बिरौल में पैर पसारता ‘सूखा नशा’ युवाओं को बर्बादी की ओर धकेलने की साजिश, समाज और पुलिस के साझा प्रयास से ही थमेगी तबाही

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिरौल (दरभंगा): दरभंगा जिले का बिरौल अनुमंडल क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर और अदृश्य संकट की चपेट में आता दिख रहा है। क्षेत्र के शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक युवाओं को स्मैक जैसे घातक ‘सूखे नशे’ की लत में धकेलने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। अगर समय रहते इस पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह प्रवृत्ति हर अभिभावक और सभ्य समाज के लिए एक भयावह रूप ले सकती है।

स्थानीय प्रबुद्धजनों और बुद्धिजीवियों का स्पष्ट मानना है कि क्षेत्र में अचानक स्मैक जैसे महंगे और जानलेवा मादक पदार्थों की सुलभता कोई इत्तेफाक नहीं है। यह नई पीढ़ी को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से खोखला करने का सुनियोजित प्रयास है। जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें, हुनर और बेहतर भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें सूखे नशे के अंधेरे दलदल में धकेला जा रहा है। यह स्थिति हर परिवार के लिए एक चेतावनी है। नशा केवल एक व्यक्ति को नष्ट नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तबाह कर देता है। नशे की पूर्ति के लिए युवा अपराध की राह पर भी भटक सकते हैं, जिससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो सकता है।इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात या ढिलाई के, पूर्णतः निःस्वार्थ भावना से अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। नशे के अवैध कारोबार में लिप्त छोटे-बड़े हर तस्कर पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। लेकिन केवल पुलिस के बल पर इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाजसेवी संस्थाओं, युवाओं, और स्थानीय नागरिकों को आगे आकर पुलिस का सहयोग करना होगा। इसके लिए सूचना तंत्र मजबूत करें। नशा बेचने और आपूर्ति करने वालों की जानकारी बिना डरे स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाएं। गांवों और कस्बों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाएं।अभिभावक अपने बच्चों के व्यवहार और उनकी संगति पर विशेष नजर रखें और उनसे दोस्ताना संवाद बनाए रखें। अगर आज बिरौल का समाज और प्रशासन एक साथ खड़ा नहीं हुआ, तो कल इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस दिशा में तुरंत ठोस और निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बिरौल की आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त वातावरण दिया जा सके।