सरकारी स्कूलों में अब रोबोट बनाएंगे बच्चे, AI सिखाएगी नई उड़ान,

बिहार के 38 जिलों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, यूपी में 72 स्कूलों में ड्रीम लैब; कक्षा 6 से 12 तक छात्रों को मिलेगा भविष्य की तकनीक का प्रशिक्षण

दस्तक 7मीडिया ,पटना/लखनऊ।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहने वाली है। बिहार और उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। दोनों राज्यों में सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ड्रोन और 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों की पढ़ाई और प्रयोग के लिए आधुनिक लैब विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही तकनीकी दक्षता और नवाचार से जोड़ना है।

बिहार में 38 जिलों में तैयार होंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

बिहार में शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों के व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रम को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप अपग्रेड करने की तैयारी में है। राज्य के सभी 38 जिलों में कम से कम एक मॉडल सरकारी स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी के साथ AI, रोबोटिक्स और कोडिंग लैब विकसित करने की योजना है।

इन लैबों में बच्चों को केवल तकनीक के बारे में सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें प्रोजेक्ट और प्रयोग के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा। अटल टिंकरिंग लैब की तर्ज पर बच्चों में समस्या समाधान, तार्किक सोच और नवाचार की क्षमता विकसित करने पर जोर रहेगा।

बच्चों से पहले शिक्षकों को मिलेगी AI की ट्रेनिंग

बिहार में AI आधारित शिक्षा को लागू करने से पहले शिक्षकों को तकनीकी रूप से तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार शिक्षकों को AI के इस्तेमाल और AI आधारित शिक्षण तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए Google for Education India जैसी तकनीकी संस्थाओं के साथ सहयोग की योजना पर काम किया जा रहा है।

कक्षा 8 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए NCERT के मॉडल के अनुरूप AI से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। DIKSHA प्लेटफॉर्म पर AI आधारित वीडियो सर्च और ‘रीड अलाउड’ जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल भी शिक्षा को अधिक इंटरैक्टिव बनाने के लिए किया जा रहा है।

मदरसा छात्रों तक भी पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

बिहार में AI और रोबोटिक्स की पहुंच सामान्य सरकारी स्कूलों तक सीमित रखने के बजाय मदरसा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसका मकसद तकनीकी शिक्षा के अवसरों को ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।

इसके अलावा पटना के स्कूलों से शुरुआत करते हुए मॉडल हाई स्कूलों में AI आधारित लर्निंग सपोर्ट और JEE-NEET जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए लाइव इंटरैक्टिव कोचिंग की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

यूपी में 72 स्कूलों से शुरू होगी ड्रीम लैब की पहल

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को रोबोटिक्स और दूसरी उभरती तकनीकों से जोड़ने के लिए ‘ड्रीम लैब्स’ विकसित की जा रही हैं। योजना के तहत तीन चरणों में 150 हब स्कूल और 450 स्पोक स्कूल को जोड़ा जाना है। पहले चरण में 72 स्कूलों में ड्रीम लैब स्थापित करने की तैयारी है।

इन लैबों में विद्यार्थी AI, रोबोटिक्स, IoT, 3D प्रिंटिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर प्रयोग कर सकेंगे। कक्षा 6 से 12वीं तक के बच्चों को सेंसर, रोबोट और ड्रोन जैसी तकनीकों के माध्यम से प्रैक्टिकल लर्निंग का अवसर मिलेगा।

वाराणसी के 100 स्कूलों में AI लैब का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश में वाराणसी को भी AI आधारित स्कूली शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। जिले के 100 सरकारी स्कूलों में AI लैब शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में शहर और आठ ब्लॉकों के 20 कंपोजिट स्कूलों में AI लैब स्थापित करने की कवायद तेज की गई है।

इन पहलों से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय तकनीक को समझने, प्रयोग करने और नई चीजें बनाने का अवसर मिलने की उम्मीद है। स्कूल स्तर पर AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई का विस्तार आने वाले वर्षों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल की भूमिका को भी बदल सकता है।