दरभंगा से संजय राय की रिपोर्ट

जयनगर के एसडीपीओ ने जिसे बेगुनाह बताया वह शराब का बड़ा तस्कर निकला। यह हम नहीं उस तस्कर का नेपाली लाइसेंस बता रहा हैं ?

यह लाइसेंस नन्द कुमार गोइत का हैं जो नेपाल से निर्गत हैं।

दस्तक 7 ने कल की खबरों मे कहा था कि सबूत के साथ इस मामले का उदभेदन करेंगे सो हमने कर दिया हैं।

अब पुलिस के आलाधिकारी को निर्णय लेना हैं कि आखिर उनके मातहत काम करने वाले पुलिस अधिकारियों की क्या यही कार्यशैली हैं ,अगर यही कार्यशैली हैं तो कारवाई क्यू नहीं ?
शराब बंदी के मामले मे बिहार सरकार शख्त हैं ,यह बात अक्सर नेताओं के बयानबाजी या अखबार के पन्नों पर दिखाई पड़ती हैं लेकिन सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के साथ कई पुलिस अधिकारी किस तरह का खेल ,खेल रहें हैं इसका अंदाजा विभाग के आला अधिकारियों को भी हैं लेकिन मामला उजागर होने के बाद भी आलाधिकारी गंभीर नहीं हैं। अगर पुलिस के आलाधिकारी गंभीर होते तो जयनगर एसडीपीओ पर कारवाई होने से कोई रोक नहीं सकता था।
जयनगर थाने मे दर्ज कांड (482/22)के मामले मे जयनगर एसडीपीओ द्वारा जिस तीन आरोपी को बेगुनाह बताते हुये अनुसंधान मे रख लिया गया था उस आरोपी के बारे मे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
वह ऐसा आरोपी हैं जिसे माफ तो कतई नहीं किया जा सकता।
बिहार मे सरकार ने शराब बंदी की और यह आरोपी पूरे बिहार मे शराब को धड़ल्ले से बेचना शुरू कर दिया,इतना ही नहीं बिहार मे शराब बेचकर इतना पैसा कमाया जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे।और ऐसे आरोपी को एसडीपीओ द्वारा बेगुनाह बताना अपने आप मे बड़ा प्रश्न हैं।
इस प्राथमिकी मे दर्ज नामजद नन्द कुमार गोइत नेपाल के धनुषा जिला के फलवडीया ,जनकनन्दिनी 1 के स्थायी रहने वाला हैं।
इनके दुकान का नाम भगवती कोस्ट स्टोर्स हैं। इन्हें मदिरा वितरक का लाइसेंस प्राप्त हैं ,इस लाइसेंस के तहत नेपाल मे मदिरा बेच सकते हैं। लेकिन इन्होंने जयनगर अनुमंडल मे एक कपड़े की दुकान खोलकर वहां से पूरे बिहार मे नेपाल निर्मित शराब का बिक्री करने लगे। यह शराब गौरव सोफी नेपाली शराब के नाम से चर्चित हैं।
बिहार मे जब इस शराब को पुलिस पकड़ती हैं तो सोफिया नेपाली शराब बरामद होने की बात कहती हैं या और इसी नाम से चर्चित हैं।
यहां बता दे कि जयनगर एसडीपीओ ने चार दिसंबर 22को 11.45बजे गुप्त सूचना के आधार पर जयनगर कमला पुल के निकट से दस -ग्यारह मोटरसाइकिल को शराब के साथ पकड़ी थी लेकिन उसपर सवार सभी चालक पुलिस को देखते ही फरार हो गया था। एसडीपीओ के निर्देश पर थाना पुलिस ने इस मामले मे (482/22)मामला दर्ज किया था। इस मामले मे पुअनि धीरेन्द्र सिंह के ब्यान पर प्राथमिकी अभियुक्त नन्द कुमार गोइत पेसर ना मालूम ,नवीन गोइत एवं सुनील गोइत पिता नन्द कुमार गोइत ,उपेंद्र यादव पे उतिम यादव ,खन्ना मुखिया ,रोशन मुखिया दोनो पेसर गुदड़ी मुखिया तीनों साकिन कोरहिया ,लाल कुमार यादव पेसर राम चंद्र यादव साकिन डोरवार थाना जयनगर हैं इसके अलावे चार पांच अज्ञात के विरुद्ध जब्ती सूची बनाते हुये पुलिस ने सभी को नामजद किया था,इसके अलावे जब्ती सूची मे करीब दस ,ग्यारह मोटरसाइकिल हैं।
अब ऐसे माफिया को एसडीपीओ के पर्यवेक्षण मे यह कह देना कि व्यापारिक द्वेष के कारण एवं प्रति स्पर्धा एवं राजनीति के कारण उनके विरोधी द्वारा पिता नन्द किशोर गोइत और उनके दोनों बेटे नवीन गोइत और सुनील गोइत को एक साजिश के तहत कांड मे नाम दे दिया गया हैं ,इन तीनों का खराब चरित्र नहीं हैं और कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हैं इसीलिये सभी बेगुनाह हैं ,यही नहीं इस मामले मे पिता पुत्र सभी को अनुसंधान मे रखकर भरपूर तरीके से बचाने का प्रयास किया लेकिन मधुबनी के एसपी को इस बात का पता चल गया कि ये तीनों बाप बेटा शराब माफिया हैं और उन्होंने एसडीपीओ के पर्यवेक्षण टिप्पणी को सीधे पलटते हुये पूरे मामले को सत्य करार देते हुये अनुसंधानकर्ता को गिरफ्तारी का आदेश दे दिया। अब बाप बेटे अपना कपड़े का दुकान बंद कर फरार हैं।
अब ऐसे मे प्रश्न उठना लाजमी हैं कि जयनगर एसडीपीओ को आखिर यह बात क्यों पता नहीं लगी कि नन्द कुमार गोइत एक शराब कारोबारी हैं ?जयनगर का बच्चा भी कह रहा हैं कि वह नेपाल का मूल निवासी हैं और जयनगर मे कपड़े का दुकान खोलकर बिहार के कई भागों मे यहां से शराब बेचता हैं। इस कारण बिहार के हजारों बच्चे इस कारोबार मे संलिप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर रहें हैं ?इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद यह भी प्रश्न उठता हैं कि आखिर ऐसा कौन सा कारण हैं कि एसडीपीओ ने बाप बेटे को बेगुनाह बता दिया। इसके आड़ मे कहीं बड़ा खेल बेल तो नहीं। सरकार या पुलिस मुख्यालय को भी इस मामले मे संज्ञान लेकर जांच कराना चाहिये कि ऐसा कौन सा कारण बना कि एसडीपीओ ने शराब माफिया को क्लीन चिट दे दिया।स्थानीय लोंगों का कहना कि इस कारोबार से ये शराब माफिया कम दिनों मे कई करोड़ की सम्पति अर्जित की हैं और पुलिस की मिली भगत से कई वर्षों तक इसका कारोबार फलता फूलता रहा ,इस कारण इसपर एक भी प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई। लेकिन एसडीपीओ के पर्यवेक्षण टिप्पणी के बाद एसपी ने इसका अवलोकन कर बिंदु बार जांच की तो उन्हें पता चल गया कि बाप बेटे शराब कारोबारी हैं और उन्होंने एसडीपीओ के प्रतिवेदन को दरकिनार करते हुये मामले को सत्य करार दे दिया। अब सभी फरार हैं। इस कारवाई से बिहार के कई बच्चे अब दलदल मे फंसने से बच गये हैं।

