पोषण से मजबूत होगा भविष्य, जागरूकता से टूटेंगी भेदभाव की दीवारें ,

अलीनगर में सखी वार्ता में बाल विवाह के खिलाफ उठी आवाज, 12 लाभार्थियों को बेबी किट व अन्य सामग्री वितरित

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा 

पोषण माह के दौरान शुक्रवार को अलीनगर में महिलाओं और बालिकाओं के अधिकार, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर जोरदार तरीके से चर्चा हुई। समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय में आयोजित सखी वार्ता, बेबी किट वितरण-सह-पोषण संवेदीकरण सत्र में बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव और कुपोषण को समाज के विकास में बड़ी बाधा बताते हुए इनके खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

जिला प्रशासन एवं जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन के तत्वावधान में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण से लेकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली सरकारी योजनाओं तक की जानकारी दी गई। इस दौरान 12 लाभार्थियों को बेबी किट, फलों की टोकरी, कंबल और बधाई कार्ड प्रदान किए गए।

कम उम्र में शादी से स्वास्थ्य और भविष्य दोनों प्रभावित

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अंजू कुमारी ने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा और विकास के समान अवसर नहीं मिलने से उनका भविष्य प्रभावित होता है। बाल विवाह का कम उम्र में विवाह होने वाली बालिकाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकना केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। परिवार, जनप्रतिनिधि और समुदाय मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठाएं।

पौष्टिक भोजन को बताया स्वस्थ जीवन की कुंजी

नीतू कुमारी ने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि परिवार में खान-पान की सही आदतों को बढ़ावा देकर महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

लैंगिक विशेषज्ञ डॉली कुमारी और वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ वीरेन्द्र कुमार ने जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी अंतिम पात्र महिला तक पहुंचाना जरूरी है, तभी महिला सशक्तीकरण का उद्देश्य पूरा होगा।

कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। बताया गया कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को चिकित्सकीय सहायता, मनो-सामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया जाता है।

कार्यक्रम में आईसीडीएस कार्यालय की महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने भाग लिया। चर्चा के बाद प्रतिभागियों ने पोषण, लैंगिक समानता, बाल विवाह की रोकथाम और महिला सशक्तीकरण का संदेश घर-घर पहुंचाने का संकल्प लिया।