बिहार में परीक्षा व्यवस्था होगी और सुरक्षित, पारदर्शी, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित, न्यायाधीश करेंगे अध्यक्षता; पंजीकरण से परिणाम तक होगी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा
बिहार में परीक्षा व्यवस्था होगी और सुरक्षित, पारदर्शी, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित, न्यायाधीश करेंगे अध्यक्षता; पंजीकरण से परिणाम तक होगी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा
बिहार में परीक्षा व्यवस्था होगी और सुरक्षित, पारदर्शी,
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित, न्यायाधीश करेंगे अध्यक्षता; पंजीकरण से परिणाम तक होगी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा
दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा
बिहार सरकार ने राज्य की परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रश्नपत्र लीक, नकल और परीक्षा से जुड़ी अन्य गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने और पूरी प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाने का निर्णय लिया है।
समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। समिति परीक्षा संचालन और मूल्यांकन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित आधुनिक तकनीकी प्रणालियों के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन करेगी। साथ ही दुनिया के विभिन्न देशों में अपनाई जा रही सुरक्षित और तकनीक आधारित परीक्षा प्रणालियों का अध्ययन कर बिहार के लिए प्रभावी मॉडल सुझाएगी।
पंजीकरण से परिणाम तक होगी समीक्षा
विशेषज्ञ समिति परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी। पंजीकरण से लेकर अंतिम परिणाम जारी होने तक पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। छात्र पंजीकरण और परीक्षा संबंधी आंकड़ों को अधिक सुरक्षित बनाने के साथ अनधिकृत पहुंच की संभावना को खत्म करने के उपाय सुझाए जाएंगे।
प्रश्नपत्रों की छपाई, भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर रहेगा। उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ रोकने तथा मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश की जाएगी।
परिणाम में गड़बड़ी पर तय होगी जवाबदेही
समिति परीक्षा परिणाम में किसी भी प्रकार की हेराफेरी की संभावना को समाप्त करने और समय पर परिणाम जारी करने के लिए व्यवस्था तैयार करने की सिफारिश करेगी। परीक्षा में गड़बड़ी होने की स्थिति में संबंधित बोर्ड, विश्वविद्यालय, भर्ती एजेंसी या परीक्षा केंद्र की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए भी बेहतर जवाबदेही तंत्र विकसित करने पर सुझाव दिए जाएंगे।
मैट्रिक से प्रतियोगी परीक्षाओं तक दायरा
समिति की सिफारिशों का दायरा बिहार में आयोजित होने वाली प्रमुख परीक्षाओं तक रहेगा। इसमें मैट्रिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के अलावा राज्य के विश्वविद्यालयों की डिग्री एवं तकनीकी परीक्षाएं तथा विभिन्न भर्ती एजेंसियों और आयोगों द्वारा आयोजित प्रतियोगी और पात्रता परीक्षाएं शामिल होंगी।
सरकार ने समिति को तीन महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिहार की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव किए जाने की उम्मीद है।