23 अक्टूबर को मतदान से पहले दरभंगा में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक
23 अक्टूबर को मतदान से पहले दरभंगा में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक
23 अक्टूबर को मतदान से पहले दरभंगा में निषेधाज्ञा लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को लेकर जिला प्रशासन ने जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। जिला दंडाधिकारी कौशल कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा-163 के तहत यह आदेश जारी किया है। 23 अक्टूबर को मतदान को देखते हुए विधि-व्यवस्था, लोकशांति और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश के अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया समाप्त होने तक अथवा अधिकतम 60 दिनों तक, जो पहले हो, निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी। इसके तहत राजनीतिक उद्देश्य से सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन अथवा ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल के लिए सक्षम पदाधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पांच या उससे अधिक लोगों के राजनीतिक सभा, बैठक, जुलूस या धरना-प्रदर्शन के लिए भी पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी।
सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आपत्तिजनक या विधि-विरुद्ध संदेशों के प्रसार पर भी रोक रहेगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर, पर्चा, आलेख या फोटो के प्रकाशन पर प्रतिबंध रहेगा। धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा और सांप्रदायिक भावना भड़काने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। मतदाताओं को डराने, धमकाने या प्रलोभन देने की भी अनुमति नहीं होगी।
चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक रूप से आग्नेयास्त्र, लाठी, भाला, गड़ासा, तीर-धनुष अथवा अन्य घातक हथियारों का प्रदर्शन प्रतिबंधित रहेगा। रोड शो में अधिकतम 10 वाहनों का काफिला ही हो सकेगा और वाहनों के बीच कम से कम 100 मीटर की दूरी रखनी होगी। चुनाव प्रचार में वाहनों के इस्तेमाल के लिए निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी होगा।
आदेश में राजनीतिक प्रचार में प्रतिबंधित प्लास्टिक और प्रदूषण फैलाने वाली सामग्री के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम, बिहार संपत्ति विरूपण अधिनियम, 1985 और निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता का पालन अनिवार्य किया गया है।
इन गतिविधियों को मिली छूट
पूर्व अनुमति प्राप्त सभा-जुलूस, शादी-विवाह एवं बारात, शवयात्रा, हाट-बाजार, अस्पताल जाने वाले मरीज के साथ के व्यक्ति, विद्यालय-महाविद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राएं तथा ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी और पुलिस बल इस आदेश के दायरे से बाहर रहेंगे। धार्मिक अनुष्ठान तथा सामाजिक-सांस्कृतिक जुलूस और सभाओं को भी छूट दी गई है।
शासकीय कार्य में तैनात दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों के हथियार, सिख धर्मावलंबियों की परंपरागत कृपाण तथा धार्मिक व्यक्तियों द्वारा परंपरानुसार धारित शस्त्र भी निषेधाज्ञा से मुक्त रहेंगे।
जिला दंडाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने और सार्वजनिक स्थलों पर इसकी प्रति चिपकाने का निर्देश दिया है। अनुमंडल पदाधिकारियों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों, पुलिस निरीक्षकों और थानाध्यक्षों को आदेश की जानकारी स्टेशन डायरी में दर्ज कराते हुए अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।