दूर स्कूल, सहमे बच्चे, क्या दरभंगा के बिरौल में छिन जाएगा नौनिहालों से शिक्षा का अधिकार?
दूर स्कूल, सहमे बच्चे, क्या दरभंगा के बिरौल में छिन जाएगा नौनिहालों से शिक्षा का अधिकार?
दूर स्कूल, सहमे बच्चे, क्या दरभंगा के बिरौल में छिन जाएगा नौनिहालों से शिक्षा का अधिकार?
बिरौल में 18 भूमिहीन व भवन विहीन प्राथमिक विद्यालयों को दूसरे स्कूलों में टैग करने की कवायद का विरोध,अभिभावकों ने जताया आक्रोश
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
“हम बहुत छोटे हैं… सुनसान रास्ते से 2 किलोमीटर दूर पैदल जाने में डर लगता है। सरकार हमारे स्कूल को गांव में ही रहने दे, मैं पढ़-लिखकर पुलिस बनना चाहती हूं।”
पांचवीं कक्षा की छात्रा आर्या कुमारी का यह डर सिर्फ उसका अकेला नहीं है, बल्कि दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के सैकड़ों मासूम बच्चों और उनके चिंतित माता-पिता का है। शिक्षा का अधिकार कानून कागजों पर चाहे कितना भी मजबूत दिखे, लेकिन जमीन पर एक प्रशासनिक फरमान ने गांव के छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
बिरौल प्रखंड में 18 भूमिहीन और भवनविहीन प्राथमिक विद्यालयों को गांव से दूर दूसरे स्कूलों में ‘टैग’ करने की विभागीय कवायद शुरू हुई है। इस फैसले की खबर फैलते ही उछटी पंचायत के बलड़ा और कलना मुशहरी में जन-आक्रोश फूट पड़ा है।
बिरौल प्रखंड में कुल 186 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से 18 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जिनके पास अपनी जमीन और भवन नहीं है। विभाग की योजना इन स्कूलों को 2 से 2.5 किलोमीटर दूर स्थित मध्य विद्यालयों में मिलाने की है।
बलड़ा प्राथमिक विद्यालय को मध्य विद्यालय उछटी में मिलाए जाने के फैसले पर ग्रामीणों ने कड़ा ऐतराज जताया है। अभिभावकों का तर्क बिल्कुल साफ और सीधा है। प्राथमिक विद्यालय के बच्चे बेहद कम उम्र के होते हैं। रोजाना 4 से 5 किलोमीटर का आना-जाना उनके लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना जैसा है।
रास्ते सुनसान हैं और बरसात के मौसम में जलजमाव व कीचड़ की वजह से हादसे का खतरा बना रहता है।
अब तक यह विद्यालय गांव के ही पंचायत भवन में सुचारू रूप से चल रहा था, जहां बच्चों की उपस्थिति भी अच्छी थी और अभिभावक भी बेफिक्र थे।
गांव की महिलाओं और अभिभावकों का गुस्सा चरम पर है। प्रदर्शन कर रहीं सुनीता देवी और चंद्ररेखा देवी का कहना है,अगर शिक्षक और स्कूल सरकार की संपत्ति हैं, तो बच्चे हमारे गांव की धरोहर हैं। बच्चों को इतनी दूर भेजकर पढ़ाई से वंचित करने की साजिश को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
वहीं रामपुकार,रंजीत यादव और इंदल झा जैसे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय की प्रधान शिक्षिका वीणा कुमारी समेत कई शिक्षकों और ग्रामीणों ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निर्णय बदलने की गुहार लगाई है।
विरोध प्रदर्शन की सूचना पर पहुंचे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने ग्रामीणों को शांत कराया, लेकिन उनके जवाब ने सवाल को जस का तस छोड़ दिया। बीईओ का कहना है कि वे हाल ही में पदस्थापित हुए हैं और स्कूलों को टैग करने का फैसला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। जब तक भूमि का आंकड़ा और नया आदेश नहीं आता, तब तक बच्चों को टैग किए गए दूरस्थ विद्यालय में ही जाना होगा। हालांकि, उन्होंने मामले को वरीय अधिकारियों के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है।
विभाग के लिए यह सिर्फ कागजी ‘टैगिंग’ का मामला हो सकता है, लेकिन बलड़ा और कलना मुशहरी के बच्चों के लिए यह उनके स्कूल छूटने का डर है। अगर डर और दूरी के कारण नौनिहाल स्कूल जाना छोड़ देते हैं, तो इस ‘ड्रॉपआउट’ की जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल पूरे गांव की निगाहें शिक्षा विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं।
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