दो माह तक खामोश रहा थाना, दस्तक 7में खबर छपी तो स्कूल पहुंची पुलिस!शिक्षिका से छेड़छाड़ के आरोप पर एसएसपी ने लगाई थानाध्यक्ष को फटकार, महिला पुलिस के साथ पहुंचे थानाध्यक्ष ने पीड़ित शिक्षिकाओं से की पूछताछ

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

स्कूल में महिला शिक्षिका से कथित छेड़छाड़, प्रताड़ना और शौचालय जाने के दौरान चोरी-छिपे वीडियो बनाने के गंभीर आरोपों पर दो माह तक पुलिस की जांच नहीं हुई। दस्तक 7 मीडिया में खबर प्रकाशित होते ही मामला पुलिस के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचा तो सोनकी थाना हरकत में आया। वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सोनकी थानाध्यक्ष को फटकार लगाई। इसके बाद मंगलवार को थानाध्यक्ष महिला पुलिसकर्मियों के साथ उत्क्रमित मध्य विद्यालय देकुली चट्टी पहुंचे और शिकायतकर्ता पक्ष से पूछताछ की।

विद्यालय पहुंची पुलिस के सामने शिक्षिकाओं ने कथित प्रताड़ना की पूरी कहानी रखी। उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षक द्वारा लंबे समय से दुर्व्यवहार किया जा रहा है। विरोध करने पर कथित रूप से बाहरी लोगों को विद्यालय में बुलाकर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। शिक्षिकाओं ने कहा कि वे इस घटनाक्रम से काफी परेशान हैं और भय के माहौल में विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं।

‘दो माह पहले पुलिस आती तो रुक जाता दुर्व्यवहार’

पुलिस से बातचीत के दौरान शिक्षिकाओं ने दो टूक कहा कि यदि पुलिस दो माह पहले ही विद्यालय पहुंचकर मामले को गंभीरता से देखती तो शायद इस तरह की घटनाओं पर रोक लग जाती। शिक्षिकाओं ने कहा कि वे बाहर से आकर यहां नौकरी कर रही हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में पढ़ाना है, लेकिन विद्यालय का माहौल ही असहज बना दिया गया है।

सबसे अहम बात यह रही कि शिक्षिकाओं ने पुलिस से कहा कि वे फिलहाल प्राथमिकी दर्ज कराने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि एफआईआर के बाद न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे और इसका सीधा असर हम सभी ओर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

‘हमें मुकदमा नहीं, सुरक्षा चाहिए।’

शिक्षिकाओं ने थानाध्यक्ष से कहा कि पुलिस उन्हें केवल सुरक्षा का भरोसा दे, ताकि वे बिना डर के विद्यालय में अपनी ड्यूटी कर सकें।

विभाग को शिकायत, फिर भी कार्रवाई पर सवाल

शिक्षिकाओं के अनुसार, मामले को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी लिखित शिकायत दी गई थी। उनका आरोप है कि जिस विभाग को कार्रवाई करनी थी, वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षिकाओं ने बीडीओ कार्यालय में राजेश नामक व्यक्ति पर भी कथित रूप से आरोपी पक्ष से समझौता करने का दबाव बनाने और धमकी देने का आरोप लगाया।

आरोपित शिक्षक से भी पूछताछ, दी हिदायत

विद्यालय पहुंचने के बाद थानाध्यक्ष ने आरोपित शिक्षक से भी पूछताछ की और उसे आवश्यक हिदायत दी। पुलिस ने विद्यालय के सभी शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि महिला पुलिस पदाधिकारी और पुलिसकर्मी समय-समय पर विद्यालय पहुंचकर स्थिति की जानकारी लेते रहेंगे।

थानाध्यक्ष ने शिक्षिकाओं से कहा कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर सीधे उन्हें फोन करें और निडर होकर विद्यालय में अपनी सेवा दें।

एसएसपी के रुख से थाने की कार्यशैली पर उठे सवाल

मामले में दो माह तक पुलिस की ओर से जांच नहीं होने की शिकायत सामने आने के बाद एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने बहादुरपुर के पर्यवेक्षी पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार को मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है।

अब सवाल सिर्फ शिक्षिका द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच का नहीं है। सवाल यह भी है कि 25 जुलाई को आवेदन दिए जाने के बाद आखिर दो महीने तक पुलिस विद्यालय क्यों नहीं पहुंची? विभागीय अधिकारियों को शिकायत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि शिक्षिकाएं सुरक्षा की मांग कर रही थीं तो उनकी शिकायत पर समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?यह जवाबदेही पहले शिक्षा विभाग की थीं ,शिक्षिका द्वारा आवेदन दिये जाने के बाद विभाग को कारवाई करनी चाहिये थीं ओर पुलिस को सुरक्षा।