स्कूल में शिक्षिका से छेड़छाड़ और शौचालय के दौरान वीडियो बनाने का आरोप, दो माह बाद भी पुलिस जांच नहीं,

सोनकी थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय देकुली चट्टी का मामला, प्रधानाध्यापक ने 25 जुलाई को पुलिस को दिया था आवेदन।

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

सोनकी थाना की गलत कार्यशैली होम गार्ड मामले में सामने आयी ही थीं ,कि एक दूसरा मामला भी सामने आ गया ,सवाल यही हें कि वरीय पुलिस पदाधिकारी के ईमानदार प्रयास को ऐसे ऐसे थानाध्यक्ष बदनाम क्यों करते हें ?एक एफआईआर करना कौन सी बड़ी बात हें लेकिन एफआईआर करने में इतनी देरी उनकी मंशा को भी स्पष्ट करता हें,क्यूंकि पीड़ित महिला के आवेदन पर एक बार घटना स्थल पर जाना भी मुनासिब नहीं समझा।

सोनकी थाना क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय देकुली चट्टी में कार्यरत एक महिला शिक्षिका ने अपने ही विद्यालय के एक शिक्षक पर लगातार प्रताड़ित करने, छेड़छाड़ करने और शौचालय जाने के दौरान कथित रूप से छुपकर वीडियो बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका की शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर संबंधित शिक्षक कथित तौर पर बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में बुलाकर दबाव बनाने का प्रयास करता है। मामले को लेकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा विभागीय अधिकारियों को शिकायत करने के बाद सोनकी थाने में भी आवेदन दिया गया है।

शिकायत के मुताबिक, उक्त शिक्षक पिछले कई महीनों से महिला शिक्षिका को परेशान कर रहा है। आरोप है कि वह शिक्षिका के शौचालय जाने के दौरान पुरुष शिक्षक छिपकर वीडियो बनाने की कोशिश करता है। शिक्षिका द्वारा विरोध किए जाने पर कथित तौर पर नशे में धुत लोगों को स्कूल परिसर में बुलाया जाता है। इतना ही नहीं, विद्यालय में किसी विभागीय पदाधिकारी के पहुंचने पर भी ग्रामीणों की भीड़ जुटाने और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने का आरोप शिकायत में लगाया गया है।

लगातार परेशान किए जाने से परेशान महिला शिक्षिका ने इसकी जानकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक को दी। प्रधानाध्यापक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के कई पदाधिकारियों को पत्र देकर कार्रवाई का आग्रह किया। इसके बाद पुलिस से भी शिकायत की गई। प्रधानाध्यापक द्वारा 25 जुलाई को सोनकी थाने में आवेदन दिए जाने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि आवेदन दिए जाने के करीब दो माह बाद भी पुलिस की ओर से विद्यालय पहुंचकर मामले की जांच नहीं की गई। इस दौरान संबंधित शिक्षिका की सुरक्षा और कार्यस्थल पर उसके सम्मान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह भी सवाल उठता है कि यदि किसी महिला कर्मचारी को उसके कार्यस्थल पर ही इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है तो उसकी शिकायत पर समयबद्ध जांच और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं करती?
मामले में सोनकी पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस इस शिकायत पर कब तक कारवाई होगी ताकि महिला शिक्षक सुरक्षित माहौल में काम कर सके ?
कई मामलों में सोनकी पुलिस की लापरवाही उनके कार्यशैली को दाग़दार करता है और वरीय पुलिस पदाधिकारी के ईमानदार पुलिसिंग को उनके द्वारा बट्टा लगाया जाता हें।