महिनाम की जर्जर सड़कों पर सुनवाई जारी, 31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई,
कार्यपालक अभियंता ने कहा- दिसंबर तक पूरा होगा सड़क निर्माण, अपीलार्थी को मिला एक और मौका

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा/बेनीपुर।

बेनीपुर प्रखंड के महिनाम गांव की जर्जर सड़कों के निर्माण में हो रही देरी को लेकर दायर द्वितीय अपील पर सुनवाई जारी है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को अपराह्न 3:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। मंगलवार को हुई सुनवाई में अपीलार्थी राजन झा अनुपस्थित रहे, जबकि ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल बेनीपुर के कार्यपालक अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।

मामला महिनाम गांव की कई सड़कों के निर्माण से जुड़ा है। परिवादी ने आरोप लगाया है कि गांव की सड़कें लंबे समय से जर्जर हैं और निर्माण के लिए बोर्ड लगाए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। परिवाद में काली मंदिर से महिनाम पछियारी टोला, सरदार हाउस से पूबारी टोला, कचहरी मोड़ से डोम टोली समेत अन्य सड़कों की स्थिति में सुधार की मांग की गई है।

मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता ने 11 अगस्त को दिए प्रतिवेदन में बताया कि संबंधित सड़कें ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं मरम्मत योजना के तहत चयनित एवं स्वीकृत हैं। इनमें महिनाम पीडब्ल्यूडी पथ से काली मंदिर होते हुए महिनाम पछियारी टोला, एल-052 सरदार हाउस से पूबारी टोला महिनाम तथा कचहरी मोड़ से डोम टोली महिनाम तक की सड़क शामिल है।

विभाग के अनुसार इन सड़कों के निर्माण कार्य की शुरुआत 23 दिसंबर 2025 को हुई है तथा कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 22 दिसंबर 2026 है। सड़क को प्रारंभिक रूप से दुरुस्त कर मोटर योग्य बनाने का काम कराया जा रहा है। विभाग ने दावा किया है कि निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

द्वितीय अपीलीय प्राधिकार ने मामले की सुनवाई के दौरान कार्यपालक अभियंता को संबंधित सड़क निर्माण का अद्यतन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही, अपीलार्थी की अनुपस्थिति को देखते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का एक और अवसर दिया गया है। अब 31 अगस्त को होने वाली सुनवाई में मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

परिवादी ने महिनाम समेत आसपास के गांवों में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्यस्तरीय जांच टीम गठित करने तथा आगामी निर्माण में सरकारी राशि के दुरुपयोग और अनियमितता पर निगरानी रखने की भी मांग की है। अब ग्रामीणों की नजर अगली सुनवाई और विभाग की अद्यतन रिपोर्ट पर टिकी है।