मोनू सहनी के मौत की सीआईडी जांच शुरू, खराजपुर पहुंचे डीआईजी जयंतकांत ,परिजनों ने डीआईयू टीम पर पैसे मांगने और दबाव बनाने का लगाया आरोप; पुलिस टीम पर हमले और मौत के कारणों की हो रही हे जांच ?

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा 

बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर गांव निवासी मोनू कुमार उर्फ मोनू सहनी की मौत की जांच अब एसआईटी के साथ सीआईडी भी कर रही हे। पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच शुक्रवार को सीआईडी डीआईजी जयंत कांत खराजपुर पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों से करीब दो घंटे तक बातचीत कर घटना की जानकारी ली।डीआईजी जयंत कांत ने घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया और कई परिजनों समेत वार्ड पार्षद से भी घटना के बाबत जानकारी लेने का प्रयास किया यही नहीं लौटने के क्रम में बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी के घर पर भी गये ,इस दौरान उनके साथ  मिथिला रेंज के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी और सिटी एसपी अशोक कुमार भी मौजूद रहे।

परिजनों ने जिला आसूचना इकाई (डीआईयू) की पुलिस टीम पर पैसे मांगने, दबाव बनाने और हवाई फायरिंग करने का आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। सीआईडी जांच में पुलिस कार्रवाई, मोनू की मौत के कारण और पुलिस टीम पर हमले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की।

गुम मोबाइल की जांच से जुड़ा था मामला

पुलिस के अनुसार, ओझौल निवासी कुलदीप झा का पोको मोबाइल 19 जुलाई को गुम हो गया था। इस संबंध में बहादुरपुर थाने में सनहा संख्या 882/26 दर्ज किया गया था। सीईआईआर पोर्टल से जांच में पता चला कि 10 अगस्त को गुम मोबाइल में 6206044056 नंबर का इस्तेमाल हुआ था। यह नंबर खराजपुर निवासी मोनू कुमार के नाम से जुड़ा पाया गया था।

इसी आधार पर 16 अगस्त को डीआईयू के सहायक अवर निरीक्षक इन्द्रदेव कुमार सत्यापन के लिए मोनू के घर पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, मोनू के भाई रवि कुमार ने एक पोको मोबाइल पुलिस को सौंपा, लेकिन उसका आईएमईआई गुम मोबाइल के आईएमईआई से अलग पाया गया।

मोनू की मौत के बाद दर्ज हुए दो मामले

17 अगस्त को मोनू के आत्महत्या करने की सूचना पुलिस को मिली। उसी दिन पुलिस टीम मोबाइल से संबंधित जानकारी लेने उसके घर पहुंची। पुलिस का दावा है कि वहां पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई, जिसमें तीन जवान घायल हुए। दूसरी ओर, परिजनों का आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही मोनू की मौत हो चुकी थी और इस मौत का कारण पुलिसिया दबाव था।

पुलिस टीम पर हमले के मामले में बहादुरपुर थाना कांड संख्या 254/26 दर्ज किया गया है। मोनू के पिता जागेश्वर सहनी के आवेदन पर कांड संख्या 255/26 दर्ज की गई है। दोनों मामलों की जांच नगर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही है।

पैसे मांगने के आरोप की भी हो रही हे जांच 

परिजनों ने पुलिस पर मोबाइल बरामदगी के बदले दस लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है। सीआईडी जांच में इस आरोप की भी पड़ताल की जाएगी। पैसे की मांग या लेन-देन से संबंधित कोई साक्ष्य मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जा सकती है।

एएसआई इन्द्रदेव कुमार को एसएसपी कर चुके हे निलंबित

घटना के बाद एसएसपी ने डीआईयू में तैनात एएसआई इन्द्रदेव कुमार को निलंबित कर दिया। उन पर मोबाइल बरामदगी से जुड़ी कार्रवाई की सूचना समय पर संबंधित थाने को नहीं देने का आरोप है। निलंबन के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं।

मौत का कारण जांच का मुख्य केंद्र

मोनू की मौत को पुलिस आत्महत्या बता रही है, जबकि परिजनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, मोबाइल और कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच की दिशा ही इस मामले की सच्चाई तय करेंगे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मोनू का पूर्व आपराधिक इतिहास भी रहा है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले उसके पुराने मामलों को वर्तमान मौत से जोड़ा नहीं जा रहा हे।

राजनीतिक दबाव के बीच निष्पक्ष जांच की चुनौती

मोनू सहनी की मौत के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। मंत्री मदन सहनी समेत कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इससे पुलिस मुख्यालय पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का दबाव बढ़ गया है।

सीआईडी और एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मोनू की मौत से पहले और बाद में क्या हुआ था, पुलिस टीम पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। मौत का अंतिम कारण जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत का कहना हे कि इस मामले में जांच के बाद ही कुछ भी कहना उचित होंगा।