कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से लेकर साइबर ठगी तक, अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण POSH Act, SHe-Box, साक्षी संरक्षण और पीड़ित मुआवजा योजना की दी गई जानकारी
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से लेकर साइबर ठगी तक, अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण POSH Act, SHe-Box, साक्षी संरक्षण और पीड़ित मुआवजा योजना की दी गई जानकारी
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से लेकर साइबर ठगी तक, अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
POSH Act, SHe-Box, साक्षी संरक्षण और पीड़ित मुआवजा योजना की दी गई जानकारी
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम और बढ़ते साइबर अपराध से बचाव को लेकर बुधवार को समाहरणालय स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में POSH Act, SHe-Box पोर्टल, साइबर सुरक्षा, Witness Protection Scheme, Victim Compensation Scheme और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन डीएम कौशल कुमार, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी, डीपीओ आइसीडीएस चांदनी सिंह, उपश्रम आयुक्त राकेश रंजन, सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई अनिमेष कुमार चंद्रा और श्रम अधीक्षक दिनेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
डीएम ने कहा कि POSH Act का पालन महज कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थल पर आंतरिक समिति (Internal Committee) का गठन आवश्यक है। कर्मचारियों को कानून की जानकारी देने और शिकायतों के प्रभावी निवारण की व्यवस्था करना भी संस्थानों की जिम्मेदारी है।
राज्य परियोजना प्रबंधक सह नोडल पदाधिकारी POSH Act-2013 अंकिता कश्यप ने लैंगिक उत्पीड़न की विभिन्न स्थितियों और शिकायत निवारण प्रक्रिया की जानकारी दी। SHe-Box पोर्टल के माध्यम से कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति ऑनलाइन देखने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास पर जोर
DLSA की सचिव आरती कुमारी ने Victim Compensation Scheme के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि अपराध के पीड़ित को न्यायिक प्रक्रिया के साथ चिकित्सा, पुनर्वास और आर्थिक सहायता की भी आवश्यकता हो सकती है। निर्धारित परिस्थितियों में DLSA अथवा SLSA के माध्यम से क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं Witness Protection Scheme के तहत साक्षियों की सुरक्षा के महत्व पर भी चर्चा की गई।
OTP से लेकर फर्जी KYC कॉल तक से सावधान रहने की सलाह
सेंटर डायरेक्ट की प्रशिक्षक अंतरा झा ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को लेकर प्रतिभागियों को जागरूक किया। उन्होंने Phishing, Fake Links, OTP Fraud, Fake KYC Calls, Impersonation, Malware, Online Scam और Social Engineering जैसे अपराधों से बचाव के उपाय बताए।
उन्होंने कहा कि OTP, UPI PIN, ATM PIN और पासवर्ड किसी से साझा नहीं करें तथा अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर फोन करने वालों को संवेदनशील जानकारी नहीं देने और किसी के कहने पर Remote Access App इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी गई। साइबर सुरक्षा का संदेश देते हुए उन्होंने कहा “सोचें, जांचें, फिर क्लिक करें।”
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों, पंचायती राज पदाधिकारियों, निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और अल्पाहार के साथ हुआ।