नगर परिषद के दर्जे की उठी पुरजोर मांग, नगर पंचायत बिरौल को विस्तारित करने के लिए बैठकों का दौर जारी
नगर परिषद के दर्जे की उठी पुरजोर मांग, नगर पंचायत बिरौल को विस्तारित करने के लिए बैठकों का दौर जारी
नगर परिषद के दर्जे की उठी पुरजोर मांग, नगर पंचायत बिरौल को विस्तारित करने के लिए बैठकों का दौर जारी
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
अनुमंडल मुख्यालय से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगर पंचायत बिरौल को अब विस्तारित कर नगर परिषद का दर्जा दिलाने की मांग ने तूल पकड़ लिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल को धरातल पर उतारने के लिए विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर बैठकों का सिलसिला तेज हो गया है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र के संतुलित और वास्तविक विकास के लिए आवाज मुखर की जा रही है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की हालिया बैठकों में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि पूर्व में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा तैयार किए गए परिसीमन प्रस्ताव को ही यथावत लागू रखा जाए। वक्ताओं का मानना है कि पहले से निर्धारित परिसीमन क्षेत्र के भौगोलिक और ढांचागत विकास के दृष्टिकोण से सबसे उपयुक्त और तर्कसंगत है। बैठक के दौरान आनन-फानन में तैयार किए गए मौजूदा परिसीमन पर गहरी आपत्ति जताई गई। इसमें मुख्य रूप से नगर पंचायत बिरौल के अधीन शामिल किए गए भरही, उसरार और बगाही गांवों का मुद्दा छाया रहा। स्थानीय लोगों का तर्क है कि 100% कृषि क्षेत्र भरही, उसरार और बगाही पूरी तरह से कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्र हैं। इन शत-प्रतिशत कृषि आधारित क्षेत्रों को नगर पंचायत के शहरी ढांचे से मुक्त कर निकटतम ग्रामीण पंचायतों के साथ जोड़ा जाए। शहरीकरण के मानकों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि शुद्ध रूप से खेती-किसानी पर निर्भर क्षेत्रों को अनावश्यक रूप से शहरी सीमा में बांधने से वहां के किसानों को नुकसान हो रहा है, जबकि नगर परिषद का वास्तविक लाभ उन व्यावसायिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को मिलना चाहिए जो इसके योग्य हैं। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व के परिसीमन के आधार पर बिरौल को नगर परिषद बनाने और कृषि क्षेत्रों को अलग करने के लिए उनका प्रयास जारी रहेगा।
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