बेनीपुर अनुमंडल के विस्तार और तीन विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग को लेकर दिया ज्ञापन :सुशील चौधरी 

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

राजकीय अतिथि गृह परिसर में रविवार को जनता दल (यू) की ओर से आयोजित कार्यकर्ता संवाद सह सम्मान समारोह में बेनीपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एवं जदयू विधि प्रकोष्ठ के पूर्व जिलाध्यक्ष अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा का मिथिला पाग, दोपट्टा एवं पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत किया।

इस दौरान अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने बेनीपुर एवं बिरौल की करीब 18 लाख आबादी से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर संजय कुमार झा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बेनीपुर अनुमंडल के क्षेत्र विस्तार के साथ तीन विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

अधिवक्ता चौधरी ने कहा कि बेनीपुर अनुमंडल में वर्तमान में बेनीपुर और अलीनगर ही दो प्रखंड हैं। जबकि मनीगाछी, बहेरी और तारडीह का राजस्व प्रशासन दरभंगा सदर अनुमंडल में है, लेकिन पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था बेनीपुर से जुड़ी है। इससे लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। वहीं, घनश्यामपुर भौगोलिक रूप से बेनीपुर के निकट है, लेकिन वह बिरौल अनुमंडल में है।

उन्होंने घनश्यामपुर, मनीगाछी, बहेरी और तारडीह को बेनीपुर अनुमंडल में शामिल करने की मांग की। उनका कहना है कि बेनीपुर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से चार सुसज्जित न्यायालय कक्ष, अभिलेखागार, बार कक्ष और न्यायिक आवास का निर्माण कराया गया है, लेकिन इन संसाधनों का पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो रहा है।

18 लाख लोगों को दूर जाना पड़ता है

ज्ञापन में बेनीपुर में परिवार न्यायालय, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय और पॉक्सो विशेष न्यायालय स्थापित करने की मांग भी की गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि फिलहाल बेनीपुर और बिरौल अनुमंडल से संबंधित इन मामलों की सुनवाई दरभंगा सदर स्थित व्यवहार न्यायालय में होती है। इससे दोनों अनुमंडलों की करीब 18 लाख आबादी, विशेषकर गरीब, महिला, दलित और ग्रामीण लोगों को न्याय के लिए 80 से 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है।

अधिवक्ता चौधरी ने बेनीपुर और बिरौल अनुमंडलों को एकीकृत कर बेनीपुर न्यायालय परिसर में ही इन तीनों विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मांग परिवार न्यायालय अधिनियम, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 39ए तथा सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित फैसले की भावना के अनुरूप है।

कार्यक्रम में बेनीपुर बार एसोसिएशन के कई अधिवक्ता मौजूद रहे।