्र
मिड-डे मील पर ‘धुएं’ का साया, बिरौल,घनश्यामपुर के स्कूल में महीनों से चूल्हे पर पक रहा बच्चों का निवाला,बेपरवाह तंत्र
मिड-डे मील पर ‘धुएं’ का साया, बिरौल,घनश्यामपुर के स्कूल में महीनों से चूल्हे पर पक रहा बच्चों का निवाला,बेपरवाह तंत्र
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, घनश्यामपुर, दरभंगा
सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में ‘पीएम पोषण योजना’ (मिड-डे मील) के तहत स्वच्छता और आधुनिक व्यवस्था का दावा करती रहे, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। बिरौल,घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र के लगभग सभी विद्यालयों में रसोई गैस सिलेंडर के जगह जलावन से भोजन बनाने का मामला सामने आया है। जो विभागीय दावों की पोल खोलता है। यहाँ पिछले कई महीने से गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण मासूम बच्चों का खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है। कई विद्यालय की स्थिति यह है कि कोई सुरक्षित रसोईघर नहीं, बल्कि विद्यालय के खुले बरामदे में ही जलावन जलाकर खाना पकाया जा रहा है। धुएं के बीच आँखें मलते हुए रसोइया बच्चों के लिए भोजन तैयार करने को मजबूर है। पूछताछ के दौरान रसोइया ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हुई है। मजबूरी में लकड़ी और उपलों का सहारा लेना पड़ रहा है। खुले बरामदे में जलती आग और धुएं के बीच खेलते-घूमते बच्चों के कारण हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बिरौल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार निदेशक मध्याह्न भोजन योजना बिहार सरकार के निर्देश का अनुपालन नहीं किया गया। घरेलू गैस सिलेंडर न मिलने की स्थिति जलावन से भोजन बनाना मजबूरी है। घनश्यामपुर प्रखंड के एक प्रधानाध्यापक महमूद आलम से बात की गई, तो उन्होंने अपनी लाचारी व्यक्त की। उन्होंने स्वीकार किया कि गैस सिलेंडर खत्म हो जाने और नया सिलेंडर न मिल पाने के कारण ही जलावन पर भोजन पकाया जा रहा है, ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े।
इस पूरे घटनाक्रम पर जब घनश्यामपुर प्रखंड शिक्षा अधिकारी प्रिंस कुमार झा से सवाल किया गया, तो उनका बयान प्रशासनिक लाचारी को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि गैस एजेंसी की ओर से किल्लत के कारण विद्यालय को सिलेंडर की सप्लाई नहीं मिल पा रही थी। बीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसी आपात स्थिति में विभाग की ओर से ही यह निर्देश और अनुमति है कि गैस सिलेंडर न होने पर जलावन का उपयोग कर मिड-डे मील तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण कर स्थिति पर नजर रखी जाती है। विभाग भले ही इसे ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ बताकर पल्ला झाड़ रहा हो, लेकिन महीनों से जारी यह लापरवाही साफ दर्शाती है कि बच्चों के पोषण और सुरक्षा को लेकर स्थानीय विभाग कितना गंभीर है।
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