लोक अदालत में 662 मामलों का निपटारा, 1.04 करोड़ से अधिक का समझौता

एसीजेएम छपोलिया बोले- सुलह में ही समझदारी, यहां किसी की हार नहीं, दोनों पक्षों की जीत

बेनीपुर (दरभंगा), विधि संवाददाता। 

व्यवहार न्यायालय, बेनीपुर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के त्वरित निष्पादन का प्रभावी उदाहरण देखने को मिला। चार बेंचों पर हुई सुनवाई में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर 662 मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान कुल 1 करोड़ 4 लाख 36 हजार 82 रुपये का समझौता हुआ।

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन विशेष न्यायाधीश (उत्पाद) आनंद कुमार सिंह, अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार झा, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रौशन कुमार छपोलिया, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी रोहित कुमार गुप्ता, सिविल जज श्रेया कुशवाहा, एसडीपीओ बासुकीनाथ झा एवं कारा अधीक्षक वीरेंद्र कुमार राय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

विशेष न्यायाधीश आनंद कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को सरल, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। आपसी समझौते से मामलों के निपटारे से समाज में शांति, सौहार्द और भाईचारा कायम होता है। उन्होंने पक्षकारों से विवादों को समझौते के माध्यम से समाप्त करने की अपील की।

एसीजेएम रौशन कुमार छपोलिया ने कहा कि लोक अदालत का मूल मंत्र त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय है। उन्होंने कहा कि सुलह में ही समझदारी है। लोक अदालत में न किसी की हार होती है और न किसी की जीत, बल्कि समझौते के माध्यम से दोनों पक्ष विजयी होते हैं।

एसडीजेएम रोहित कुमार गुप्ता ने कहा कि छोटी-छोटी बातों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय आपसी बातचीत से विवाद सुलझाना बेहतर है। इससे समय और धन की बचत के साथ रिश्ते भी सुरक्षित रहते हैं।

चार बेंचों ने किया मामलों का निष्पादन

प्रथम बेंच के अध्यक्ष विशेष न्यायाधीश आनंद कुमार सिंह ने 241 मामलों में 82,95,610 रुपये का समझौता कराया। द्वितीय बेंच के अध्यक्ष एसीजेएम रौशन कुमार छपोलिया ने 38 मामलों में 1,02,000 रुपये का निपटारा कराया। इसके अलावा 244 ट्रैफिक चालानों में 4,31,300 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।

तृतीय बेंच के अध्यक्ष एसडीजेएम रोहित कुमार गुप्ता ने 29 मामलों में 34,000 रुपये का समझौता कराया, जबकि 31 ग्राम कचहरी मामलों का भी निष्पादन किया गया। चतुर्थ बेंच की अध्यक्ष सिविल जज श्रेया कुशवाहा ने 79 मामलों में 15,51,076 रुपये का समझौता कराया।

इस प्रकार लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित मामलों के निपटारे से पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली।