सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को कड़ी फटकार, कहा -CAPF अधिकारियों का करियर क्यों रोक रहे?
सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को कड़ी फटकार, कहा -CAPF अधिकारियों का करियर क्यों रोक रहे?
सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को कड़ी फटकार, कहा -CAPF अधिकारियों का करियर क्यों रोक रहे?
दस्तक 7मीडिया /दिल्ली
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि केंद्रीय बलों में वर्षों से सेवा दे रहे अधिकारियों के करियर को बाहर से अधिकारियों की नियुक्ति के कारण बाधित नहीं किया जा सकता। पीठ ने टिप्पणी की कि इस व्यवस्था से CAPF के अपने कैडर के अधिकारियों का करियर ‘घुट’ रहा है और इसके पीछे एक मजबूत लॉबी के काम करने की बात सामने आती है।
जस्टिस उज्ज्वल भूइयां की पीठ ने 2 सितंबर को CAPF कैडर अधिकारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र से कई तीखे सवाल किए। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि क्या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रबंधकीय पद संभालने के लिए कोई सक्षम अधिकारी उपलब्ध नहीं है?
पीठ ने कहा कि CRPF, ITBP और BSF में 25-30 वर्षों तक सेवा देने वाले अधिकारियों को शीर्ष पदों पर पहुंचने का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है। ये अधिकारी भी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं और देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे अधिकारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
पदोन्नति में देरी से बढ़ रहा असंतोष
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाहर से IPS अधिकारियों की नियुक्ति के कारण CAPF के मूल कैडर के अधिकारियों की समय पर पदोन्नति प्रभावित होती है। इससे अधिकारियों के करियर में ठहराव आता है और बल का मनोबल भी प्रभावित होता है।
नए कानून पर भी उठे सवाल
विवाद का केंद्र CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए कानून में वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों के लिए बड़ी हिस्सेदारी तय कर CAPF के अपने कैडर के अधिकारियों के अवसर सीमित किए गए हैं। कानून के तहत महानिदेशक और विशेष महानिदेशक के पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक और महानिरीक्षक स्तर पर भी IPS अधिकारियों के लिए बड़ी हिस्सेदारी निर्धारित है।
पुराने फैसले के बाद बढ़ा विवाद
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF को संगठित समूह ‘ए’ सेवा का दर्जा देने और दो वर्षों के भीतर महानिरीक्षक स्तर तक IPS प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का निर्देश दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से नया कानून लाए जाने को अधिकारियों ने उस फैसले के प्रभाव को कमजोर करने वाला कदम बताया है।
34 से अधिक CAPF अधिकारियों ने नए कानून को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
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