भूमि विवाद में बुजुर्ग पर दुष्कर्म के प्रयास का आरोप, बिना जांच जेल भेजने पर भड़के ग्रामीण,उच्च स्तरीय जांच की मांग

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र स्थित रजवा गांव में एक बुजुर्ग पर दुष्कर्म के प्रयास का आरोप और उसके बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश गहरा गया है। महिला हीरा कुमारी (26) के आवेदन पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, लेकिन रजवा गांव के ग्रामीणों ने इस पूरी घटना को मनगढंत बताते हुए पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पुलिस ने बिना किसी निष्पक्ष जांच के एक बीमार और निर्दोष बुजुर्ग को सलाखों के पीछे धकेल दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रजवा गांव की हीरा कुमारी ने बिरौल थाना में आवेदन देकर गांव के ही बुजुर्ग घुरन सदा पर दुष्कर्म के प्रयास का संगीन आरोप लगाया है। इस मामले में कुल चार लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। आवेदन मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घुरन सदा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि, घटना के सामने आते ही रजवा गांव के दर्जनों लोग बुजुर्ग के समर्थन में उतर आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि एफआईआर में दर्ज कराई गई कहानी वास्तविकता से पूरी तरह परे है।

ग्रामीणों ने मामले की परतें खोलते हुए बताया कि घुरन सदा पिछले लगभग डेढ़ महीने से गंभीर ‘मस्तिष्क बुखार’ (ब्रेन फीवर) से ग्रसित हैं और उनका स्वास्थ्य काफी खराब रहता है। ऐसे में उन पर इस प्रकार का आरोप लगाना सरासर बेबुनियाद है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस झूठे केस की जड़ में भूमि विवाद है। कुछ ही दिन पहले उक्त महिला के परिवार और घुरन सदा के परिजनों के बीच जमीन को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों की महिलाओं के बीच कहासुनी और हाथापाई भी हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उसी रंजिश का बदला लेने के लिए बुजुर्ग को इस गंदे मामले में घसीटा गया है। स्थानीय महिला, पुरुष ने बताया कि घुरन सदा की पत्नी का निधन आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व हो चुका है। इतने लंबे समय में पूरे रजवा गांव में कभी किसी व्यक्ति ने उनके चरित्र पर अंगुली नहीं उठाई। गांव के लोग उनके शांत और निष्कलंक स्वभाव की गवाही दे रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को केवल एकतरफा आवेदन के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय जमीनी स्तर पर मामले की प्राथमिकता से जांच करनी चाहिए थी। बिना किसी जांच-पड़ताल के एक बुजुर्ग व बीमार व्यक्ति को जेल भेजना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है और यह पूरा मामला अब उच्च स्तरीय जांच का विषय बन गया है। थानाध्यक्ष चन्द्र मणि ने बताया कि इस मामले में महिला का मेडिकल और बयान कराया जाएगा। आगे अनुसंधान जारी है।

मामले के तूल पकड़ने पर क्षेत्रीय विधायक सुजीत कुमार ने हस्तक्षेप किया है। विधायक सुजीत कुमार ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों को वार्ता के लिए बुलाया गया है, ताकि सच सामने आ सके और विवाद का उचित समाधान निकाला जा सके। फिलहाल, रजवा गांव के लोग इस आरोप को पूरी तरह से गलत बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि विधायक की पहल और आने वाले पुलिस अनुसंधान में बुजुर्ग को न्याय मिल पाता है या नहीं।