सरकारी राशन हजम करने वाले डीलर पर एफआईआर, लाइसेंस रद्द, सालभर बाद हुई कार्रवाई से उठे सवाल, 78.35 क्विंटल अनाज का नहीं मिला हिसाब
सरकारी राशन हजम करने वाले डीलर पर एफआईआर, लाइसेंस रद्द, सालभर बाद हुई कार्रवाई से उठे सवाल, 78.35 क्विंटल अनाज का नहीं मिला हिसाब
सरकारी राशन हजम करने वाले डीलर पर एफआईआर, लाइसेंस रद्द,
सालभर बाद हुई कार्रवाई से उठे सवाल, 78.35 क्विंटल अनाज का नहीं मिला हिसाब
दस्तक 7 मीडिया /हनुमाननगर
गरीबों को मिलने वाले सरकारी राशन की कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद सिनुआरा पंचायत के जन वितरण प्रणाली विक्रेता अरुण कुमार पासवान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने उनकी पीडीएस अनुज्ञप्ति भी रद्द कर दी है। डीलर के गोदाम की जांच में 27.97 क्विंटल गेहूं और 50.38 क्विंटल चावल, कुल 78.35 क्विंटल सरकारी अनाज कम पाया गया। इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का हिसाब नहीं मिलने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
मामले में एपीएम थाना में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी मुरारी प्रसाद सिंह के आवेदन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सितंबर 2025 में ही सामने आ गई थी गड़बड़ी
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि अनाज के स्टॉक में भारी अंतर करीब एक साल पहले ही सामने आ गया था। 6 सितंबर 2025 को हुई जांच के दौरान दुकान के स्टॉक में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इसके बाद जांच रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी, सदर दरभंगा को भेजी गई थी। डीलर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
बताया जाता है कि डीलर ने अपने बचाव में स्पष्टीकरण दिया, लेकिन प्रशासन ने उसे संतोषजनक नहीं माना। इसके बावजूद अनुज्ञप्ति संख्या 03/2016 को रद्द करने और प्राथमिकी की कार्रवाई में करीब एक साल लग गया। अनुमंडल पदाधिकारी के ज्ञापांक-2191, दिनांक 1 सितंबर 2026 के आदेश के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई।
कार्रवाई में देरी पर ग्रामीणों में आक्रोश
सरकारी अनाज में इतनी बड़ी कमी मिलने के बावजूद कार्रवाई में हुए विलंब को लेकर ग्रामीणों और राशन लाभुकों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सितंबर 2025 में ही गड़बड़ी पकड़ में आ गई थी, तो प्राथमिकी और लाइसेंस रद्द करने में इतना लंबा समय क्यों लगा?
लाभुकों का सवाल है कि जांच के बाद कार्रवाई लंबित रहने के दौरान आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले की निगरानी कैसे की। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सरकारी अनाज की कथित कालाबाजारी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की है।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
एपीएम थानाध्यक्ष सह अनुसंधानकर्ता के अनुसार, आपूर्ति पदाधिकारी के आवेदन पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि गोदाम से गायब हुआ सरकारी अनाज कहां गया और इस पूरे मामले में केवल डीलर की भूमिका थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।
78.35 क्विंटल सरकारी अनाज की कमी ने जन वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि गरीबों के हक का अनाज किस स्तर पर गायब हुआ।
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