एक होमगार्ड के लिए थानेदार ने लगाई पूरी ताकत, जांच में खुली ‘सोनकी कनेक्शन’ की परतें! एक दशक में सात बार एक ही थाने में प्रतिनियुक्ति, हटने के बाद फिर बुलाने की कोशिश; जांच में थानाध्यक्ष समेत चार के कृत्य संदिग्ध ????

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

 सोनकी थाना में वर्षों से जमे होमगार्ड जवान सुशील कुमार को लेकर दस्तक 7 मीडिया की खबर के बाद शुरू हुई विभागीय जांच ने पुलिस महकमे के भीतर चल रहे उस खेल की कई परतें खोल दी हैं, जिस पर अब तक सवाल उठते रहे थे। जांच रिपोर्ट में न सिर्फ होमगार्ड की लंबे समय तक एक ही थाने में तैनाती की पुष्टि हुई है, बल्कि उसके थाना से हटने के बाद उसे दोबारा सोनकी भेजने के लिए थानाध्यक्ष द्वारा प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई है,हालांकि थानाध्यक्ष ने इस आरोप को  गलत बताया हें।

सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस उपाधीक्षक, रक्षित, दरभंगा की जांच रिपोर्ट में सोनकी थानाध्यक्ष प्रताप कुमार सिंह, परिचारी रूपक कुमार, दिवा शाखा के प्रभारी तथा गृहरक्षक मुंशी रामाकांत पासवान के कृत्य को संदिग्ध बताते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इसी आधार पर एसएसपी कार्यालय ने सोनकी थानाध्यक्ष को 31 अगस्त 2026 को स्पष्टीकरण जारी कर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा है,लेकिन एक महीना से अधिक बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कारवाई नहीं होने से चर्चा का विषय बना हुआ हें।

सात बार एक ही थाने में तैनाती, सवालों के घेरे में व्यवस्था

जांच में सामने आया कि गृहरक्षक-301456 सुशील कुमार की सोनकी थाना में कुल सात बार प्रतिनियुक्ति हुई। रिपोर्ट के अनुसार 9 दिसंबर 2017 से लेकर 18 जुलाई 2026 तक अलग-अलग अवधि में उसकी तैनाती सोनकी थाना में होती रही।

प्रतिनियुक्ति का सिलसिला इस प्रकार रहा

 09.12.2017 से सोनकी में प्रतिनियुक्ति
21.08.2022 से 04.03.2023
06.03.2023 से 24.08.2023
11.11.2023 से 27.05.2024

04.06.2024 से 14.07.2025

16.07.2025 से 14.12.2025
15.12.2025 से 18.07.2026

यानी अलग-अलग आदेशों के जरिए एक ही होमगार्ड बार-बार सोनकी थाना पहुंचता रहा। सवाल यह है कि जब सामान्य तौर पर जवानों की ड्यूटी और प्रतिनियुक्ति प्रशासनिक व्यवस्था के तहत होती है तो एक ही जवान को बार-बार उसी थाने में भेजने की जरूरत आखिर क्यों पड़ती रही?और समादेष्टा द्वारा किस आधार पर एक ही जगह प्रतिनियुक्ति की जाती रही ?सवाल यही हें कि समादेष्टा कार्यालय में अप्रत्यक्ष रूप से लेंन देन कर यह प्रतिनियुक्ति अब तक की जाती रही हें ?

थाना छोड़ने के बाद भी पीछा नहीं छूटा!

जांच रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा 18 जुलाई 2026 के बाद का है। रिपोर्ट के अनुसार सुशील कुमार सोनकी थाना से विरमित होकर गृहरक्षक कार्यालय चला गया था। इसके बाद सोनकी थानाध्यक्ष प्रताप कुमार सिंह स्वयं वरीय जिला समादेष्टा के कार्यालय गए और सुशील कुमार को फिर से सोनकी थाना भेजने का अनुरोध किया।हालांकि, समादेष्टा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनके द्वारा सुशील कुमार की सोनकी थाना में प्रतिनियुक्ति नहीं की गई थी।

यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है-एक थानेदार किसी खास होमगार्ड को दोबारा अपने थाने में बुलाने के लिए उसके विभागीय कार्यालय तक क्यों जाएगा?

60 जवान उपलब्ध थे, फिर उसी होमगार्ड पर इतना जोर क्यों?

जांच में यह भी सामने आया कि श्रावणी मेला ड्यूटी के लिए गृहरक्षक कार्यालय से पुलिस केन्द्र को 60 होमगार्ड जवान उपलब्ध कराए गए थे। बावजूद इसके सुशील कुमार को फिर सोनकी थाना के लिए कमान देने की कोशिश की गई।

गृहरक्षक मुंशी रामाकांत पासवान ने जांच में बताया कि 1/2 अगस्त को जब वे सोनकी थाना गए तो थानाध्यक्ष ने सुशील कुमार को विधि-व्यवस्था के तहत सोनकी थाना के लिए कमान देने को कहा। मुंशी ने बताया कि उन्होंने पहले कमान देने से मना किया, लेकिन थानाध्यक्ष के बार-बार कहने के बाद कमान-पत्र जारी कर दिया गया।

मुंशी के अनुसार थानाध्यक्ष ने यह भी कहा कि श्रावणी मेला के नाम पर सोनकी थाना के लिए कमान दे दीजिए।

