युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन जल-जीवन-हरियाली और सुरक्षित नौकायन की दी जानकारी

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /अफजल खान 

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के एनएसएस कोषांग द्वारा आयोजित सात दिवसीय ‘युवा आपदा मित्र आवासीय प्रशिक्षण शिविर’ के छठे दिन स्वयंसेवकों को जल-जीवन-हरियाली, सर्पदंश प्रबंधन, सुरक्षित नौकायन और जल स्वच्छता के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित शिविर में दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर जिले के 200 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण की शुरुआत सुबह पीटी, योग और प्राणायाम से हुई। इसके बाद राष्ट्रगीत और एनएसएस लक्ष्य-गीत के साथ तकनीकी सत्र शुरू हुआ। प्रशिक्षक पंकज कुमार ने ‘जल-जीवन-हरियाली’ विषय पर कहा कि जल, जीवन और हरियाली एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को जन-आंदोलन का रूप देने की जरूरत है। उन्होंने सौर, पवन और जल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर भी जोर दिया।

दूसरे सत्र में प्रशिक्षिका प्रीति कुमारी ने स्वयंसेवकों को सर्पदंश प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने सांपों के प्रकार, सर्पदंश के लक्षण, बचाव और प्राथमिक सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। पीड़ित को शांत रखते हुए उसकी गतिविधियों को कम करना जरूरी है।

प्रशिक्षक सच्चिदानंद कुमार ने सुरक्षित नौकायन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नाव में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को बैठाया जाए और लाइफ जैकेट समेत रस्सी, टॉर्च, सीटी, संचार उपकरण व प्राथमिक उपचार सामग्री उपलब्ध हो। तेज बारिश और आंधी के दौरान नौकायन से बचने की सलाह दी गई। उन्होंने सावधानी, सुरक्षा उपकरण और अनुशासन को सुरक्षित नौकायन का आधार बताया।

अगले सत्र में पंकज कुमार ने जल स्वच्छता पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि दूषित जल से हैजा, टाइफाइड, डायरिया, पेचिश और पीलिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। स्वच्छ जल की उपलब्धता और जल स्रोतों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वयंसेवकों से ‘स्वच्छ जल, स्वस्थ जीवन’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ करते हुए एनएसएस के संयोजक डॉ. आरएन चौरसिया ने कहा कि संगीत मनोरंजन के साथ मानसिक शांति, भावनात्मक अभिव्यक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक होती हैं।

कार्यक्रम में अनामिका, स्मिता, कल्पना, शिवम, सुमन, आयुष्मान, अनुष्का, अंजलि, साक्षी, अंजू, अंशु, केशव, कुणाल, मोना, राहुल, लालू, सुनील, इबरान, प्रियांशु, नेहा और निलेश समेत कई स्वयंसेवकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रशिक्षक राजू कुमार और प्रीति कुमारी ने भी गायन प्रस्तुत किया।

शिविर के आयोजन में डॉ. आरएन चौरसिया, डॉ. दिलीप कुमार झा, एसडीआरएफ प्रशिक्षक रूपेश कुमार पासवान, राजू कुमार, संतोष कुमार, पूजा कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रभु कुमार, सच्चिदानंद कुमार, मिथिलेश तिवारी, वरीय स्वयंसेवकों तथा दरभंगा सदर अस्पताल की टीम, अग्निशमन दल, बिहार पुलिस और विश्वविद्यालय गार्ड का सक्रिय सहयोग रहा।