वहीं दूसरी तरफ बता दे कि शराब कारोबार मे संलिप्त नन्द कुमार गोइत के बारे मे बताया जा रहा हैं कि नेपाल बॉर्डर से पहले एसएसबी केम्प के पास बलडीहा मे तीन मंजिला इमारत भी हैं और ठीक 500मीटर आगे जानें के बाद यानि नेपाल मे इसका शराब का दुकान हैं जहां नेपाली चौकी भी हैं।मतलब श्री गोइत नेपाल मे शराब की दुकान करते हुये बिहार मे अपना ठिकाना बनाया और जयनगर मे सफेदपोस बनने के लिये कपड़ा का दुकान किराए पर लेकर दुकान खोल दिया जब्कि शराब का स्टोक बलडीहा स्थित अपने तीन मंजिला मकान मे रखता था।सूत्रों का कहना हैं कि एसडीपीओ द्वारा जिस वक्त इस मामले मे कारवाई की गई थी उसी वक्त उसके मकान पर छापेमारी करती तो भारी मात्रा मे शराब की बरामदगी होती।

इधर सूत्रों का कहना हैं कि जयनगर थाने मे दर्ज कांड के आलोक मे एसडीपीओ द्वारा जो पर्यवेक्षण टिप्पणी निकाली गई हैं उसमें जो स्वतंत्र साक्षी का गवाह लिया गया हैं वह कोई और नहीं सुनील गोइत के ससुराल के लोग हैं जो रिश्ते मे सुनील का साला हैं ,मतलब इन तीनों यानि बाप बेटे का संबंधी हैं।लेकिन एसपी के पारखी नजर से कोई भी बच नहीं सका और तीनों बाप बेटे फिर से इस कांड के आरोपी हो गये।एसडीपीओ के पर्यवेक्षण रिपोर्ट को एसपी की सूक्ष्म नजर ने पलट दिया।यहां बता दे कि भूषण प्रसाद के शिकायत के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर एसडीपीओ जयनगर के विरुद्ध मधुबनी जिला के मुख्यालय डीएसपी जांच कर रहें हैं।