बिहार शराबबंदी कानून, सीमा पार से गांव तक का नेटवर्क, पुलिस चेक पोस्ट लाचार या मददगार? दरभंगावासियों ने वरीय अधिकारियों से मांगे तीखे जवाब
बिहार शराबबंदी कानून, सीमा पार से गांव तक का नेटवर्क, पुलिस चेक पोस्ट लाचार या मददगार? दरभंगावासियों ने वरीय अधिकारियों से मांगे तीखे जवाब
बिहार शराबबंदी कानून, सीमा पार से गांव तक का नेटवर्क, पुलिस चेक पोस्ट लाचार या मददगार? दरभंगावासियों ने वरीय अधिकारियों से मांगे तीखे जवाब
दस्तक 7 मिडिया, दरभंगा।
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन धरातल पर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। दरभंगा जिले के गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों और कानून का पालन करने वाले समाज सेवी लोगों ने उत्पाद विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राज्य की सीमाओं पर कड़े सुरक्षा घेरे और चेक पोस्ट बनाए गए हैं, तो फिर पड़ोसी राज्यों से शराब का भारी जखीरा (कंटेनर, ट्रक और गुप्त तहखानों के जरिए) ग्रामीण इलाकों तक कैसे पहुंच रहा है? दरभंगा के जागरूक नागरिकों का कहना है कि शराबबंदी के इस पूरे तंत्र में केवल एकतरफा कार्रवाई देखने को मिल रही है। पुलिस और उत्पाद विभाग की पूरी कार्रवाई केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शराब का सेवन करने वाले आम लोगों या छोटे-मोटे घुमंतू धंधेबाजों तक ही सीमित रह गई है। एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा पार कर, दर्जनों चेक पोस्ट और पुलिस थानों के सामने से गुजरते हुए शराब की बड़ी खेप ग्रामीण इलाकों के गोदामों तक कैसे पहुंच जाती है? क्या यह बिना किसी मिलीभगत के संभव है? शराब बेचने और पीने वाले छोटे-मोटे लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजना आसान है, लेकिन उस पूरी सप्लाई चेन के आकाओं (शराब माफियाओं) पर शिकंजा कसने में विभाग सुस्त क्यों रहता है? जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई शून्य क्यों? जिस चेक पोस्ट और थाना क्षेत्र की सीमा से शराब का ट्रक गुजरता है, वहां पदस्थापित पुलिस अधिकारियों और उत्पाद विभाग के कर्मियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जाती? आखिर चूक के लिए जिम्मेदार कर्मियों पर सीधी विभागीय या आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं होती?
दरभंगा वासियों का स्पष्ट मानना है कि अगर शराबबंदी कानून को उसकी सही भावना के साथ लागू करना है, तो कार्रवाई का रुख “नीचे से ऊपर” की बजाय “ऊपर से नीचे” करना होगा। जब तक सीमावर्ती चेक पोस्टों पर तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और उनके खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ग्रामीण इलाकों में शराब की अवैध तस्करी को रोक पाना नामुमकिन है। विभाग के वरीय अधिकारियों को इन बुनियादी सवालों का संज्ञान लेते हुए अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, ताकि कानून का डर सिर्फ आम नागरिकों में ही नहीं, बल्कि तस्करी कराने में उनके सहायकों में भी पैदा हो सके।
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