,DGP की कुर्सी पर फिर फंसा पेंच, प्रीता वर्मा का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ा,

गंगवार-श्रीनिवासन के बीच उलझा पैनल, कुंदन कृष्णन के नाम से बढ़ा सस्पेंस; UPSC को अब तक नहीं भेजी गई सूची

दस्तक 7 मीडिया/संजय कुमार राय

पटना। बिहार में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति का इंतजार एक बार फिर लंबा होता दिख रहा है। पूर्व DGP विनय कुमार के VRS लेने के बाद खाली हुई पुलिस महानिदेशक की कुर्सी पर फिलहाल 1991 बैच की IPS अधिकारी प्रीता वर्मा ही जिम्मेदारी संभालती रहेंगी। राज्य सरकार ने सोमवार, 5 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर उन्हें DGP का अतिरिक्त प्रभार अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखी है।

गृह विभाग की आरक्षी शाखा से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रीता वर्मा, भापुसे (1991), महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं, बिहार को पुलिस महानिदेशक, बिहार का प्रदत्त अतिरिक्त प्रभार अगले आदेश तक विस्तारित किया जाता है।

वरिष्ठता में फिलहाल प्रीता वर्मा सबसे आगे

प्रीता वर्मा 1991 बैच की अधिकारी हैं और वरिष्ठता के लिहाज से मौजूदा दावेदारों में सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। ऐसे में उनका कार्यवाहक DGP के रूप में कार्यकाल बढ़ना इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, स्थायी DGP के चयन के लिए सरकार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत UPSC को अधिकारियों का पैनल भेजना होगा।

यही पैनल फिलहाल सबसे बड़ा पेंच बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों के नामों को लेकर मंथन जारी है और अभी तक UPSC को पैनल भेजे जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

गंगवार और श्रीनिवासन के नाम पर मंथन

स्थायी DGP के लिए 1993 बैच के IPS अधिकारी जितेंद्र सिंह गंगवार का नाम लंबे समय से प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। बिहार में फील्ड पुलिसिंग का उनका लंबा अनुभव और नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करने का अनुभव उनके पक्ष में माना जाता है। रोहतास, कैमूर, नालंदा, नवादा और जहानाबाद के अलावा झारखंड के गढ़वा, चतरा और पलामू में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

दूसरी ओर 1992 बैच के IPS अधिकारी बी. श्रीनिवासन का नाम सामने आने से समीकरण और पेचीदा हो गया है। श्रीनिवासन फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर NSG के महानिदेशक हैं। केंद्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के कारण उनकी दावेदारी को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।

ऐसे में सरकार के सामने एक ओर वरिष्ठता और बिहार में फील्ड पुलिसिंग का अनुभव है तो दूसरी ओर केंद्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी की दावेदारी। यही वजह है कि पैनल को लेकर अंतिम निर्णय में समय लग रहा है।

कुंदन कृष्णन के कारण बढ़ा सस्पेंस

पूरे घटनाक्रम में 1991 बैच के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति और पात्रता से जुड़े समीकरण बदलने की स्थिति में उनका नाम भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, फिलहाल कुंदन कृष्णन की दावेदारी को आधिकारिक रूप से सामने आया नाम नहीं, बल्कि संभावित समीकरण के तौर पर ही देखा जा रहा है।

कार्यवाहक DGP का उदाहरण पहले भी

बिहार में स्थायी DGP की नियुक्ति में देरी का उदाहरण पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2024 में स्थायी DGP को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के दौरान आलोक राज को कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में दिसंबर 2024 में विनय कुमार को स्थायी DGP बनाया गया था।

अब 5 अक्टूबर को प्रीता वर्मा का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि स्थायी नियुक्ति पर तत्काल फैसला नहीं हुआ है। सरकार और केंद्र के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने तक बिहार पुलिस की कमान प्रीता वर्मा के पास ही रहेगी।

अब निगाह UPSC को भेजे जाने वाले पैनल पर

DGP नियुक्ति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य सरकार UPSC को पैनल कब भेजती है और उसमें किन अधिकारियों को शामिल किया जाता है। पैनल में शामिल नामों पर UPSC की प्रक्रिया के बाद ही स्थायी नियुक्ति की दिशा में तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल प्रीता वर्मा को अगले आदेश तक DGP का अतिरिक्त प्रभार मिलना यह संकेत देता है कि स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया में अभी समय लग सकता है। वहीं गंगवार, श्रीनिवासन और संभावित रूप से कुंदन कृष्णन के नामों के बीच चल रही चर्चाओं ने बिहार पुलिस के अगले स्थायी मुखिया को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।