उड़ता कुशेश्वरस्थान पर अब होने लगा चर्चा।कुशेश्वरस्थान अब सूखे नशे की गिरफ्त में, खंडहर धर्मशाला और खेत बने नशेड़ियों के अड्डे।
शराबबंदी के बाद बढ़ा सूखे नशे का चलन, युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा गंभीर खतरा।

दस्तक 7 मीडिया, प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान

कभी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध कुशेश्वरस्थान क्षेत्र में अब नशे के बढ़ते कारोबार और सेवन को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराबबंदी के बाद नशे के स्वरूप में बदलाव आया है और युवाओं के बीच सूखे नशे का चलन तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के सुनसान स्थान, खेत, खंडहरनुमा धर्मशालाएं और खाली पड़े भवन कथित तौर पर नशा करने वालों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कई युवा नशे की गिरफ्त में इस कदर फंसते जा रहे हैं कि नशे की पूर्ति के लिए गलत रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। इससे चोरी, छिनतई और अन्य आपराधिक गतिविधियों की आशंका भी बढ़ रही है। हालांकि, इन गतिविधियों से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकती है।
खंडहर धर्मशाला और खेतों में जुटते हैं युवक
कुशेश्वरस्थान क्षेत्र में कई ऐसे स्थान हैं जहां दिन ढलने के बाद युवाओं की संदिग्ध गतिविधियां देखे जाने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा की जाती है। वर्षों से उपेक्षित पड़े खंडहरनुमा भवन और धर्मशालाओं के आसपास नशेड़ियों के जमावड़े की बात सामने आती रही है। इसके अलावा खेतों और सुनसान इलाकों में भी नशे का सेवन किए जाने की शिकायतें हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनसान जगहों पर नशे का सेवन करने वालों के कारण आसपास के लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। अभिभावकों की चिंता खासकर किशोर और युवाओं को लेकर बढ़ गई है।
शराबबंदी के बाद सूखे नशे का बढ़ता खतरा
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब की उपलब्धता पर रोक के बाद कुछ युवाओं ने दूसरे नशीले पदार्थों की ओर रुख किया है। इनमें नशीली गोलियां, कफ सिरप और अन्य प्रतिबंधित या मादक पदार्थों के सेवन की शिकायतें शामिल हैं।
हालांकि, किसी विशेष पदार्थ की उपलब्धता या उसके बड़े पैमाने पर कारोबार का दावा जांच और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। पुलिस द्वारा समय-समय पर नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है।
नशे ने कई परिवारों को किया बर्बाद
नशे की लत केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। कम उम्र में नशे की शुरुआत करने वाले युवाओं में पढ़ाई और रोजगार से दूरी, आर्थिक परेशानी, पारिवारिक विवाद तथा सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में नशे की समस्या को केवल पुलिस कार्रवाई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए परिवार, विद्यालय, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को मिलकर काम करने की जरूरत है।
‘उड़ता पंजाब’ के बाद अब ‘उड़ता कुशेश्वरस्थान’ की चिंता
पंजाब में नशे की समस्या को लेकर वर्षों से ‘उड़ता पंजाब’ शब्द चर्चा में रहा है। अब कुशेश्वरस्थान में नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर स्थानीय लोगों के बीच इसी तरह की चिंता दिखाई देने लगी है। ‘उड़ता पंजाब’ के बाद अब ‘उड़ता कुशेश्वरस्थान’ जैसी स्थिति न बने, इसके लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
पुलिस की निगरानी और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने सुनसान स्थानों, खंडहर भवनों और खेतों के आसपास नियमित गश्ती बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा नशीले पदार्थों की बिक्री और आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि केवल नशा करने वाले युवाओं को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क और इसके पीछे काम कर रहे लोगों की पहचान कर कार्रवाई करना भी जरूरी है।
युवाओं को बचाने के लिए सामूहिक पहल जरूरी
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवारों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलाव पर ध्यान देना होगा। स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, युवाओं के लिए खेल एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां बढ़ाने तथा जरूरतमंद युवाओं को नशामुक्ति केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
कुशेश्वरस्थान जैसे धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि नशे की समस्या बढ़ती है तो इसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में नशीले पदार्थों की उपलब्धता, बिक्री और सेवन की वास्तविक स्थिति की जांच करे तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।