बार काउंसिल अपने सदस्यों का सम्मान नहीं बचा पाए तो यह अच्छा संकेत नहीं : जस्टिस नागरत्ना
बार काउंसिल अपने सदस्यों का सम्मान नहीं बचा पाए तो यह अच्छा संकेत नहीं : जस्टिस नागरत्ना
बार काउंसिल अपने सदस्यों का सम्मान नहीं बचा पाए तो यह अच्छा संकेत नहीं : जस्टिस नागरत्ना
दस्तक 7मीडिया /नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), दिल्ली के 13वें दीक्षांत समारोह में कानूनी पेशे की गरिमा, स्वतंत्रता और जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई बार काउंसिल अपने ही सदस्यों का सम्मान हासिल करने में सक्षम नहीं है, तो यह कानूनी पेशे के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
जस्टिस नागरत्ना ने केंद्रीय और राज्य स्तर की बार काउंसिलों से पेशेवर नैतिकता, सदाचार और दक्षता सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वकील संवैधानिक लोकतंत्र के ‘सेफ्टी वाल्व’ हैं। बार की स्वतंत्रता इसलिए जरूरी है, ताकि वकील किसी सरकारी या बाहरी दबाव के बिना लोगों की स्वतंत्र रूप से पैरवी कर सकें।
उन्होंने नए कानून स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत केवल व्यापार या पेशा नहीं, बल्कि भरोसे और सार्वजनिक जिम्मेदारी का पद है। वकीलों को अपने मुवक्किलों के लिए किए जाने वाले कार्य को लोक सेवा की भावना से देखना चाहिए। इससे न्याय व्यवस्था में आम लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
एनएएलएसएआर विवाद की पृष्ठभूमि में टिप्पणी
जस्टिस नागरत्ना की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और हैदराबाद स्थित एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के बीच विवाद चर्चा में है। एनएएलएसएआर के छात्रों की ओर से दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा राज्य बार काउंसिलों को 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने संबंधी निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इस कदम को लेकर कानूनी जगत में सवाल उठे थे।
एआई के इस्तेमाल को लेकर भी चेताया
जस्टिस नागरत्ना ने वकीलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि अदालतों में एआई से तैयार गलत या काल्पनिक फैसलों को वास्तविक न्यायिक निर्णय के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने वकीलों से तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ मानवीय विवेक, समग्र दृष्टिकोण और पेशेवर जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की अपील की।