सकरी-हसनपुर रेल लाइन, तीन साल बाद भी अधूरा सपना, आखिर कब पटरियों पर दौड़ेगी लंबी दूरी की ट्रेनें?

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।


तीन वर्ष पूर्व जब सकरी-हसनपुर रेलवे ट्रैक पर सिग्नलिंग और विद्युतीकरण का कार्य शुरू हुआ था, तब क्षेत्र के लाखों लोगों के चेहरे खिल उठे थे। दशकों पुराने इंतजार को जल्द पंख मिलने की उम्मीद जगी थी कि अब इस रेलखंड पर न केवल ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी, बल्कि लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन भी शुरू हो जाएगा। रेलवे विभाग द्वारा सकरी से लेकर हरनगर तक बिजली से ट्रेनें चलाने के लिए विद्युतीकरण का कार्य भी सफलता से पूरा कर लिया गया। लेकिन अफसोस, तमाम तैयारियों और घोषणाओं के बावजूद आज तक सकरी-हसनपुर रेलखंड पर ट्रेनों का पूर्ण परिचालन शुरू नहीं हो सका।
क्षेत्र की जनता अब रेलवे प्रशासन और सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि जब केंद्र और बिहार राज्य दोनों जगह एनडीए की ही ‘डबल इंजन’ सरकार है, तो फिर इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका और परियोजना को पूरा करने में देर किस बात की हो रही है?
सकरी से हरनगर तक पोल और तार गाड़ दिए गए, विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ, फिर भी इसे हसनपुर तक जोड़कर ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने में शासन-प्रशासन क्यों नाकाम साबित हो रहा है? इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे से जुड़ी इस इतनी महत्वपूर्ण योजना की अड़चनों को दूर कराने में उनकी दिलचस्पी क्यों गायब है? सकरी-हसनपुर रेल परियोजना इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की लाइफलाइन मानी जाती है। इसके पूर्ण होने से समस्तीपुर, दरभंगा और आसपास के जिलों के व्यापारियों, छात्रों, मरीजों और आम यात्रियों को सुगम व सस्ता यातायात साधन मिलता। परंतु, आधी-अधूरी तैयारी और उदासीन रवैये के कारण अरबों रुपये की यह सरकारी योजना आज धूल फांक रही है।
दस लाख की आबादी का स्पष्ट कहना है कि सरकार और रेल मंत्रालय को इस परियोजना में आ रही प्रशासनिक, भूमि या तकनीकी अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करना चाहिए। महज आश्वासन देने के बजाय पटरियों पर जल्द से जल्द सवारी और एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके और राजस्व का नुकसान भी रुके।