संजय कुमार राय की रिपोर्ट
दरभंगा ;मधुबनी जिले के जयनगर एसडीपीओ के कई अनसुलझे किस्से हैं ,और इस किस्से से जिले के सभी वरीय अधिकारी अवगत हैं इसके बावजूद भी किसी भी आलाधिकारियों ने इनके विरुद्ध एक भी प्रतिवेदन सरकार को नहीं भेजा हैं ?
जयनगर के भूषण प्रसाद ने एसडीपीओ के कई पर्यवेक्षण टिप्पणी को भी साक्ष्य के रूप मे अपने तार्किक अंदाज मे मधुबनी के डीएसपी प्रभाकर तिवारी को दिया हैं ,जिसमें वह बता रहें हैं कि कैसे कैसे जयनगर एसडीपीओ ने शराब माफियाओं से तालमेल कर ऐसे गलत कार्यों को अंजाम दिया हैं। जिसमें इनके बॉडीगार्ड पंचम कुमार की भूमिका भी अव्वल हैं।जिसका एक ऑडियो भी वायरल हैं।
अब ऐसे मे जब शराब कारोबार से जुड़े मामले सामने आ जाय ?ऐसे मे सवाल उठना लाजमी हैं कि पदाधिकारी लेन देंन मे भी शरीक थे क्या ?अगर ऐसा नहीं हैं तो मधुबनी एसपी के जानकारी मे यह बात होते हुये भी उन्होंने एसडीपीओ के विरुद्ध सरकार को पत्र क्यू नहीं भेजा था ?ऐसा इसीलिये हम कह रहें हैं कि मधुबनी एसपी ने जयनगर के एक मामले मे वैसे सभी शराब माफियाओं पर कांड को सत्य करार दिया हैं जिसे एसडीपीओ ने यह कहते हुये उसे बचाने की कोशिश की हैं यह व्यक्ति बेगुनाह हैं ,जब्कि बेगुनाह व्यक्ति शराब कारोबारी हैं। यह भी एक जांच का पहलू हैं लेकिन जांच करेगा कौन ?
सवाल यही हैं कि जब मुख्यालय के कई आदेश निर्देश को जिले के आलाधिकारी लीपा पोती कर प्रतिवेदन भेज देते हैं ,और बिहार पुलिस मुख्यालय को गुमराह कर देते हैं तो और मामले मे बात करना भी बेईमानी हैं।
जिले मे तैनात डीएसपी से लेकर एसपी तक के कार्यशैली बदली हुई हैं,सभी पदाधिकारी अपने कार्यालयों मे बैठकर पर्यवेक्षण टिप्पणी निकालते हैं ?कार्यालय मे दोनों पक्षों को बारी बारी से बुलाकर गवाही लेते हैं ,और दोनों पक्षों से बात कर एक पक्ष से भारी भरकम रकम लेकर मामले को इति श्री कर दी जाती हैं ?अब इस लेन देंन का कोई सबूत तो होता नहीं हैं ?हाँ उनके द्वारा किये गये पर्यवेक्षण के बाद सच्चाई का पता जरूर चल जाता हैं अगर आप बारीकी से मामले की जांच करेंगे तो सबूत भी मिलेंगे और सच्चाई भी सामने आयेगी।
जी हम बात कर रहें हैं जयनगर थाना मे दर्ज कांड 482/22के मामले मे। यह शराब से जुड़ा हुआ मामला था और इस मामले मे एसडीपीओ जयनगर ने अपने पर्यवेक्षण टिप्पणी मे जिसे बेगुनाह व्यक्ति बताया हैं दरअसल वह शराब कारोबारी हैं। इस मामले को एसडीपीओ की और से ऐसे शराब कारोबारी को बेगुनाह बता दिया गया जैसे जयनगर अनुमंडल का वह महात्मा हो ?मजेदार बात तो यह हैं कि शराब मामले मे जीतने भी नाम प्राथमिकी मे आयें थे उसे किसी और ने नहीं एसडीपीओ विप्लव कुमार ने ही नामों का पता कर प्राथमिकी मे नामजद कराया था । गुप्त सूचना के आधार पर करीब दस या ग्यारह मोटरसाइकिल को एसडीपीओ विप्लव कुमार ने एक साथ पकड़ा था ,उस मोटरसाइकिल पर गौरव सोफी नेपाली शराब लदा हुआ था और सभी कारोबार करने वाले भाग गये थे।एसडीपीओ के आदेश पर ही थाने मे नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी जिसमें करीब आधा दर्जन लोग नामजद एवं चार पांच अज्ञात थे।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पर्यवेक्षण मे कैसे शराब माफिया को उन्होंने बेगुनाह कर दिया यह कहते हुये कि व्यापारिक द्वेष के कारण एवं प्रतिस्पर्घा एवं ग्रामीण राजनीति के कारण उनके विरोधी लोंगों के द्वारा पिता एवं दोनों पुत्र को एक साजिश के तहत कांड मे नाम दे दिया गया हैं ,इन तीनों का खराब चरित्र और कोई भी आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं इसीलिये ये बेगुनाह हैं। इन्होंने बाद मे अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया था कि तीनों पिता पुत्र के विरुद्ध गहराई से संलिप्तता की जांच करें,जब्कि इस बाप बेटे का नाम उन्होंने ही थाना पुलिस को बताया था और प्राथमिकी दर्ज हुई थी । इस तरह शब्दों का हेर फेरकर एसडीपीओ ने अपना पर्यवेक्षण टिप्पणी निकाल दिया था ।
अब यही प्रश्न हैं कि जब एसडीपीओ ने शराब कारोबार मे संलिप्त लोंगों पर नामजद एफआईआर किया फिर इसे राहत देने का क्या अर्थ हो सकता हैं ?लेकिन मधुबनी के एसपी ने हटाए गये पिता पुत्र का नाम अपने पर्यवेक्षण टिप्पणी मे लाया और सभी के विरुद्ध इस मामले को सत्य करार दे दिया। अब ये तीनों पिता पुत्र जयनगर से फरार हैं ,फरार भी क्यू नहीं हो ?जयनगर समेत नेपाल के सभी आदमी जानते हैं कि यह शराब कारोबारी हैं। जिस तिथि को एसडीपीओ द्वारा ग्यारह मोटरसाइकिल को शराब से लदा पकड़ा गया था उस तिथि मे सभी दैनिक अखबारों ने भी खबर छपी थी। बताया गया था कि सभी मोटरसाइकिल सवार पुलिस को देखते ही मोटरसाइकिल छोड़कर फरार हो गया था और पुलिस ने नाम चिन्हित कर थाने मे प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
कल सबूत के साथ दस्तक 7की रिपोर्ट पढ़िये। तीनों बाप बेटा शराब कारोबार मे संलिप्त हैं या फिर जयनगर मे कपड़ा दुकान चलाता हैं।एसपी को पता चल जाता हैं कि बाप बेटे शराब कारोबारी हैं लेकिन एसडीपीओ को यह बात कैसे पता नहीं चला यह भी गंभीर विषय हैं?एसडीपीओ और एसपी के पर्यवेक्षण टिप्पणी से तो यही पता चलता हैं।

