पंडों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य, चरित्र सत्यापन की उठी मांग,नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सख्त, पंडों की उम्र सीमा तय करने की भी मांग

दस्तक 7 मिडिया, प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान।


बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में पंडों की गतिविधियों को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच मंदिर न्यास समिति की ओर से महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। न्यास समिति अध्यक्ष सह एसडीएम बिरौल शशांक राज और उपाध्यक्ष सह एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी की संयुक्त अध्यक्षता में मंदिर के सभी पंडों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंदिर की व्यवस्था, पंडों की पहचान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान मंदिर में पंडों से संबंधित लगातार सामने आ रहे चोरी और विवाद के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सभी पंडों को पहचान पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया। इसके माध्यम से मंदिर परिसर में पूजा-पाठ कराने वाले पंडों की पहचान सुनिश्चित करने और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने की व्यवस्था को मजबूत करने की बात सामने आई।

इधर, स्थानीय लोगों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। लोगों का कहना है कि मंदिर में पंडों को पहचान पत्र जारी करने से पहले सभी पंडों का चरित्र सत्यापन और पुलिस स्तर पर आवश्यक जांच कराई जानी चाहिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, केवल पहचान पत्र जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मंदिर में पूजा-पाठ कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पृष्ठभूमि की भी जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे भी पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में सेवा देने वाले लोगों की पहचान और सत्यापन की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

बताया जाता है कि 27 सितंबर को मंदिर से जुड़े एक पंडा पर नौ वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ का आरोप सामने आया था। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में पंडों की भूमिका और उनकी पृष्ठभूमि की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में आरोपित व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों ने मंदिर प्रशासन से व्यवस्था को और कड़ा करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि मंदिर जैसे धार्मिक और सार्वजनिक स्थल पर पूजा-पाठ कराने वाले लोगों की नियुक्ति अथवा पहचान सुनिश्चित करने से पहले उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि और चरित्र का सत्यापन किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप और न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं,इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

स्थानीय लोगों ने मंदिर में पूजा-पाठ कराने वाले पंडों के लिए न्यूनतम उम्र निर्धारित करने की मांग भी उठाई है। मांग है कि मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ कराने अथवा श्रद्धालुओं की धार्मिक सेवा में शामिल होने वाले पंडों की न्यूनतम उम्र 30 वर्ष निर्धारित की जाए।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि उम्र सीमा, पहचान पत्र और चरित्र सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने से मंदिर प्रशासन के पास पंडों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे किसी तरह की शिकायत अथवा विवाद की स्थिति में संबंधित व्यक्ति की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच करना आसान होगा।

बैठक के बाद अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि पहचान पत्र जारी करने के साथ-साथ चरित्र सत्यापन, पुलिस जांच, उम्र सीमा और पंडों के लिए आचार संहिता जैसी व्यवस्थाओं को किस तरह लागू किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान भी है। इसलिए मंदिर की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे श्रद्धालु बिना किसी भय के मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर सकें और किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जा सके।