बिहार में बनेंगे 3 नए गंगा पथ, 219.51 किमी का नेटवर्क होगा तैयार,

बक्सर से गोपालगंज तक बदलेगी कनेक्टिविटी की तस्वीर, DPR बनाने में जुटे कंसल्टेंट

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने तीन नए गंगा पथों के निर्माण की कवायद तेज कर दी है। करीब 219.51 किलोमीटर लंबाई वाले इन तीनों पथों के लिए चयनित सलाहकारों ने काम शुरू कर दिया है। तीन महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद पश्चिमी, मध्य और उत्तर बिहार के कई जिलों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। इससे व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई को भी गति मिलेगी।

विश्वामित्र पथ:

बक्सर से आरा होते हुए मनेर (कोइलवर) तक करीब 90 किलोमीटर लंबा यह गंगा पथ पश्चिमी बिहार को सीधे पटना के जेपी गंगा पथ से जोड़ेगा। मनेर तक जेपी गंगा पथ के विस्तार को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

अंबिका पथ: बिदुपुर से दिघवारा तक करीब 56 किलोमीटर लंबा यह मार्ग गंगा के दक्षिणी छोर पर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इसके बनने से पटना के आसपास यातायात का दबाव कम करने और उत्तर-दक्षिण बिहार के बीच आवागमन सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

नारायणी पथ: सारण के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक करीब 73.51 किलोमीटर का यह पथ सारण, सीवान और गोपालगंज को बेहतर सड़क संपर्क देगा। इसके जरिए उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाला सफर भी आसान होने की उम्मीद है।

तीन महीने में तैयार होगी DPR

परियोजनाओं के लिए नियुक्त कंसल्टेंट एलाइनमेंट, मिट्टी की जांच, संभावित निर्माण लागत और भविष्य के ट्रैफिक का अध्ययन कर रहे हैं। इन्हीं आधारों पर अंतिम DPR तैयार की जाएगी।

सरकार के अनुसार इन पथों के निर्माण से पटना, सारण, गोपालगंज, सीवान, भोजपुर और बक्सर समेत कई जिलों को लाभ मिलेगा। खासकर औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन के लिए इन मार्गों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निजी वाहनों से नहीं लिया जाएगा टोल

नए राज्य राजमार्गों पर टोल व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार टोल टैक्स केवल व्यावसायिक वाहनों से लिया जाएगा, जबकि निजी वाहनों को टोल से छूट रहेगी।