‘मंदिर ड्यूटी’ के नाम पर रास्ता निकाला गया

जांच में परिचारी रूपक कुमार का बयान भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार मुंशी ने बताया कि सोनकी के बड़ा बाबू सुशील कुमार को सोनकी थाना का लंबित काम निपटाने के लिए मांग रहे हैं। जब उन्होंने सुशील कुमार को भेजना उचित नहीं बताया तो यह कहा गया कि सोनकी थाना अंतर्गत मंगल बाबा मंदिर में ड्यूटी के साथ-साथ थाना का लंबित कार्य भी करा लिया जाएगा।

इसके बाद सुशील कुमार को भेजने की अनुमति दे दी गई।

यानी सवाल यह है कि जब श्रावणी मेला के लिए 60 जवान उपलब्ध थे तो उसी जवान को, जिसकी सोनकी में पहले लंबी प्रतिनियुक्ति रही थी, मंदिर ड्यूटी के बहाने फिर उसी थाना क्षेत्र में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी?

जांच अधिकारी ने माना—कृत्य संदिग्ध

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 जुलाई को सुशील कुमार के सोनकी थाना से विरमित होकर चले जाने के बाद थानाध्यक्ष द्वारा उसे पुनः सोनकी में प्रतिनियुक्त कराने के लिए वरीय जिला समादेष्टा के कार्यालय जाकर अनुरोध करना संदिग्ध आचरण को परिलक्षित करता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूर्व प्रतिनियुक्ति के बावजूद सुशील कुमार को दोबारा सोनकी थाना के लिए कमान दिया गया। संबंधित पदाधिकारियों द्वारा इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारी को सूचना नहीं दी गई।

जांच अधिकारी ने इन घटनाओं के आधार पर थानाध्यक्ष प्रताप कुमार सिंह, परिचारी रूपक कुमार और गृहरक्षक मुंशी रामाकांत पासवान समेत संबंधित कर्मियों के कृत्य को संदिग्ध एवं संलिप्तता परिलक्षित करने वाला मानते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है।

शराब कारोबारियों से सांठ-गांठ के आरोप पर क्या निकला?

दस्तक 7 मीडिया ने 21 अगस्त को ग्रामीणों के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि सोनकी थाना में एक दशक से अधिक समय से जमे होमगार्ड सुशील कुमार की शराब कारोबारियों से कथित सांठ-गांठ और अवैध वसूली को लेकर क्षेत्र में चर्चा है तथा पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।

खबर का संज्ञान लेते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने जांच का आदेश दिया था। जांच में सुशील कुमार की लंबे समय तक सोनकी में तैनाती और उसे दोबारा थाना क्षेत्र में भेजने के लिए किए गए प्रयासों की पुष्टि हुई है। हालांकि शराब कारोबारियों से सांठ-गांठ और अवैध वसूली के आरोपों पर अंतिम आपराधिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।लेकिन ग्रामीणों का आरोप इस रिपोर्ट के बाद यह प्रमाणित करता हें कि गलत काम करने वाले वैसे सभी लोंगों से होमगार्ड जवान को संबंध हें और अवैध वसूली कर बंदरबांट करता होंगा ,जिससे थानाध्यक्ष प्रभावित होंगे या फिर यह भी हो सकता हें कि थाना में आयें आगंतुकों से बिचौलिया का काम करता होंगा ?अगर ऐसा नहीं हें तो किसी होमगार्ड से थानाध्यक्ष का यह अटूट रिश्ता क्या कहलायेगा ?

समादेष्टा के बयान ने भी खड़े किए सवाल

वरीय जिला समादेष्टा के बयान के मुताबिक सुशील कुमार की सोनकी में सात बार प्रतिनियुक्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि कई जगह से सुशील कुमार को सोनकी में भेजने के लिए कहा गया और थानाध्यक्ष भी उनके कार्यालय में पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने स्वयं उसकी प्रतिनियुक्ति सोनकी में नहीं की। तो सवाल यह हें कि एक होमगार्ड की इतने दिनों तक एक ही थाने में प्रतिनियुक्ति कैसे होती रही।

ऐसे में अब सवाल सिर्फ एक होमगार्ड की तैनाती का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि किसके प्रभाव से एक जवान बार-बार उसी थाना क्षेत्र में पहुंचता रहा और उसके हटने के बाद भी उसे वापस लाने की कोशिश क्यों होती रही?

अब थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की तलवार

एसएसपी कार्यालय ने 31 अगस्त को सोनकी थानाध्यक्ष प्रताप कुमार सिंह को जारी स्पष्टीकरण में जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए दो दिनों के भीतर जवाब मांगा था । पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर यह माना जाएगा कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है और उनके विरुद्ध अग्रतर कार्रवाई की जाएगी।सूत्र बताते हें कि एक माह से ज्यादा दिन बीत गये अब तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया हें

अब गेंद विभाग के पाले में है। जांच रिपोर्ट में जहां थानेदार समेत कई कर्मियों के कृत्य को संदिग्ध मानकर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, वहीं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग आगे सिर्फ स्पष्टीकरण तक सीमित रहता है या उन अधिकारियों-कर्मियों की जवाबदेही भी तय करता है, जिनकी भूमिका ने एक होमगार्ड की वर्षों तक एक ही थाना क्षेत्र में तैनाती को संभव बनाया।