अपनी 7 सूत्री मांगों को लेकर बिहार के कल्याण पदाधिकारियों ने जताया विरोध, बांधी काली पट्टी
अपनी 7 सूत्री मांगों को लेकर बिहार के कल्याण पदाधिकारियों ने जताया विरोध, बांधी काली पट्टी
अपनी 7 सूत्री मांगों को लेकर बिहार के कल्याण पदाधिकारियों ने जताया विरोध, बांधी काली पट्टी
दस्तक 7 मिडिया, पटना/दरभंगा।
बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ (बिसवा / BiSSWA) के आह्वान पर शुक्रवार (11 सितंबर) को राज्य के सभी जिलों में कार्यरत कल्याण पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर कार्य निष्पादन किया। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आगे भी चरणबद्ध तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
इससे पहले 8 सितंबर 2026 को संघ के प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय मंत्री लखेन्द्र पासवान और सचिव संदीप आर. पुडकलकट्टी से मुलाकात कर 7 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा था और काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की पूर्व सूचना दी थी।प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर पर प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के लिए कार्यालय कक्ष, स्टेशनरी और नियमानुसार स्वीकृत लिपिक-सह-लेखापाल तथा डेटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
पूर्व सचिव द्वारा 388 पदाधिकारियों के विरुद्ध बिना सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के शुरू की गई विभागीय कार्रवाई को रद्द किया जाए। संघ का आरोप है कि मामूली बातों (जैसे- कैम्पस में कबूतर का घोंसला होना, बाथरूम में मग न होना या VC में टाई न पहनना) पर इंक्रीमेंट काटा गया और 20 से अधिक जिला कल्याण पदाधिकारियों का गलत तरीके से डिमोशन (पदावनति) कर दिया गया। सचिवालय में वर्षों से (3 से 25 वर्षों से) अवैध रूप से प्रतिनियुक्त 50 से अधिक पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति समाप्त की जाए। संघ का आरोप है कि इससे सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 5.4 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि हो रही है और क्षेत्रीय बल में विषमता आ रही है।
अन्य विभागों जैसे- बीडीओ,आर ओ,बीपीएलओ, डीईईओ,डीपीआरओ की तर्ज पर कल्याण पदाधिकारियों को भी टोला निरीक्षण हेतु सरकारी वाहन या यात्रा भत्ता प्रदान किया जाए, जिससे विशेषकर महिला पदाधिकारियों को हो रही परेशानी दूर हो सके। पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की भांति आवासीय विद्यालयों व छात्रावासों में स्थाई प्रबंधकों की नियुक्ति हो। तब तक के लिए सचिवालय में प्रतिनियुक्त अधिकारियों को इन पदों पर तैनात किया जाए। पद को राजपत्रित घोषित किया जाए, वेतन विसंगति दूर की जाए तथा अनुमंडल कल्याण पदाधिकारियों को पूर्व से प्रदत्त वित्तीय अधिकार लागू किए जाएं।विभागीय सचिव और क्षेत्रीय अधिकारियों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था बनाई जाए ताकि स्थानांतरण, अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश और शिशु देखभाल अवकाश जैसे मामलों पर ससमय निर्णय हो सके।
संघ के अध्यक्ष संजय कुमार और सचिव डॉ.राजीव कुमार ने कहा कि कल्याण पदाधिकारियों का यह सांकेतिक विरोध प्रदर्शन उनकी न्यायसंगत मांगों को लेकर है और यदि सरकार शीघ्र संज्ञान नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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