कोसी पश्चिमी तटबंध पर फिर गरजने लगे भारी वाहन: 2024 की तबाही के बाद भी बेपरवाह प्रशासन, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

दस्तक 7 मिडिया, घनश्यामपुर।

जिस कोसी के उफान और तटबंध टूटने का खौफ आज भी लाखों लोगों के दिलों में जिंदा है, उसी कोसी पश्चिमी तटबंध की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का एक नया खेल शुरू हो गया है। प्रशासनिक अनदेखी और मिलीभगत के चलते तटबंध पर एक बार फिर गिट्टी, बालू और अन्य भारी सामानों से लदे ओवरलोडेड ट्रकों की बेधड़क आवाजाही शुरू हो गई है। यह वही तटबंध है जो 30 सितंबर 2024 की काली रात को टूट गया था और देखते ही देखते कई गांव जलमग्न हो गए थे। उस त्रासदी से सबक लेने के बजाय,जल संसाधन विभाग के अधिकारी अब किसी नई तबाही का इंतजार कर रहा है।

2024 में तटबंध टूटने के बाद मची अफरा-तफरी के बीच जिला प्रशासन ने आनन-फानन में तटबंध के दोनों छोरों पर लोहे के बैरियर लगाए थे, ताकि भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके। कुछ हफ्तों तक तो यह सख्ती दिखी, लेकिन धीरे-धीरे नियमों को ताक पर रख दिया गया। आज स्थिति यह है कि बैरियर सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं और रात-दिन भारी वाहनों का रेला इस पर से गुजर रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बिना विभागीय शह के इतना बड़ा उल्लंघन संभव नहीं है। तटबंध की मिट्टी और सड़क पर लगातार पड़ रहे भारी दबाव से संरचना कमजोर हो रही है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा या दोबारा तटबंध धंसने की नौबत आ सकती है।

यह हमारा काम नहीं– सीओ की पल्ला झाड़ने वाली जवाबदेही-
जब इस गंभीर मामले को लेकर अंचलाधिकारी (सीओ) प्रशांत कुमार से बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यह मामला हमारे क्षेत्राधिकार का नहीं, बल्कि आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) का है।” इसके आगे उन्होंने कुछ भी बोलने या कोई कदम उठाने से साफ इनकार कर दिया। अंचलाधिकारी का यह बयान प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी क्षेत्र की भौगोलिक सुरक्षा, बांध की मजबूती और आम जनता की जान-माल पर खतरा मंडरा रहा हो, तो क्या स्थानीय अंचल प्रशासन केवल ‘विभाग’ का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ सकता है ?

स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर ये सवाल उठाए हैं कि अगर भारी वाहनों के दबाव से तटबंध दोबारा क्षतिग्रस्त होता है,तो दोबारा क्षतिग्रस्त होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा-सीओ या आरटीओ ? तटबंध पर लगाए गए बैरियर आखिर किसकी इजाजत से हटाए गए या निष्क्रिय किए गए ?

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और वरीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने, तटबंध पर भारी वाहनों के परिचालन को तुरंत रोकने और दोषी अधिकारियों व वाहन चालकों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।