कुशेश्वरस्थान अस्पताल में लापरवाही की इंतहा; दर्दनाक हादसे के बाद सुबह 10 बजे तक नदारद रहे चिकित्सा पदाधिकारी व मैनेजर, तड़पते रहे घायल और उसके परिजन।

प्रशांत कुमार, दस्तक 7 मीडिया, कुशेश्वरस्थान।

बाबा नगरी कुशेश्वरनाथ धाम क्षेत्र में आज एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक तरफ जहां पूरा क्षेत्र इस दर्दनाक घटना से शोक में डूबा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) कुशेश्वरस्थान की संवेदनहीनता ने लोगों के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

दर्दनाक सड़क हादसा, एक की मौत।

मिली जानकारी के अनुसार, एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस दुर्घटना में चार अन्य लोग भी बुरी तरह घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत कुशेश्वरस्थान अस्पताल ले जाया गया, जहां उनमें से एक की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई थी। घायल जीवन-मौत की जंग लड़ रहे थे और अस्पताल में चीख-पुकार मची थी।

सुबह 10 बजे तक अस्पताल में सन्नाटा: कोई ‘ज़िम्मेदार’ हाज़िर नहीं।

इस गंभीर आपातकालीन स्थिति के बावजूद, अस्पताल प्रशासन का रवैया बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना रहा। हादसे के बाद सुबह के 10:00 बज चुके थे, लेकिन अस्पताल में न तो चिकित्सा पदाधिकारी (MO) डॉक्टर सोहराब मौजूद थे और न ही अस्पताल के हेल्थ मैनेजर विनय भूषण। सिर्फ दो डाक्टर राहुल कुमार और रंजन मौजूद थे।
आपातकालीन कक्ष में घायलों को प्राथमिक उपचार देने के लिए कोई भी वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था। खाली कुर्सियाँ और बंद केबिन अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल रहे थे, जबकि घायल और उनके परिजन प्रशासन की राह ताकते हुए तड़प रहे थे।

जनता में भारी आक्रोश, सिस्टम पर उठे सवाल।

इस अमानवीय लापरवाही को देखकर अस्पताल में मौजूद लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बाबा नगरी में इतने बड़े हादसे हो गए हैं, तो आपातकालीन सेवाओं का इस तरह भगवान भरोसे होना एक बड़े घोटाले और प्रबंधन की विफलता की ओर इशारा करता है।

जनता सवाल पूछ रही है कि इतनी बड़ी आपातकालीन स्थिति के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ड्यूटी पर क्यों नहीं थे?
क्या डॉ. सोहराब अपने निजी नर्सिंग होम में व्यस्त रहते है और अपनी जिम्मेदारी से दूर रहना चाहते है, और हेल्थ मैनेजर विनय भूषण की अनुपस्थिति ने घायलों की जान को और खतरे में नहीं डाला क्योंकि चार घायलों में एक की स्थिति काफी नाजुक थी।
इस तरह की घोर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है, और क्या उन पर कोई कड़ी कार्रवाई होगी?

स्थानीय नागरिकों की मांग: त्वरित कार्रवाई हो

स्थानीय नागरिक और समाजसेवी ने इस पूरी घटना पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तथा दरभंगा के डीएम से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि लापरवाही की हद पार हो चुकी है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और कुशेश्वरस्थान जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के अस्पताल में 24×7 आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि भविष्य में किसी की जान लापरवाही के कारण न जाए।