बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में एक के बाद एक घटनाओं ने खड़े किए गंभीर सवाल, आखिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर व्यवस्था की जवाबदेही किसकी?
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में एक के बाद एक घटनाओं ने खड़े किए गंभीर सवाल, आखिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर व्यवस्था की जवाबदेही किसकी?
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में एक के बाद एक घटनाओं ने खड़े किए गंभीर सवाल, आखिर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर व्यवस्था की जवाबदेही किसकी?
जनवरी से सितंबर तक शिकायतों और वायरल वीडियो की लंबी फेहरिस्त, 27 सितंबर की नाबालिग से छेड़खानी की घटना के बाद हरकत में आया प्रशासन; अब स्थायी व्यवस्था और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
दस्तक 7 मीडिया, प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान, दरभंगा।
बिहार के कुशेश्वरस्थान स्थित प्रसिद्ध बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर जिसे दूसरा बाबा धाम भी कहा जाता है में पिछले कुछ महीनों के दौरान सामने आई घटनाओं ने मंदिर की सुरक्षा, पंडाओं की गतिविधियों और न्यास समिति की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक डायरी में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार जनवरी से सितंबर तक मंदिर परिसर से जुड़ी कई शिकायतें और कथित घटनाओं के वीडियो सामने आते रहे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सवाल उठता रहा कि इन घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सबसे गंभीर मामला 27 सितंबर का रहा, जब मंदिर में पूजा करने आई एक नाबालिग बच्ची के साथ छेड़खानी का आरोप मंदिर के ही एक पंडा पर लगा। पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी पंडा को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई थी।
5 जनवरी 2026 गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं से पैसे लेने का वीडियो वायरल।
डायरी में दर्ज पहली घटना 5 जनवरी की है। इसमें मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं से चढ़ावे के नाम पर कथित रूप से पैसे लेकर गर्भगृह में प्रवेश कराने का वीडियो वायरल होने का उल्लेख है।
यदि यह व्यवस्था वास्तव में चल रही थी, तो सवाल उठता है कि मंदिर में पूजा-दर्शन की निर्धारित व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा था?
9 जनवरी – मंदिर से घंटी चोरी का कथित वीडियो वायरल।
इसके महज चार दिन बाद 9 जनवरी को मंदिर से घंटी चोरी करते हुए एक पंडा का वीडियो वायरल हुआ। धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति की सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी को लेकर यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है।
14 जुलाई – बाहर से आए श्रद्धालुओं के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल।
14 जुलाई को बाहर से आए श्रद्धालुओं के साथ पंडा द्वारा बदसलूकी किए जाने का वीडियो वायरल होने की बात दर्ज है। मंदिर केवल स्थानीय लोगों का धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार मंदिर की छवि और पर्यटन-धार्मिक व्यवस्था दोनों को प्रभावित करता है।
21 सितंबर — दो पंडाओं द्वारा घंटी चोरी का कथित वीडियो वायरल।
21 सितंबर को दो पंडाओं द्वारा मंदिर से घंटी चोरी करते हुए वीडियो वायरल होने की बात सामने आई। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भी घंटी चोरी का मामला सामने आने का उल्लेख किया जा चुका है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं तो उनकी जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है।
27 सितंबर — नाबालिग बच्ची से छेड़खानी का गंभीर मामला।
घटनाओं की यह श्रृंखला 27 सितंबर को सबसे गंभीर मोड़ पर पहुंची। मंदिर में पूजा करने आई सात वर्षीय बच्ची से छेड़खानी का आरोप मंदिर के पंडा शिव कुमार झा पर लगा। बच्ची की मां के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस के मुताबिक घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई।
इसके बाद हुई बैठक में लिए गए अहम फैसले।
नाबालिग से जुड़ी घटना के बाद मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह एसडीएम शशांक राज और उपाध्यक्ष सह एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी की संयुक्त अध्यक्षता में पंडाओं के साथ बैठक हुई। इसमें पंडाओं का पहचान-पत्र जारी करने, चरित्र सत्यापन पर विचार करने तथा मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे निर्णय सामने आए,लेकिन कहा जा सकता हें कि मामले को रफा दफा करने के लिये महज खानापूर्ति हुई हें।
अब सबसे बड़ा सवाल-क्या केवल बैठक से बदलेगी व्यवस्था?
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा केवल स्थानीय लोगों की आस्था से नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी है। इसलिए सवाल किसी एक पंडा या किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जरूरत इस बात की है कि जनवरी से सितंबर तक सामने आई प्रत्येक घटना की निष्पक्ष जांच हो। वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जाए। जिन मामलों में प्रथमदृष्टया अपराध प्रमाणित हो, उनमें कानूनी कार्रवाई हो। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और फुटेज सुरक्षित रखने की स्पष्ट व्यवस्था बने।
साथ ही प्रत्येक अधिकृत पंडा का अनिवार्य पहचान-पत्र हो।
पहचान-पत्र जारी करने से पहले चरित्र सत्यापन कराया जाए।
श्रद्धालुओं से पूजा या प्रवेश के नाम पर अनधिकृत राशि लेने पर कार्रवाई हो।
महिला और बाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाया जाए।
मंदिर परिसर के संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त निगरानी हो।
चोरी या दुर्व्यवहार की शिकायत मिलने पर कार्रवाई के लिए समय-सीमा तय हो।
मंदिर की संपत्ति और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और रिकॉर्डेड हो।
दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को केवल इसलिए संरक्षण न मिले कि वह मंदिर से जुड़ा पंडा है।
न्यास समिति से भी जवाबदेही की अपेक्षा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंदिर की व्यवस्था किसी व्यक्ति विशेष की निजी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि न्यास और प्रशासन की संस्थागत जिम्मेदारी है। इसलिए घटनाओं की सूची सामने आने के बाद यह बताना जरूरी है कि किस घटना पर क्या कार्रवाई हुई, किस मामले में जांच हुई और कौन-सा मामला अभी लंबित है।
हाल में मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर पंडाओं के लिए पहचान-पत्र और चरित्र सत्यापन जैसे कदम उठाए गए हैं। यह स्वागत योग्य है, लेकिन अब इन फैसलों को कागज से जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती है।
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर आस्था का केंद्र है, किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अपराध या श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार का केंद्र नहीं।इसलिए मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई की नहीं, बल्कि दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और पूरे मंदिर की व्यवस्था को जवाबदेह, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की है।
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