बिहार में बाढ़ का कहर: 13 जिलों की 34 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में बाढ़ का कहर: 13 जिलों की 34 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में बाढ़ का कहर: 13 जिलों की 34 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
दस्तक 7मीडिया /पटना
बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के उफान पर होने से राज्य के 13 जिलों की करीब 34.31 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। 79 प्रखंडों की 480 पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया था, जो वर्ष 2016 के उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब पांच सेंटीमीटर अधिक है। गंगा के इस रौद्र रूप से पटना के निचले इलाकों के साथ-साथ दियारा क्षेत्रों में पानी फैल गया। भागलपुर के सुल्तानगंज में भी गंगा ने पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर लिया है।
कई नदियां उफान पर
गंगा के अलावा गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। हालांकि कुछ इलाकों में जलस्तर स्थिर होने अथवा मामूली कमी के संकेत भी मिल रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
पटना से भागलपुर तक संकट
बाढ़ का असर पटना, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, बेगूसराय, लखीसराय, वैशाली, भोजपुर और समस्तीपुर समेत कई जिलों में देखने को मिल रहा है। भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में बाढ़ के पानी के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। कई गांवों का मुख्य सड़क और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है।
पटना के दियारा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ा दी है।
राहत-बचाव में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। सरकार की ओर से बड़ी संख्या में नावों की तैनाती की गई है। राहत शिविर और सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं, जहां प्रभावित लोगों के लिए भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों से बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। पशुओं के लिए भी चारे और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
फसलें डूबीं, किसानों की बढ़ी चिंता
बाढ़ के कारण हजारों हेक्टेयर में लगी फसलें पानी में डूब गई हैं। खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण धान, मक्का, सब्जी समेत खरीफ की फसलों को भारी नुकसान की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती पर निर्भर परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा होने लगा है।
डूबने से मौतों ने बढ़ाई चिंता
बाढ़ के बीच डूबने की घटनाओं में लोगों की जान जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। पटना जिले के दानापुर और मनेर में ही डूबने से पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
हालांकि राज्यभर में अब तक बाढ़ से हुई मौतों के आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताए जा रहे हैं, इसलिए मृतकों की कुल संख्या की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रभावित लोगों तक समय पर भोजन, पेयजल, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने तथा तटबंधों की लगातार निगरानी करने को कहा है।
सरकार और जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम और नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट रखा गया है।
फिलहाल बिहार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, राहत सामग्री पहुंचाना और जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में निचले इलाकों को समय रहते खाली कराना है।