एकरारनामा विखंडित, फिर भी शुरू हुआ सड़क निर्माण,

विभागीय आदेश को दरकिनार कर निजी जमीन से मिट्टी काटकर सड़क किनारे डालने का आरोप

दस्तक 7मीडिया /बेनीपुर 

ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल बेनीपुर की ओर से जिस सड़क निर्माण का एकरारनामा 27 अगस्त को विखंडित कर संवेदक की जमानत राशि जब्त करने का आदेश जारी किया गया, उसी सड़क पर विखंडन के बाद निर्माण कार्य शुरू होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि निर्माण के लिए आसपास की निजी जमीन से मिट्टी काटकर सड़क के किनारे डाली जा रही है। मामले ने ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यप्रणाली और विभागीय आदेश के अनुपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल बेनीपुर के सकारण आदेश संख्या-1433, दिनांक 27 अगस्त 2026 के अनुसार, एमएमजीएसवाई-एडब्ल्यूएसईएस योजना के तहत महिनाम पछियारी टोला से शर्मा टोला पथ तथा बेनीपुर-नंदापट्टी-मनीगाछी पीएमजीएसवाई पथ से नवादा दक्षिण टोला पथ के निर्माण का एकरारनामा संवेदक श्री सुरेश कंस्ट्रक्शन एंड कंपनी के साथ हुआ था। योजना के तहत कार्य प्रारंभ करने की तिथि 20 सितंबर 2025 और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित तिथि 19 सितंबर 2026 थी।

विभाग के आदेश में कहा गया है कि संवेदक को कार्य शुरू कर वर्क प्रोग्राम के अनुरूप निर्माण कराने के लिए कई बार नोटिस जारी किया गया। इसमें 17 अप्रैल, 14 मई, 19 जून और 8 अगस्त 2026 को जारी नोटिस शामिल हैं। इसके बावजूद 27 अगस्त तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।

27 अगस्त को स्थल निरीक्षण के दौरान भी निर्माण स्थल पर संवेदक के उपकरण, साइट रेगुलेशन एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा निर्माण सामग्री नहीं मिली। विभागीय निरीक्षण में किसी प्रकार की कार्य प्रगति भी नहीं पाई गई। इसके बाद विभाग ने सीएमबीडी की कंडिका 59.1.2 (ए) एवं 59.1.2 (एच) के उल्लंघन का हवाला देते हुए एकरारनामा संख्या 18सीएमबीडी/2025-26 को उसी दिन विखंडित कर दिया तथा संवेदक की जमानत राशि जब्त करने का आदेश जारी किया।

आदेश में अंतिम मापी के लिए संवेदक अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि को 31 अगस्त को उपस्थित होने का निर्देश भी दिया गया था। विभाग ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित तिथि पर संवेदक या उसका प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होता है तो विभागीय अभियंताओं द्वारा अंतिम मापी कर ली जाएगी और बाद में किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

आदेश के बाद आखिर किसके निर्देश पर शुरू हुआ काम?

इधर, स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि एकरारनामा विखंडित किए जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य के लिए लोगों की निजी जमीन से मिट्टी काटकर सड़क के साइड में डाले जाने की भी बात सामने आई है। इससे जमीन मालिकों में नाराजगी है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग ने 27 अगस्त को एकरारनामा विखंडित कर संवेदक की जमानत राशि जब्त करने का आदेश जारी कर दिया, तो उसके बाद निर्माण कार्य किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत शुरू किया गया? यदि निर्माण कार्य विभाग की अनुमति से हो रहा है तो उसका आधार क्या है और यदि विभाग की अनुमति नहीं है तो आदेश के बावजूद कार्य कैसे कराया जा रहा है?

एस्टीमेट के विरुद्ध काम का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता सह प्रखंड युवा जदयू उपाध्यक्ष राजन झा ने मामले पर आक्रोश जताते हुए कहा कि सड़क निर्माण का कार्य समय पर शुरू नहीं होने के मामले में विभाग को पहले ही संज्ञान लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मामला राज्य लोक शिकायत तक पहुंचने के बाद विभाग ने कार्रवाई की, लेकिन अब एकरारनामा विखंडित किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य कराया जाना गंभीर विषय है।

झा ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान लोगों की निजी जमीन से मिट्टी काटकर सड़क के किनारे डाली जा रही है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच होनी चाहिए कि निजी जमीन से मिट्टी काटने की अनुमति किसने दी और निर्माण कार्य में मिट्टी की व्यवस्था किस प्रावधान के तहत की जा रही है।

उन्होंने कहा कि एकरारनामा विखंडित होने के बाद उसी संवेदक द्वारा सड़क निर्माण कराया जाना विभागीय नियमों के अनुपालन पर सवाल खड़ा करता है। साथ ही निजी जमीन से मिट्टी काटकर सड़क निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की भी जांच जरूरी है।

जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि विखंडन आदेश के बाद सड़क निर्माण कैसे शुरू हुआ। साथ ही निजी जमीन से मिट्टी काटने की अनुमति, निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति और कार्य में इस्तेमाल की जा रही मिट्टी के स्रोत की भी जांच कराने की मांग की गई है।

अब देखना यह है कि विभाग एकरारनामा विखंडित करने के अपने ही आदेश के बाद शुरू हुए निर्माण कार्य को लेकर क्या कार्रवाई करता है और निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने के आरोप पर क्या स्पष्टीकरण देता है।