बिहार में शराबबंदी की पोल खोलती तस्वीरें सीमा पार से गांव तक का नेटवर्क, पुलिस चेक पोस्ट लाचार या मददगार? जिला पदाधिकारी कौशल कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक का शख्त निर्देश।
दस्तक 7 मीडिया ,दरभंगा से संजय कुमार राय ,बिरौल से उत्तम सेन गुप्ता और कुशेश्वरस्थान से प्रशांत कुमार की रिपार्ट
बिहार में शराब बंदी हे ,लेकिन हर मुहल्ले गली में शराब धड़ल्ले से बिक रहा हे ,कई थानाध्यक्ष इसे गंभीरता से लेते हुये कारवाई करते हे ,लेकिन कई थानाध्यक्ष ऐसे भी हे जो इसे कमाई का जरिया बना लिये हे और अप्रत्यक्ष रूप से भारी भरकम कमाई करते हे ।बीते दिनों दरभंगा के सीमावर्ती जिले गायघाट और बेनीबाद थाना क्षेत्रों में मद्य निषेध विभाग की टीम ने तकरीबन एक करोड़ के लगभग मूल्य के शराब को पकड़ा हे ,दरभंगा जिला में जमालपुर थाने की पुलिस ने कई लाख का शराब बरामद किया हे ,कुछ दिन पहले बहेड़ी थाना क्षेत्र में मद्य निषेध विभाग की टीम ने शराब पकड़ा ,विशनपुर थाना क्षेत्र में भी शराब पकड़ा गया ,कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र में भी भारी मात्रा में शराब पुलिस ने पकड़ी ,वहीं मनीगाछी थाना अध्यक्ष ने चर्चित बाहुबली इलाकों में दो महीने के भीतर कई बार शराब पकड़कर शराब माफियाओं की कमर तोड़ी ,लेकिन कई ऐसे थानाध्यक्ष हे जो इस मामले में सुस्त हे।बिहार के बॉर्डर पार से दरभंगा जिला में ज्यादातर शराब बेनीबाद की ओर से या तो एन एच के सहारे निकलती हे या फिर दरभंगा जिला आने के लिये बेनीबाद के एनएच से मोरों थाने के रास्ते विशनपुर निकलती हे और दरभंगा के कई थाना क्षेत्रों में यह शराब उतरती हे और बंट जाती हे ,इस कारण होम डिलीवरी का कारोबार फलता फूलता हे।सूत्र बताते हे कि मोरों थाना क्षेत्र में गुरकी शराब भारी मात्रा में बनता हे,इस रास्ते विदेशी शराब की भारी मात्रा में आवाजाही होती हे ,लेकिन शराब बरामदगी नहीं के बराबर ,मद्य निषेध विभाग के सूत्र बताते हे कि इस रास्ते पर पुलिस की निगरानी ठीक से हो तो शराब के आवाजाही पर विराम लग सकता हे।समस्तीपुर और दरभंगा के सीमावर्ती इलाकों में धड़ल्ले से शराब की बिक्री होती हे इसका प्रभाव बहेड़ी थाना क्षेत्र पर भी हे ,इस क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होम डिलीवरी होती हे ,इसी तरह और भी थाने हे ?मधुबनी जिले के दरभंगा से लगती थाने जाले ,केवटी ,कमतौल आदि का भी यही हाल हे।अगर थानाध्यक्ष इस मामले में सख्ती बरतें और मद्य निषेध विभाग से तालमेल कर कारवाई करें तो बहुत हद तक इस धंधे पर विराम लग सकता हे।
बिहार के सीमावर्ती इलाकों या चेक पोस्ट पर मद्य निषेध विभाग की कारवाई हो तो शायद बिहार में शराब की एक ट्रक भी नहीं घुस पाएगी।सवाल यही हे कि इस मामले में दोषी कौन ?
जिला पदाधिकारी कौशल कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक के शख्त निर्देश पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से लगातार भारी मात्रा में बरामद हो रहा हे शराब का जखीरा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बिहार में शराब बंदी कानून को ठेंगा दिखाने का यह खेल बिना किसी ‘सिंडिकेट’ के संभव नहीं है। चेकपोस्टों पर तैनात पुलिस बल और उत्पाद विभाग की निगरानी को धत्ता बताकर इतनी बड़ी खेप जिले की सीमाओं के भीतर दाखिल कैसे हो रही है? यह सवाल अब पूरी व्यवस्था की कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जानकार सूत्रों के अनुसार जिला पदाधिकारी कौशल कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख और सख्त निर्देशों के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। डीएम की हिदायत के बाद उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस एकाएक सक्रिय हुई, जिसके नतीजे के तौर पर पिछले दो दिनों में लाखों रुपये की अवैध शराब बरामद की गई है। हालांकि,यह तात्कालिक कार्रवाई उस मूलभूत सवाल को दबा नहीं सकती कि जब तक ऊपर से दबाव नहीं बनता,तब तक सीमावर्ती चेकपोस्टों से यह जखीरा बेरोक-टोक कैसे पार होता रहता है? क्या चेकपोस्टों पर तैनात कर्मियों की मिलीभगत है या फिर सहयोग ?
