मोनू सहनी मौत मामले की जांच अब इंस्पेक्टर चंद्रकांत गौड़ी के जिम्मे, दो प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बदला गया अनुसंधानक, एसआईटी भी कर रही जांच; पुलिस की भूमिका और परिजनों के आरोप भी जांच के दायरे में

दस्तक 7 मीडिया / संजय कुमार राय

बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर गांव निवासी मोनू सहनी की मौत और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के मामले की जांच अब लहेरियासराय थाना के पर्यवेक्षी पदाधिकारी इंस्पेक्टर चंद्रकांत गौड़ी करेंगे। मामले की गंभीरता और आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने दोनों प्राथमिकी के निष्पक्ष अनुसंधान की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर गौड़ी को सौंपी है। इससे पहले दोनों मामलों का अनुसंधान बहादुरपुर थाना के एसआई अभय कुमार कर रहे थे।

मामले में बहादुरपुर थाना में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। पहली प्राथमिकी पुलिस की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट को लेकर दर्ज की गई है, जबकि दूसरी प्राथमिकी मृतक मोनू सहनी के पिता जागेश्वर सहनी के आवेदन पर दर्ज हुई है। दोनों मामलों की जांच एसआईटी भी कर रही है, जिसका नेतृत्व नगर पुलिस अधीक्षक कर रहे हैं। ऐसे में एक ही पदाधिकारी को दोनों प्राथमिकी का अनुसंधान सौंपे जाने को लेकर भी चर्चा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस पर गंभीर आरोप, मौत की परिस्थितियां बनीं जांच का केंद्र

मोनू सहनी के परिजनों ने पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही मोनू ने घर में आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद शव को डीएमसीएच ले जाने के लिए पुलिस से वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि वाहन उपलब्ध कराने के बदले पुलिसकर्मियों ने पैसे की मांग की। इसके बाद मौके पर पहुंचे डीआईयू के पुलिसकर्मियों पर हवाई फायरिंग करने का आरोप भी लगाया गया।

दर्ज प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस की ओर से मोनू से लाखों रुपये की मांग की गई थी और दबाव के कारण उसने आत्महत्या कर ली। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। घटना के बाद सामने आए बयानों और प्राथमिकी में कई बिंदुओं पर विरोधाभास की बात भी सामने आ रही है। यही कारण है कि मौत की वास्तविक परिस्थितियों और पुलिस की भूमिका को लेकर जांच अहम हो गई है।

मोबाइल चोरी की जांच में मोनू के घर पहुंची थी पुलिस

पुलिस के अनुसार ओझौल निवासी कुलदीप झा का पोको मोबाइल 19 जुलाई को गुम हुआ था। इसकी शिकायत बहादुरपुर थाना में सनहा संख्या 882/26 के तहत दर्ज की गई थी। सीईआईआर पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि गुम मोबाइल में 10 अगस्त को 6206044056 नंबर इस्तेमाल हुआ था। पुलिस के अनुसार यह नंबर मोनू कुमार के नाम से जुड़ा था।

मोबाइल के सत्यापन के लिए डीआईयू के सअनि इंद्रदेव कुमार 16 अगस्त को मोनू के घर पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार 17 अगस्त को वहां पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट हुई, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए। सअनि इंद्रदेव कुमार के सिर में गंभीर चोट लगने की बात भी पुलिस की ओर से बताई गई थी।

घटना के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा थानाध्यक्ष को समय पर सूचना नहीं दिए जाने को लेकर एसएसपी ने सअनि इंद्रदेव कुमार को निलंबित कर दिया था। अब दोनों प्राथमिकी की जांच इंस्पेक्टर चंद्रकांत गौड़ी को सौंपे जाने के बाद घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। अनुसंधान में किसी अन्य पुलिसकर्मी की लापरवाही या नियम विरुद्ध कार्रवाई सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सीआईडी जांच के बीच बढ़ी मामले की संवेदनशीलता

मोनू सहनी की मौत के मामले में सीआईडी स्तर से भी जांच की जा रही है। सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत के दरभंगा पहुंचने और घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। एसआईटी भी अलग से सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

घटना स्थल के समीप राज्य सरकार के मंत्री मदन सहनी का आवास होने के कारण मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहा है। मौत को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में अब पुलिस की नई जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि मोनू की मौत किन परिस्थितियों में हुई, पुलिस की घटनास्थल पर भूमिका क्या थी और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच को तथ्यपरक रखते हुए प्राथमिकी, घटनास्थल के साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।